भारत ने पहली बार शुरू की बिना बैरियर वाला टोल सिस्टम, अब और आसान हुआ टोल भुगतान
नई दिल्ली, 1 मई (आईएएनएस) केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने शुक्रवार को भारत का पहला मल्टी-लेन फ्री फ्लो (एमएलएफएफ) बैरियर-लेस टोलिंग सिस्टम लॉन्च करने की घोषणा की। यह सिस्टम गुजरात में सूरत-भरूच सेक्शन के एनएच-48 पर चोरयासी टोल प्लाजा पर शुरू किया गया है, जिससे वाहन बिना रुके टोल दे सकेंगे।
यह आधुनिक सिस्टम ऑटोमैटिक नंबर प्लेट पहचान (एएनपीआर) और फास्टैग जैसी उन्नत तकनीकों का उपयोग करता है, जिससे वाहन चलते-चलते ही टोल कट जाएगा। यह जानकारी सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने दी।
मंत्रालय के अनुसार, इस सिस्टम से यात्रा का समय कम होगा, हाईवे पर जाम घटेगा, ईंधन की बचत होगी, वाहन प्रदूषण कम होगा और टोल संचालन में मानव हस्तक्षेप भी कम होगा।
बयान में कहा गया कि एमएलएफएफ की शुरुआत भारत के टोल सिस्टम के डिजिटलीकरण और राष्ट्रीय राजमार्गों के आधुनिकीकरण की दिशा में एक बड़ा कदम है, जो अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप है।
गडकरी ने कहा कि यह बैरियर-लेस टोलिंग सिस्टम आम लोगों के जीवन को आसान बनाएगा और व्यापार करने में भी सुविधा देगा, क्योंकि इससे माल और लॉजिस्टिक्स की आवाजाही तेज और अधिक प्रभावी होगी।
केंद्रीय मंत्री ने आगे कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में यह पहल देश में विश्वस्तरीय, तकनीक-आधारित, पारदर्शी और यात्रियों के अनुकूल हाईवे इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
केंद्र सरकार ने अप्रैल महीने में देश के सभी नेशनल हाईवे टोल प्लाजा पर केवल डिजिटल भुगतान की व्यवस्था लागू कर दी है।
मंत्रालय ने बताया कि 10 अप्रैल से टोल प्लाजा पर सभी यूजर शुल्क केवल डिजिटल माध्यम जैसे फास्टैग और यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) के जरिए ही लिए जा रहे हैं।
देश में फास्टैग का उपयोग 98 प्रतिशत से अधिक हो चुका है, जिससे टोल कलेक्शन प्रणाली में बड़ा बदलाव आया है।
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने सभी फास्टैग जारी करने वाले बैंकों को निर्देश दिया है कि वे फास्टैग से जुड़े वाहन रजिस्ट्रेशन नंबर (वीआरएन) की तुरंत जांच करें।
--आईएएनएस
डीबीपी
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भारत-पाकिस्तान के फुटबॉल मैच में अर्चना पूरन सिंह के बेटे ने दागे थे 4 गोल, पड़ोसी देश को अकेले चटाई थी धूल
Archana Puran Singh son Aryamann Sethi: टीवी और फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े सितारों के बच्चे अक्सर अपनी लाइफस्टाइल और करियर को लेकर सुर्खियों में रहते हैं. लेकिन कभी कभी उनकी जिंदगी के ऐसे पहलू सामने आते हैं, जो लोगों को चौंका देते हैं. हाल ही में ऐसा ही कुछ खुलासा हुआ है, जिसने सोशल मीडिया पर हलचल मचा दी है. बात हो रही है अर्चना पूरन सिंह ( Archana Puran Singh) के बेटे आर्यमन सेठी (Aaryamann Sethi) की जिनकी जिंदगी से जुड़े एक पुराने किस्से की है. यह कहानी सिर्फ एक स्टार किड की नहीं, बल्कि स्ट्रगल, सपनों और अधूरे रह गए एक सफर की है. आइए जानते हैं-
जब मैदान में दिखा आर्यमन का जलवा
आर्यमन सेठी ने एक व्लॉग में अपने फुटबॉल करियर के दिनों को याद किया जब उन्होंने भारत के लिए खेलते हुए पाकिस्तान के खिलाफ एक मैच में शानदार प्रदर्शन किया था. यह मुकाबला उनके लिए बेहद खास रहा, क्योंकि उन्होंने अकेले फुटबॉल में 4 गोल दागकर टीम को जीत दिलाई थी. वह पल उनके और उनके परिवार के लिए गर्व से भरा हुआ था. उनकी मां अर्चना पूरन सिंह को भी इस अचीवमेंट की जानकारी कोच के फोन के जरिए मिली थी और इस यादगार परफॉर्मेंस की तारीफ की थी. उस समय ऐसा लग रहा था कि आर्यमन का फ्यूचर फुटबॉल की दुनिया में काफी उज्ज्वल है.
बचपन में झेली बुलिंग
हालांकि इस कामयाबी के पीछे आर्यमन की लाइम में कई मुश्किलें भी रही हैं. उन्होंने बताया कि चाइल्डहुड में उन्हें अक्सर बुलिंग का सामना करना पड़ा. सेलिब्रिटी परिवार से होने की वजह से लोग उन्हें रिच किड समझते थे और बड़े बच्चे उनके साथ अच्छा व्यवहार नहीं करते थे. उनका कद छोटा था, जिससे वे और ज्यादा टार्गेट पर रहते थे.
कभी कभी अपने उम्र के बच्चों के साथ खेलते हुए वे खुद भी एग्रेसिव हो जाते थे, जिसे लेकर आज उन्हें पछतावा है. इंग्लैंड जाने के बाद भी उन्हें रेसिज्म और अलग तरह की चैलेंज का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और अपने गेम पर ध्यान देते रहे.
चोट ने तोड़ दिया करियर का ड्रिम
आर्यमन का सपना प्रोफेशनल फुटबॉलर बनने का था, जिसके लिए उन्होंने बहुत हार्डवर्क भी की. उनके पिता परमीत सेठी ने उन्हें ट्रेनिंग में पूरी तरह झोंक दिया था. सिर्फ कुछ महीनों में उन्होंने अपनी फिटनेस और स्पीड में जबरदस्त स्किल हासिल की और स्टेट लेवल पर पहचान बनाई.
उन्हें विदेश में एक क्लब के लिए ट्रायल का मौका भी मिला. लेकिन किस्मत ने उनका साथ नहीं दिया. इंग्लैंड में उनका पैर टूट गया और लंबे समय तक उन्हें रिहैब से गुजरना पड़ा. जब वह ठीक होकर वापस मैदान में उतरे, तो एक प्रैक्टिस मैच के दौरान शुरुआती सेकंड्स में ही फिर से उनका पैर टूट गया.
इस बार चोट इतनी सीरियस थी कि डॉक्टरों को सर्जरी करनी पड़ी. इसके बाद उन्हें साफ कह दिया गया कि वे पहले जैसा परफॉर्म नहीं कर पाएंगे. यहीं से उनका फुटबॉल करियर लगभग फिनिश हो गया.
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आर्यमन अब बना रहे हैं नई पहचान
फुटबॉल का ड्रिम टूटने के बाद आर्यमन सेठी ने खुद को पूरी तरह टूटने नहीं दिया. उन्होंने अपनी लाइफ को एक नई डायरेक्शन देने का फैसला किया. इसी के साथ आज वह म्यूजिक और डिजिटल कंटेंट के जरिए अपनी अलग पहचान बना रहे हैं. वह सिंगर और म्यूजिशियन के तौर पर उभर रहे हैं और अपने व्लॉग्स के जरिए फैंस से जुड़े रहते हैं. उनकी सिम्प्लिसिटी और ऑनेस्ट लोगों को पसंद है. धीरे धीरे उन्होंने सोशल मीडिया पर अपनी एक जबरदस्त फैन फॉलोइंग बना ली है, जो उनके काम को सपोर्ट करती है.
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