Kaushambi Court ने नाबालिग के अपहरण और दुष्कर्म के दोषी को 10 साल कारावास की सजा सुनाई
कौशांबी (उप्र) 10 अगस्त कौशांबी जिले की एक विशेष अदालत ने एक नाबालिग लड़की को अगवा कर उसे साढ़े तीन माह तक बंधक बनाने और उससे दुष्कर्म करने के व्यक्ति को दोषी करार देते हुए 10 वर्ष कारावास की सजा सुनाई और उस पर 20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। अभियोजन पक्ष ने यह जानकारी दी। फौजदारी के अपर जिला शासकीय अधिवक्ता (एडीजीसी) संजय मिश्रा ने बताया कि जिला न्यायालय के अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (त्वरित अदालत-प्रथम) नरेंद्र नाथ पांडेय ने सोमवार को आरोपी बृजेश को दोषी करार देते हुए 10 वर्ष सश्रम कारावास की सजा सुनाई और उस पर 20 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया।
उन्होंने बताया कि 27 अप्रैल, 2018 को जिले के कोखराज थाना क्षेत्र के एक गांव की रहने वाली 15 वर्षीय लड़की ने तहरीर दी कि दो जनवरी 2018 को थाना क्षेत्र के कसिया पश्चिम गांव स्थित वाचस्पति इंटर कॉलेज के पास कसिया पश्चिम का रहने वाला बृजेश (24) अपने भाई प्रमोद के साथ मिलकर उसे जबरन चार पहिया वाहन में बैठा कर हरियाणा के गुरुग्राम ले गया, जहां 25 अप्रैल 2018 तक बंधक बनाकर रखा गया तथा इस दौरान उससे कई बार दुष्कर्म किया। पीड़िता ने बताया कि वह किसी तरह बृजेश के चंगुल से अपनी जान बचाकर घर वापस लौटी और अपने माता-पिता को अपनी आप बीती सुनाई। पीड़िता की तहरीर पर थाना कोखराज में संबंधित धाराओं तथा बाल यौन अपराध संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया था।
विवेचना के बाद आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया गया। मिश्रा ने बताया कि अभियोजन पक्ष की दलीलें व गवाहों के बयान तथा घटना के संबंध में प्रस्तुत साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद अदालत ने बृजेश को दोषी ठहराया। उन्होंने बताया कि अर्थ दंड न अदा करने पर अभियुक्त को छह माह के अतिरिक्त कारावास की सजा भुगतनी होगी।
उन्होंने कहा कि जुर्माने की पूरी धनराशि पीड़िता को मुआवजे के रूप में प्रदान की जाएगी।
Ayodhya Ram Mandir चंदा चोरी आरोपी के मकान पर सुनवाई 14 अगस्त को करेगा ADA
अयोध्या विकास प्राधिकरण (एडीए) राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी के आरोपी लवकुश मिश्रा की पत्नी के निर्माणाधीन मकान से जुड़े मामले की सुनवाई 14 अगस्त को करेगा। प्राधिकरण के एक अधिकारी ने सोमवार को यह जानकारी दी। एडीए ने सोहावल के बनीपुर इलाके में बन रहे मकान को लेकर लवकुश मिश्रा की पत्नी सुप्रिया मिश्रा को कारण बताओ नोटिस जारी किया था।
आरोप था कि निर्माण कार्य में भवन निर्माण के नियमों का उल्लंघन किया गया है। प्राधिकरण ने स्वीकृत भवन योजना और अन्य संबंधित दस्तावेज मांगे थे। राम मंदिर के चढ़ावे में कथित हेराफेरी की जांच के बीच यह संपत्ति जांच के दायरे में आई है।
जांचकर्ताओं को संदेह है कि यह संपत्ति लवकुश मिश्रा की गिरफ्तारी से पहले कथित तौर पर गबन किए गए चंदे से खरीदी गई हो सकती है। एडीए सचिव राजेश मिश्रा ने सोमवार को ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, लवकुश मिश्रा के मकान के मामले की सुनवाई अब 14 अगस्त को होगी। प्राधिकरण ने सबसे पहले तीन जुलाई को नोटिस जारी किया था।
कोई जवाब न मिलने पर 14 जुलाई को दो मंजिला इमारत पर अंतिम नोटिस चस्पा किया गया। इसमें सुप्रिया मिश्रा को जरूरी दस्तावेज पेश करने का मौका दिया गया और चेतावनी दी गई कि ऐसा न करने पर इमारत को सील किया जा सकता है। अधिकारियों के अनुसार, मिश्रा ने पिछले साल 16 अक्टूबर को बनीपुर में अपनी पत्नी के नाम पर 1,000 वर्ग फुट का प्लॉट खरीदा था।
वह राम मंदिर में नकद चंदे की गिनती करने वाले ‘आउटसोर्स’ कर्मचारी के तौर पर काम कर रहा था और उसे 15,000 रुपये मासिक वेतन मिलता था। मिश्रा फिलहाल कथित चोरी के मामले में जेल में बंद है और स्थानीय अदालत ने सोमवार को सभी आरोपियों की रिमांड 14 दिन और बढ़ा दी। अयोध्या पुलिस ने पहले उनके ठिकानों से 14.25 लाख रुपये बरामद किए थे।
वह मंदिर के चंदा-गिनती प्रक्रिया से जुड़े उन आठ लोगों में शामिल था, जिन्हें उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) की प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर 25 जून को दर्ज प्राथमिकी के बाद गिरफ्तार किया गया था। इस मामले में सबसे ज़्यादा नकद 20.39 लाख रुपये सह-आरोपी अविनाश शुक्ला से बरामद किया गया। जांचकर्ताओं ने विदेशी मुद्रा, सोना और चांदी के अलावा ‘रामराज्य कोष’ लिखा हुआ एक दान पात्र भी बरामद किया।
राम मंदिर के चढ़ावे में कथित हेराफेरी का मामला सात जून को सामने आया था और इस मामले की जांच की जा रही है।
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