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जरूरत की खबर- बारिश में बढ़ती सीलन-फंगस की समस्या:हो सकते हैं ये 10 हेल्थ रिस्क, घर को सीलन से बचाने के 11 एक्सपर्ट टिप्स

बारिश के मौसम में घरों में सीलन और फंगस की समस्या बढ़ जाती है। लगातार बनी रहने वाली नमी से दीवारों पर काले धब्बे पड़ने लगते हैं, पेंट उखड़ने लगता है और फर्नीचर भी खराब होने लगता है। अगर समय रहते इस पर ध्यान न दिया जाए, तो यह समस्या धीरे-धीरे गंभीर हो सकती है। इसका असर सिर्फ घर की दीवारों और सामान तक सीमित नहीं रहता, बल्कि सेहत पर भी पड़ सकता है। सीलन और फंगस से एलर्जी, रेस्पिरेटरी इन्फेक्शन और स्किन इन्फेक्शन जैसी हेल्थ प्रॉब्लम्स का रिस्क भी होता है। हालांकि कुछ सावधानियाें से घर में सीलन और फंगस की समस्या से बचा जा सकता है। इसलिए आज ‘जरूरत की खबर’ में बात करेंगे कि घर में सीलन और फंगस की समस्या क्यों होती है। साथ ही जानेंगे कि- एक्सपर्ट- अजय यादव, फाउंडर, हैलो एसपीएस इंडिया, क्लीनिंग सर्विस, भोपाल डॉ. रोहित शर्मा, कंसलटेंट, इंटरनल मेडिसिन, अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल, जयपुर सवाल- सीलन और फंगस क्या है? जवाब- इसे पॉइंटर्स से समझिए- सीलन फंगस आसान शब्दों में कहें तो जहां नमी होगी, वहां सीलन बनने की संभावना रहती है। अगर वही नमी लंबे समय तक बनी रहे, तो वहां फंगस पनपने लगता है। सवाल- घर में किन कारणों से सीलन और फंगस आते हैं? जवाब- घर में ज्यादा नमी और खराब वेंटिलेशन सीलन और फंगस की मुख्य वजह हैं। सभी कारण ग्राफिक में देखिए- सवाल- मानसून में सीलन और फंगस की समस्या क्यों बढ़ जाती है? जवाब- इसे पॉइंटर्स से समझिए- सवाल- घर के किन हिस्सों में सीलन और फंगस का रिस्क ज्यादा होता है? जवाब- घर के जिन हिस्सों में पानी का ज्यादा इस्तेमाल होता है या नमी लंबे समय तक बनी रहती है, वहां सीलन और फंगस का रिस्क ज्यादा होता है। जैसेकि- सवाल- सीलन और फंगस घर को कैसे नुकसान पहुंचाते हैं? जवाब- ये धीरे-धीरे घर के स्ट्रक्चर और सामानों को नुकसान पहुंचाते हैं। जैसेकि- सवाल- सीलन और फंगस हमारी हेल्थ को कैसे नुकसान पहुंचाते हैं? जवाब- फंगस के छोटे-छोटे कण (स्पोर्स) हवा में फैलकर सांस के जरिए शरीर में पहुंच सकते हैं। इससे कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं। बच्चों, बुजुर्गों और एलर्जी या अस्थमा के मरीजों में इसका रिस्क ज्यादा होता है। ग्राफिक में सभी हेल्थ रिस्क देखिए- सवाल- मानसून में घर को सीलन और फंगस से कैसे बचाएं? जवाब- सही वेंटिलेशन, रेगुलर सफाई और समय पर लीकेज ठीक कराने जैसी सावधानियां सीलन-फंगस के रिस्क से बचाने में मदद करती हैं। ग्राफिक में सभी सेफ्टी टिप्स देखिए- सवाल- फंगस हटाने के घरेलू तरीके क्या हैं? जवाब- इसे पॉइंटर्स से समझिए- विनेगर स्प्रे बेकिंग सोडा ब्लीच नीम का पानी टी ट्री ऑयल हाइड्रोजन पेरॉक्साइड (3%) नमक कपूर ध्यान रखें, ज्यादा फंगस या लगातार सीलन होने पर एक्सपर्ट की मदद लेना बेहतर है। सवाल- क्या वाटरप्रूफिंग सीलन और फंगस से बचाने में मददगार है? जवाब- हां, यह दीवारों, छत और फर्श में पानी के लीकेज को रोकती है। इससे नमी जमा नहीं होती और सीलन-फंगस की समस्या कम होती है। सवाल- सीलन और फंगस से बचने के लिए पेंट चुनते समय किन बातों का ध्यान रखें? जवाब- इसके लिए कुछ बातों का खास ख्याल रखें। जैसेकि- सवाल- कब प्रोफेशनल मदद लेनी चाहिए? जवाब- कुछ स्थितियों में प्रोफेशनल मदद लेना जरूरी है- ……………………. जरूरत की ये खबर भी पढ़िए जरूरत की खबर- बारिश में कपड़ों से आती स्मेल: हो सकती है स्किन एलर्जी, एक्सपर्ट से जानें- बैड स्मेल कैसे भगाएं, कपड़े कैसे रखें फ्रेश बारिश के मौसम में कपड़े ठीक से नहीं सूखते हैं। धूप की कमी और हवा में ज्यादा नमी की वजह से कपड़ों से अजीब स्मेल आने लगती है। कई बार अलमारी में रखे कपड़ों से भी सीलन की स्मेल आती है। पूरी खबर पढ़ें…

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फिजिकल हेल्थ- हर साल 10 लाख लोगों को होता पाइल्स:10 कारणों से बढ़ता रिस्क, इन 7 संकेतों को इग्नोर न करें, तुरंत डॉक्टर को दिखाएं

‘रिसर्च गेट’ में पब्लिश एक स्टडी के मुताबिक, भारत में करीब 4.7 करोड़ लोग पाइल्स यानी बवासीर से पीड़ित हैं। वहीं हर साल लगभग 10 लाख नए मामलों की पुष्टि होती है। इससे साफ है कि बवासीर आज एक बड़ी स्वास्थ्य समस्या बन चुकी है। मेडिकल भाषा में इसे ‘हेमरॉयड्स’ कहा जाता है। इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं। इनमें लंबे समय तक बैठे रहना, कम फिजिकल एक्टिविटी, कब्ज और स्टूल पास करने के दौरान जोर लगाना जैसी चीजें शामिल हैं। साल 2024 में ‘इंटरनेशनल जर्नल ऑफ फार्मास्युटिकल साइंसेज एंड ड्रग रिसर्च’ में पब्लिश एक स्टडी ने भी सेडेंटरी लाइफस्टाइल को बवासीर का प्रमुख रिस्क फैक्टर बताया है। इसलिए आज ‘फिजिकल हेल्थ’ में पाइल्स के बारे में बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि- एक्सपर्ट- डॉ. सुकृत सिंह सेठी, डायरेक्टर, सीनियर कंसल्टेंट, गैस्ट्रोएंटेरोलॉजी, हेप्टोलॉजी एंड लिवर ट्रांसप्लांटेशन, नारायणा हॉस्पिटल, गुरुग्राम सवाल- पाइल्स (हैमरॉयड्स) क्या है? जवाब- यह एक हेल्थ कंडीशन है। इसमें एनस और रेक्टम के निचले हिस्से की नसों में सूजन आ जाती है। इसकी वजह से ये समस्याएं हो सकती हैं- सवाल- पाइल्स क्यों होती है? जवाब- इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं- सवाल- पाइल्स कितने प्रकार की होती है? जवाब- पाइल्स 4 प्रकार के होते हैं- 1. इंटरनल पाइल्स 2. एक्सटर्नल पाइल्स 3. प्रोलैप्स्ड पाइल्स 4. थ्रोम्बोस्ड पाइल्स सवाल- डेली लाइफ में कौन सी छोटी-छोटी आदतों या गलतियों के कारण पाइल्स हो सकता है? जवाब- रोजमर्रा की कुछ आदतें पाइल्स के रिस्क को बढ़ा सकती हैं। ग्राफिक में देखिए- सवाल- क्या ऑफिस में घंटों बैठना इसकी वजह बन सकता है? जवाब- हां, घंटों एक ही जगह बैठने से एनस और रेक्टम की नसों पर दबाव पड़ता है। इससे उनमें सूजन आ सकती है। अगर इसके साथ पानी कम पीते हैं तो रिस्क बढ़ जाता है। सवाल- क्या स्मोकिंग करने और शराब पीने से भी पाइल्स का जोखिम बढ़ता है? जवाब- हां, इसे पॉइंटर्स से समझिए- सवाल- क्या प्रेग्नेंसी में पाइल्स का रिस्क बढ़ता है? जवाब- हां, इसके पीछे कई कारण हैं- सवाल- क्या मेनोपॉज के समय पाइल्स का रिस्क बढ़ता है? जवाब- हां, इसे पॉइंटर्स से समझिए- सवाल- किन लोगों को पाइल्स का रिस्क ज्यादा होता है? जवाब- कुछ लोगों में पाइल्स का रिस्क दूसरों की तुलना में ज्यादा होता है। जैसेकि- सवाल- पाइल्स के शुरुआती लक्षण या संकेत क्या हैं? जवाब- पाइल्स के शुरुआती लक्षण अक्सर हल्के होते हैं। ग्राफिक में सभी शुरुआती संकेत देखिए- सवाल- पाइल्स की एडवांस्ड स्टेज के लक्षण क्या हैं? जवाब- अगर पाइल्स का समय पर इलाज न किया जाए, तो लक्षण गंभीर हो सकते हैं। ग्राफिक में सभी गंभीर लक्षण देखिए- सवाल- क्या एकदम शुरुआती स्टेज में ही डॉक्टर को दिखाना चाहिए? जवाब- हां, शुरुआत में इलाज और लाइफस्टाइल में बदलाव से अक्सर समस्या को बढ़ने से रोका जा सकता है। सवाल- क्या पाइल्स इसलिए बड़ी समस्या बन जाता है, क्योंकि लोग शर्म, संकोच के कारण डॉक्टर के पास नहीं जाते? जवाब- हां, पाइल्स एनस से जुड़ी समस्या है। इसलिए लोग अक्सर शर्म, झिझक या संकोच के कारण इसके लक्षण छिपाते हैं। सवाल- क्या एकदम शुरुआती स्टेज में ही डॉक्टर को दिखाएं तो ये प्रॉब्लम आसानी से ठीक हो सकती है? जवाब- हां, शुरुआती स्टेज में इलाज शुरू करने पर पाइल्स को आसानी से कंट्रोल किया जा सकता है। सवाल- पाइल्स का इलाज क्या है? जवाब- इलाज इसकी गंभीरता और स्टेज पर निर्भर करता है। ज्यादातर मामलों में शुरुआत में दवाओं और लाइफस्टाइल में बदलाव से राहत मिल सकती है। आराम न मिलने पर रबर बैंड लिगेशन (पाइल्स की गांठ पर एक छोटा रबर बैंड लगाया जाता है), लेजर ट्रीटमेंट या सर्जरी की जरूरत पड़ सकती है। सवाल- पाइल्स में सर्जरी की जरूरत कब पड़ती है? जवाब- इन स्थितियों में सर्जरी की जरूरत पड़ती है- ऐसे मामलों में डॉक्टर मरीज की स्थिति के अनुसार सर्जरी की सलाह देते हैं। सवाल- क्या एक बार सर्जरी के बाद पाइल्स दोबारा हो सकती है? जवाब- हां, अगर सर्जरी के बाद भी रिस्क बढ़ाने वाली आदतें बनी रहती हैं, तो पाइल्स दोबारा हो सकती है। सवाल- क्या पाइल्स अपने आप भी ठीक हो सकती है? जवाब- हां, शुरुआती और हल्के मामलों में कब्ज को कंट्रोल करने और लाइफस्टाइल में सुधार करने से पाइल्स के लक्षण कम हो सकते हैं। सवाल- अगर किसी को पाइल्स हो तो उसकी डाइट क्या होनी चाहिए? जवाब- पाइल्स में ऐसी डाइट लेनी चाहिए, जिससे कब्ज की समस्या न हो और स्टूल आसानी से पास हो सके। इसे कैटेगरी के हिसाब से समझिए- सवाल- कौन से फूड्स पाइल्स में नुकसानदायक होते हैं? जवाब- पाइल्स में ऐसे फूड आइटम्स से बचना चाहिए, जो कब्ज बढ़ाएं। जैसेकि- सवाल- पाइल्स से बचने के आसान तरीके क्या हैं? जवाब- डेली लाइफ में कुछ आसान आदतें अपनाकर पाइल्स के रिस्क से बचा जा सकता है। ग्राफिक में देखिए- पाइल्स को लेकर सबसे बड़ी परेशानी यह है कि लोग इसे सामान्य या शर्मिंदगी वाली समस्या मानकर नजरअंदाज करते हैं। समय पर पहचान से बीमारी की वजह समझने और सही इलाज शुरू करने में मदद मिलती है। …………………… ये खबर भी पढ़ें… फिजिकल हेल्थ- ब्लड टेस्ट से पता चलेगा लंग-कैंसर का रिस्क:इलाज होगा आसान, डॉक्टर से जानें इस ब्लड टेस्ट से जुड़े हर सवाल का जवाब विश्व स्वास्थ्य संगठन’ (WHO) के मुताबिक, लंग कैंसर दुनिया में सबसे ज्यादा डायग्नोज होने वाले कैंसरों में से एक है। यह कैंसर से होने वाली मौतों का प्रमुख कारण भी है। हाल ही में जर्नल ‘Cell’ में पब्लिश एक नई रिसर्च ने लंग कैंसर के इलाज में एक नई उम्मीद जगाई है। वैज्ञानिकों ने ब्लड में 14 ऐसे प्रोटीन की पहचान की है, जिनसे लंग कैंसर डायग्नोज होने से 5 साल से पहले जोखिम का पता लगाया जा सकता है। पूरी खबर पढ़ें…

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Duleep Trophy: सरफराज खान की जगह 25 साल के खिलाड़ी की सरप्राइज एंट्री, अचानक मिला बड़ा मौका

Duleep Trophy: सरफराज खान की लंबे समय बाद टीम इंडिया में वापसी हुई है. जिसके चलते दलीप ट्रॉफी 2026 के लिए वेस्ट जोन टीम में एक बड़ा बदलाव हुआ है. सरफराज की जगह 25 साल के खिलाड़ी को मौका मिला है. Tue, 11 Aug 2026 06:52:01 +0530

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