कर्नाटक के तुमकुरु में 44 मोरों की रहस्यमयी मौत से मचा हड़कंप, लोगों के लिए अलर्ट जारी
कर्नाटक के तुमकुरु जिला में बड़ी संख्या में मोरों की मौत के बाद प्रशासन में हड़कंप मच गया है. जांच में पुष्टि हुई है कि इन मोरों की मौत एच5एन1 (H5N1) बर्ड फ्लू वायरस से हुई है. इसके बाद पूरे इलाके में अलर्ट जारी कर दिया गया है. साथ ही संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्र के 10 किलोमीटर के दायरे को कंटेनमेंट जोन घोषित कर दिया है. अधिकारियों का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य वायरस को अन्य क्षेत्रों में फैलने से रोकना है.
एक हफ्ते में 40 से ज्यादा मोरों की मौत
जानकारी के मुताबिक, 16 अप्रैल से लगातार मोरों के मरने की घटनाएं सामने आ रही थीं. खेतों और खुले इलाकों में मृत मोर मिलने के बाद उनके नमूने जांच के लिए आईसीएआर-राष्ट्रीय उच्च सुरक्षा पशु रोग संस्थान भेजे गए थे. जांच रिपोर्ट में साफ हुआ कि यह बर्ड फ्लू का मामला है. एक हफ्ते के भीतर 44 मोरों की मौत हो चुकी है.
Karnataka: 40 peacocks dead due to H5N1 virus in Tumkur, people advised to consume well-cooked, boiled meat
— ANI Digital (@ani_digital) May 2, 2026
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इन गांवों में सबसे ज्यादा असर
केसरामदु, हीरेहाली और गुलूर ग्राम पंचायत क्षेत्रों में सबसे ज्यादा मामले सामने आए हैं. इसके बाद प्रशासन ने इन इलाकों में निगरानी बढ़ा दी है. वन विभाग, स्वास्थ्य विभाग और पशुपालन विभाग की टीमें लगातार हालात पर नजर रख रही हैं.
पोल्ट्री फार्म और अस्पताल अलर्ट पर
अधिकारियों ने पोल्ट्री फार्म संचालकों को विशेष सावधानी बरतने के निर्देश दिए हैं. सभी फार्मों में निगरानी बढ़ा दी गई है और संक्रमण रोकने के लिए दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं. स्वास्थ्य विभाग ने भी अस्पतालों को अलर्ट पर रखा है. अस्पतालों में पीपीई किट, मास्क, दवाइयों और जांच किट का पर्याप्त स्टॉक रखने को कहा गया है.
#WATCH | Tumakur, Karnataka: Deputy Commissioner Subha Kalyan says, "It was reported that there were deaths of wild birds, peacocks in Tumkur... Around 40 peacocks have died. So the samples were sent for further examination, and it was confirmed yesterday that the H5N1 virus was… pic.twitter.com/7Yv41Cot9f
— ANI (@ANI) May 1, 2026
लोगों के लिए सावधानी जरूरी
जिला प्रशासन ने लोगों को केवल अच्छी तरह पका हुआ मांस खाने की सलाह दी है. साथ ही किसी भी तरह के मृत पक्षी के संपर्क में आने से बचने को कहा गया है. राहत की बात यह है कि 23 अप्रैल के बाद से किसी नए मोर की मौत की खबर सामने नहीं आई है.
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स्कूली बच्चों की फीस को लेकर दिल्ली सरकार का बड़ा फैसला, शिक्षा निदेशालय ने जारी किया ये आदेश
Delhi School: अगर आप राजदानी दिल्ली में रहते हैं और आप अपने बच्चों की स्कूल फीस को लेकर परेशान हैं तो चिंता की कोई बात नहीं है. क्योंकि दिल्ली के स्कूलों में अब आपको एक बार में एक महीने से अधिक की फीस नहीं देनी होगी. ये बाद दिल्ली सरकार ने कही है. दिल्ली सरकार ने आदेश दिया है कि स्कूल छात्रों के अभिभावकों को एक बार में एक महीने से अधिक की फीस देने के लिए बाध्य नहीं कर सकते.
शिक्षा निदेशालय ने जारी किया आदेश
इस संबंध में शिक्षा निदेशालय (DOE) ने शुक्रवार को एक आदेश जारी किया. जिसमें कहा गया कि दिल्ली में कोई भी निजी गैर-सहायता प्राप्त मान्यता प्राप्त स्कूल किसी भी अभिभावक या संरक्षक को एक कैलेंडर महीने से अधिक की अवधि के लिए स्कूल फीस एक ही किस्त में भुगतान करने के लिए बाध्य, आवश्यक या अनिवार्य नहीं कर सकता है.
शिक्षा विभाग (DoE) ने अपने आदेश में कुछ निजी गैर-सहायता प्राप्त स्कूलों द्वारा अभिभावकों को दो महीने या तीन महीने की या फिर एडवांस में फीस जमा करने के लिए मजबूर करने के संबंध में अभिभावकों और संरक्षकों की बार-बार की शिकायतों का हवाला दिया.
शिक्षा विभाग के आदेश में कहा गया है, "यह नियम अभिभावकों, विशेष रूप से निम्न और मध्यम आय वर्ग के अभिभावकों पर अनुचित वित्तीय बोझ डालती है और शिक्षा तक समान और समावेशी पहुंच सुनिश्चित करने के मूल उद्देश्य के विपरीत है." आदेश में कहा गया है कि यह नियम उच्च न्यायालय द्वारा दिए गए निर्देशों और शिक्षा विभाग द्वारा जारी निर्देशों के अनुरूप नहीं है.
आदेश में क्या कहा गया?
शिक्षा विभाग ने 15 फरवरी, 2019 के अपने परिपत्र का भी हवाला दिया, जिसमें निजी गैर-सहायता प्राप्त मान्यता प्राप्त स्कूलों को 10 अप्रैल, 2013 को "श्री राहुल चड्ढा और अन्य बनाम समर फील्ड स्कूल और अन्य" मामले में उच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश के अनुपालन में मासिक आधार पर शुल्क वसूलने का निर्देश दिया गया था.
स्वेच्छा से एक महीने से ज्यादा की फीस दे सकते हैं पेरेंट्स
यह स्पष्ट करने के लिए कि शिक्षा विभाग के आदेश में यह साफ किया गया है कि यदि कोई माता-पिता या अभिभावक एक महीने से अधिक की फीस एक ही किश्त में देना चाहते हैं, तो उन्हें ऐसा करने की अनुमति दी जा सकती है. इस आदेश में स्कूलों को माता-पिता और अभिभावकों को एक बार में एक महीने से अधिक की फीस जमा करने के लिए मजबूर करने से भी प्रतिबंधित किया गया है, जिसे "प्रवेश, नामांकन जारी रखने, या छात्र को दिए जाने वाले किसी अन्य लाभ या सेवा" के लिए एक शर्त के रूप में इस्तेमाल किया जाना चाहिए.
नोटिस बोर्ड और अपनी वेबसाइट पर देना होगा संदेश
इसके साथ ही शिक्षा विभाग ने सभी स्कूलों को कहा है कि उन्हें यह आदेश अपने नोटिस बोर्ड पर प्रदर्शित करने और सात दिनों के भीतर इसे अपनी आधिकारिक वेबसाइटों पर अपलोड करने का निर्देश दिया गया है. साथ ही विभाग ने कहा है कि अगर आदेश का पालन नहीं किया गया तो दिल्ली स्कूल शिक्षा अधिनियम, 1973 और दिल्ली स्कूल शिक्षा नियम, 1973 के तहत उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.
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