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सियोल में अमेरिकी दूतावास के बाहर प्रदर्शन, दक्षिण कोरिया के मामलों में दखल का आरोप

सियोल, 2 मई (आईएएनएस)। सियोल में शनिवार को एक प्रोग्रेसिव (प्रगतिशील) नागरिक समूह ने अमेरिकी दूतावास के बाहर विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने नारे लगाते हुए अमेरिका पर दक्षिण कोरिया के अंदरूनी मामलों में दखल देने का आरोप लगाया।

पुलिस के मुताबिक, करीब 500 लोग ग्वांगवामुन इलाके में अमेरिकी दूतावास के बाहर जमा हुए। उनके हाथों में तख्तियां थीं, जिन पर लिखा था कि अमेरिका दक्षिण कोरिया की संप्रभुता (आत्मनिर्भरता) को कमजोर कर रहा है और सियोल से के-पॉप एंटरटेनमेंट पावरहाउस हाइब के चेयरमैन बैंग सी-ह्युक पर एग्जिट बैन हटाने की रिक्वेस्ट करके उसके घरेलू मामलों में दखल दे रहा है।

योनहाप न्यूज एजेंसी ने बताया कि प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया क‍ि अमेरिका दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे म्युंग पर हमला कर रहा है, क्योंकि उन्होंने ईरान के खिलाफ अमेरिका के युद्ध में साथ देने से इनकार किया है और साथ ही वे युद्धकालीन ऑपरेशनल कंट्रोल को जल्दी अमेरिका से वापस लेने की कोशिश कर रहे हैं।

उन्होंने वॉशिंगटन की आलोचना करते हुए कहा कि अमेरिका ने उत्तर कोरिया से जुड़ी खुफिया जानकारी साझा करने पर रोक लगा दी है। इसकी वजह यह बताई जा रही है कि एकीकरण मंत्री चुंग डोंग-यंग ने एक अज्ञात उत्तर कोरियाई परमाणु सुविधा से जुड़ी साझा जानकारी को एकतरफा तरीके से सार्वजनिक कर दिया था। इसके अलावा, उन्होंने अमेरिका की ओर से मिशेल पार्क स्टील (एक कंजर्वेटिव और पूर्व रिपब्लिकन सांसद) को दक्षिण कोरिया में नया राजदूत बनाने के फैसले की भी आलोचना की।

कैंडललाइट एक्शन नाम के इस सिविक ग्रुप के लोग जोंगगाक स्टेशन से मार्च करते हुए आए और फिर दूतावास के सामने रुककर रैली की।

पुलिस ने लाउडस्पीकर से दो बार चेतावनी दी और उन्हें आगे बढ़ने के लिए कहा। प्रदर्शनकारी शांतिपूर्वक मान गए और कोई झड़प नहीं हुई।

कुछ घंटे पहले, करीब 6,000 लोगों ने एक अलग प्रदर्शन किया, जो एक कंजर्वेटिव समूह से जुड़े थे। इस प्रदर्शन का नेतृत्व कट्टरपंथी पादरीजियोन क्वांग-हून कर रहे थे।

इन लोगों ने पूर्व राष्ट्रपति यून सुक-योल की ओर से लगाए गए थोड़े समय के मार्शल लॉ को सही ठहराया। उनका कहना था कि अगर देश मुश्किल में हो तो नेता को ऐसा कदम उठाने का अधिकार है।

फरवरी 2026 में भी कंजर्वेटिव और प्रोग्रेसिव समूह कैंडललाइट एक्शन ने अलग-अलग रैलियां की थीं। उस समय एक अदालत ने पूर्व राष्ट्रपति यून सुक-योल को 2024 में मार्शल लॉ लागू करने की कोशिश के मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई थी, जिसके बाद कहीं गुस्सा तो कहीं खुशी देखने को मिली थी।

--आईएएनएस

एवाई/डीकेपी

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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कैरिबियाई दौरे के दौरान व‍िदेश मंत्री एस. जयशंकर का ज्‍यूरिख एयरपोर्ट पर स्वागत

नई द‍िल्‍ली, 2 मई (आईएएनएस)। विदेश मंत्री एस. जयशंकर अपनी कैरिबियाई यात्रा के दौरान ज्‍यूरिख हवाई अड्डे पर पहुंचे, जहां इंड‍िया-स्विट्जरलैंड के प्रतिनिधि अनूप ढींगरा ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया।

स्विट्जरलैंड में भारतीय दूतावास ने आध‍िकार‍िक एक्‍स अकाउंट पर जानकारी साझा करते हुए बताया क‍ि विदेश मंत्री एस. जयशंकर का कैरिबियाई देशों की अपनी आधिकारिक यात्रा के मार्ग में ज्‍यूरिख हवाई अड्डे पर इंड‍िया-स्विट्जरलैंड के मिन (कॉम) अनूप ढींगरा ने हार्दिक स्वागत किया।

भारतीय विदेश मंत्रालय के अनुसार, विदेश मंत्री एस. जयशंकर दो से दस मई तक जमैका, सूरीनाम और त्रिनिदाद और टोबैगो की आधिकारिक यात्रा पर हैं। जमैका, सूरीनाम और त्रिनिदाद और टोबैगो भी कैरिबियन समुदाय के सदस्य देश हैं।

विदेश मंत्रालय के अनुसार, इस यात्रा के दौरान जयशंकर इन तीनों देशों के नेताओं से मिलेंगे और अपने समकक्ष मंत्रियों के साथ द्विपक्षीय संबंधों के साथ-साथ क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी चर्चा करेंगे, जिनमें दोनों पक्षों की रुचि है।

मंत्रालय ने कहा कि यह यात्रा भारत और इन देशों के बीच राजनीतिक संबंधों को और मजबूत करेगी, लंबे समय से चले आ रहे दोस्ताना रिश्तों को आगे बढ़ाएगी और दक्षिण-दक्षिण सहयोग और विकास को भी बढ़ावा देगी।

विदेश मंत्री इन देशों में व्यापार जगत के प्रमुख लोगों और भारतीय समुदाय के सदस्यों से भी मुलाकात करेंगे और बातचीत करेंगे।

जमैका, सूरीनाम और त्रिनिदाद और टोबैगो जैसे कैरिबियाई देशों का भारत से खास संबंध है, क्योंकि यहां गिरमिटिया समुदाय के लोग रहते हैं।

‘गिरमिटिया’ वे भारतीय मजदूर थे, जो 19वीं सदी के मध्य और अंत में ब्रिटिश काल के दौरान काम करने के लिए भारत से दूसरे देशों में गए थे। बाद में उनमें से कई लोग वहीं बस गए। ‘गिरमिट’ शब्द ‘एग्रीमेंट’ (समझौते) का गलत उच्चारण है, जो उनके काम के अनुबंध के लिए इस्तेमाल होता था।

पिछले महीने भी जयशंकर ने भारत में सेंट किट्स और नेविस के उच्चायोग के खुलने का स्वागत किया था। उन्होंने कहा था कि इससे दोनों देशों के संबंध और मजबूत होंगे।

उन्होंने यह भी कहा था कि भारत और सेंट किट्स और नेविस दक्षिण-दक्षिण सहयोग में एक-दूसरे का समर्थन करते हैं और उन्होंने इंटरनेशनल सोलर अलायंस में उस देश की सक्रिय भागीदारी की सराहना भी की थी।

जयशंकर ने सेंट किट्स और नेविस को इस साल जनवरी में कैरिकॉम की अध्यक्षता संभालने पर बधाई दी थी और भारत तथा कैरिकॉम देशों के बीच मजबूत रिश्तों की सराहना की थी।

--आईएएनएस

एवाई/डीकेपी

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