उर्वरक क्षेत्र में आयात प्रतिस्थापन और वीजीआरसी में जनजातीय पर्यटन के विकास पर ध्यान केंद्रित कर रहा गुजरात
सूरत, 1 मई (आईएएनएस)। शुक्रवार को सूरत में आयोजित वाइब्रेंट गुजरात क्षेत्रीय सम्मेलन (वीजीआरसी) में नीति और उद्योग से जुड़ी चर्चाओं की एक श्रृंखला के दौरान, उर्वरक क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को सुदृढ़ करने के साथ-साथ राज्य के आदिवासी क्षेत्रों में पर्यटन बुनियादी ढांचे में निवेश बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया।
ऑरो यूनिवर्सिटी में, उर्वरक क्षेत्र में आयात प्रतिस्थापन के माध्यम से आत्मनिर्भरता प्राप्त करने की रणनीतियां विषय पर एक राष्ट्रीय-स्तरीय पैनल चर्चा आयोजित की गई, जिसका संयुक्त आयोजन राज्य सरकार के ऊर्जा और पेट्रोकेमिकल्स विभाग और वीजीआरसी द्वारा किया गया था।
इस सत्र में 100 से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया, जिनमें उर्वरक उद्योग, कृषि क्षेत्र, शिक्षा जगत और नीति संस्थानों के विशेषज्ञ शामिल थे।
प्रतिभागियों ने प्रमुख उर्वरक इनपुट, विशेष रूप से पोटाश और फॉस्फेटिक कच्चे माल, के लिए भारत की आयात पर निरंतर निर्भरता पर चर्चा की, और घरेलू उत्पादन क्षमता बढ़ाने की आवश्यकता का आकलन किया।
चर्चाओं का मुख्य केंद्र कृषि में दीर्घकालिक स्थिरता को बेहतर बनाने के लिए प्रौद्योगिकी-आधारित समाधान और नीतिगत हस्तक्षेप भी रहे।
विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि जहां एक ओर भारत दुनिया में उर्वरकों के सबसे बड़े उपभोक्ताओं में से एक है, वहीं दूसरी ओर यह कई महत्वपूर्ण घटकों के लिए अभी भी बाहरी स्रोतों पर निर्भर है।
चर्चा में यूरिया, डायअमोनियम फॉस्फेट (डीएपी) और मिश्रित उर्वरकों के घरेलू उत्पादन को बढ़ाने के महत्व को रेखांकित किया गया; साथ ही, आयात पर निर्भरता और उत्पादन लागत को कम करने के लिए नैनो यूरिया, जैव-उर्वरक और जैविक इनपुट जैसे विकल्पों को बढ़ावा देने की बात भी कही गई।
उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि बदलती वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियां, आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान और इनपुट की कीमतों में उतार-चढ़ाव ने भारत की कृषि अर्थव्यवस्था के लिए उर्वरकों के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को और भी अधिक महत्वपूर्ण बना दिया है।
चर्चा का निष्कर्ष यह रहा कि किसानों के लिए उर्वरकों की स्थिर और किफायती आपूर्ति सुनिश्चित करने हेतु सरकारी निकायों, उद्योग के हितधारकों और अनुसंधान संस्थानों के बीच समन्वित प्रयासों की आवश्यकता है।
इसी सम्मेलन के एक अलग सत्र में, राज्य सरकार ने आदिवासी और ग्रामीण क्षेत्रों में पर्यटन बुनियादी ढांचे के विकास पर अपना ध्यान केंद्रित करने की रूपरेखा प्रस्तुत की; इसके साथ ही, उन्होंने इको-टूरिज्म और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ी पहलों को बढ़ावा देने की बात भी कही।
पर्यटन विकास पर आयोजित एक संगोष्ठी को संबोधित करते हुए, राज्य के पर्यटन मंत्री डॉ. जयराम गामित ने दक्षिण गुजरात के आदिवासी क्षेत्रों में पर्यटन की बढ़ती संभावनाओं का उल्लेख किया, और सपूतारा को एक प्रमुख पर्यटन स्थल के रूप में रेखांकित किया।
उन्होंने बताया कि सपूतारा में आने वाले पर्यटकों की संख्या वित्त वर्ष 2023-24 के 1.13 लाख से बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 में 1.19 लाख हो गई है।
--आईएएनएस
एससीएच
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
ईरान से बातचीत अनिश्चित, समझौते और सैन्य कार्रवाई दोनों विकल्प खुले: ट्रंप
वॉशिंगटन, 1 मई (आईएएनएस)। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को कहा कि ईरान के साथ बातचीत अभी भी अनिश्चित बनी हुई है। उन्होंने चेतावनी दी कि मौजूदा प्रस्तावों से वे खुश नहीं हैं, साथ ही यह भी कहा कि कूटनीति और सैन्य कार्रवाई दोनों विकल्प खुले हैं।
ट्रंप ने पत्रकारों से कहा, जब वे मरीन वन से रवाना हो रहे थे, “वे समझौता करना चाहते हैं, लेकिन मैं उससे संतुष्ट नहीं हूं, तो देखते हैं आगे क्या होता है।”
उन्होंने ईरान के नेतृत्व को बंटा हुआ और असमंजस में बताया। ट्रंप ने कहा कि वे सब समझौता करना चाहते हैं, लेकिन सब कुछ अस्त-व्यस्त है, और जोड़ते हुए कहा कि नेतृत्व बहुत बिखरा हुआ है और अंदर ही अंदर मतभेद हैं।
ट्रंप का कहना था कि ईरान के अंदर की ये खींचतान उसकी बातचीत की स्थिति को कमजोर कर रही है। उन्होंने कहा कि वहां के नेता एक-दूसरे से सहमत नहीं हैं और उन्हें खुद नहीं पता कि असली नेता कौन है, जिससे बातचीत मुश्किल हो रही है।
उन्होंने यह भी दावा किया कि ईरान की सेना काफी कमजोर हो चुकी है। ट्रंप के अनुसार हाल के संघर्ष के बाद देश के पास न नौसेना बची है, न वायुसेना, और रक्षा क्षमता भी सीमित रह गई है।
ट्रंप ने कहा कि अगर बातचीत सफल नहीं होती, तो सैन्य कार्रवाई भी एक विकल्प है। उन्होंने कहा कि या तो तनाव बढ़ेगा या फिर समझौता होगा।
ट्रंप ने यह भी कहा कि सैन्य कदमों के लिए कांग्रेस की मंजूरी लेने की जरूरत नहीं है। उनके अनुसार ऐसी मंजूरी पहले कभी नहीं ली गई और कई लोग इसे पूरी तरह असंवैधानिक मानते हैं।
उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी सैन्य कार्रवाई से ईरान पर दबाव बढ़ा है। ट्रंप बोले, “हम बड़ी जीत के बीच में हैं,” और कहा कि ईरान की कमजोर स्थिति ही उसे समझौते की ओर धकेल रही है।
उन्होंने यह भी कहा कि बातचीत चल रही है लेकिन लगातार बदलती रहती है। उनके अनुसार वे करीब आते हैं, फिर लोगों का एक नया ग्रुप आ जाता है, जिससे ईरान की स्थिति बदल जाती है।
ट्रंप ने यह भी बताया कि इस संघर्ष का असर दुनिया के तेल बाजार पर भी पड़ रहा है, और बहुत सारा तेल समुद्र में फंसा हुआ है क्योंकि आपूर्ति में रुकावट आई है।
अमेरिका लंबे समय से ईरान के परमाणु कार्यक्रम को रोकने के लिए प्रतिबंधों और बातचीत दोनों का इस्तेमाल करता रहा है। लेकिन बातचीत बार-बार अटक जाती है, खासकर जांच, यूरेनियम संवर्धन की सीमा और क्षेत्रीय सुरक्षा मुद्दों को लेकर।
हाल की तनावपूर्ण स्थिति ने पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने की आशंका भी बढ़ा दी है, और दुनिया भर के ऊर्जा बाजार खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य और आसपास के समुद्री रास्तों पर नजर बनाए हुए हैं।
--आईएएनएस
एवाई/वीसी
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