अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने तेल संकट के कारण ब्याज दरें स्थिर रखीं
वाशिंगटन, 30 अप्रैल (आईएएनएस)। मध्य-पूर्व में जारी संघर्ष के चलते फेडरल रिजर्व ने इंटरेस्ट रेट में कोई बदलाव नहीं किया है। इसकी वजह मिडिल ईस्ट संकट की वजह से ग्लोबल एनर्जी की बढ़ती कीमत बताई जा रही है। जबकि पॉलिसी बनाने वालों ने इकोनॉमिक आउटलुक को लेकर बढ़ती अनिश्चितता की ओर इशारा किया है।
फेड चेयर जेरोम पॉवेल ने बुधवार (लोकल टाइम) को कहा कि सेंट्रल बैंक रोजगार दर बढ़ाने और कीमतों को स्थिर करने के अपने दोहरे काम पर फोकस कर रहा है, भले ही महंगाई “बढ़ गई है और बहुत ज्यादा है।”
पॉवेल ने कहा, “यूएस इकॉनमी अच्छी रफ्तार से बढ़ रही है,” उन्होंने कहा कि उपभोक्ता खर्च मजबूत बना हुआ है और बिजनेस इन्वेस्टमेंट मजबूत है। साथ ही, उन्होंने माना कि जॉब मिलने की रफ्तार हो गई है और हाउसिंग सेक्टर कमजोर बना हुआ है।
फेड ने अपनी बेंचमार्क ब्याज दर 3.5 से 3.75 प्रतिशत के बीच स्थिर रखी है, जो बढ़ती अनिश्चितता के बीच सतर्क रुख का संकेत है। पॉवेल ने कहा कि मध्य-पूर्व की स्थिति ने आर्थिक परिदृश्य को लेकर “उच्च स्तर की अनिश्चितता” पैदा कर दी है और निकट भविष्य में ऊर्जा कीमतें महंगाई को और ऊपर ले जाएंगी।
महंगाई के आंकड़े भी इसका संकेत दे रहे हैं। मार्च तक 12 महीनों में कुल पीसीई (पर्सनल कंजम्प्शन एक्सपेंडिचर) महंगाई 3.5 प्रतिशत रही, जो तेल कीमतों में उछाल से प्रभावित है। वहीं, खाद्य और ऊर्जा को छोड़कर कोर महंगाई 3.2 प्रतिशत पर रही।
हालांकि अमेरिकी अर्थव्यवस्था अब भी अपेक्षाकृत मजबूत बनी हुई है, लेकिन पॉवेल ने माना कि इस तेल झटके का असर दुनिया भर में समान नहीं है। उन्होंने कहा कि अमेरिका पर इसका प्रभाव पश्चिम यूरोप और एशिया की तुलना में कम है, जहां ऊर्जा आयात पर अधिक निर्भरता है।
पॉवेल ने स्पष्ट किया कि फेड फिलहाल ब्याज दरों में बदलाव के लिए जल्दबाजी नहीं करेगा। “मौद्रिक नीति पहले से तय रास्ते पर नहीं है,” उन्होंने कहा, यह जोड़ते हुए कि आगे के फैसले आने वाले आंकड़ों और जोखिमों के आधार पर लिए जाएंगे।
उन्होंने यह भी कहा कि ऊर्जा झटके अक्सर अस्थायी होते हैं, लेकिन मौजूदा स्थिति अप्रत्याशित बनी हुई है। “यह अभी अपने चरम पर भी नहीं पहुंचा है,” उन्होंने तेल कीमतों के संदर्भ में कहा।
अमेरिकी श्रम बाजार फिलहाल स्थिर है, जहां बेरोजगारी दर 4.3 प्रतिशत है, हालांकि नौकरियों की वृद्धि की गति धीमी पड़ी है। उपभोक्ता खर्च—जो अमेरिकी अर्थव्यवस्था की रीढ़ है—अब भी मजबूत बना हुआ है, लेकिन ईंधन कीमतों में लगातार वृद्धि इसका दबाव बढ़ा सकती है।
पॉवेल ने चेतावनी दी कि पेट्रोल की कीमतें बढ़ने से लोगों की जेब पर असर पड़ेगा और वे अन्य चीजों पर खर्च कम कर सकते हैं। इसके बावजूद, अभी तक खर्च में किसी बड़े गिरावट के संकेत नहीं मिले हैं।
फेड का “इंतजार और निगरानी” वाला रुख इस बात को दर्शाता है कि ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता कितने समय तक बनी रहती है। वैश्विक स्तर पर, महामारी, रूस-यूक्रेन युद्ध और व्यापार तनाव के बाद यह नया तेल झटका केंद्रीय बैंकों के लिए महंगाई से निपटने की चुनौती को और जटिल बना रहा है।
एशिया के कई देशों के लिए—जो बड़े पैमाने पर तेल आयात करते हैं—कच्चे तेल की कीमतों में यह उछाल व्यापार घाटे को बढ़ा सकता है और घरेलू महंगाई को तेज कर सकता है, जिससे आर्थिक विकास पर दबाव पड़ने की आशंका है।
--आईएएनएस
केआर/
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तनाव से तेल आपूर्ति पर खतरा, अमेरिकी सांसदों ने महंगाई और बढ़ने की आशंका
वॉशिंगटन, 30 अप्रैल (आईएएनएस): अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध का असर अब वैश्विक अर्थव्यवस्था पर साफ दिखाई देने लगा है। अलग-अलग राज्यों में तेल की कीमतें 90 रुपए से लेकर 135 रुपए के बीच चल रही हैं। ईंधन की कीमतों में तेज बढ़ोतरी और ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव को लेकर अमेरिकी सांसदों ने चिंता जताई है।
बुधवार (स्थानीय समय) को संसद में हुई सुनवाई के दौरान सांसदों ने कहा कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज क्षेत्र में अस्थिरता वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बड़ा खतरा बन गई है। संसदीय समिति के वरिष्ठ सदस्य एडम स्मिथ ने कहा कि इसका आर्थिक असर अब स्पष्ट दिखने लगा है। उन्होंने कहा, “अमेरिका में गैस की कीमतें एक डॉलर से अधिक बढ़ चुकी हैं।”
स्मिथ ने समिति को बताया कि यह संकट केवल अमेरिका तक सीमित नहीं है। दर्जनों देश इस समय पेट्रोल की राशनिंग कर रहे हैं और इस युद्ध के कारण गंभीर आर्थिक दबाव झेल रहे हैं।”
सांसदों के अनुसार, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से तेल आपूर्ति में कमी के कारण वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित हुई है, जिससे ईंधन और उर्वरकों की कीमतें बढ़ रही हैं। इससे महंगाई और बढ़ने की आशंका है। वहीं अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने इस सैन्य अभियान का बचाव करते हुए कहा कि यह आवश्यक है। उन्होंने कहा कि हम हर परिस्थिति में जीत के लिए लड़ते हैं।
पेंटागन के अधिकारियों ने बताया कि इस युद्ध पर अब तक करीब 25 अरब डॉलर खर्च हो चुके हैं। रक्षा विभाग के नियंत्रक जूल्स डब्ल्यू. हर्स्ट III के अनुसार, इस राशि का अधिकांश हिस्सा हथियारों और सैन्य अभियानों पर खर्च हुआ है। सांसदों ने अधिकारियों से यह भी पूछा कि क्या बढ़ती ऊर्जा कीमतों के व्यापक आर्थिक प्रभावों का सही आकलन किया जा रहा है।
जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के अध्यक्ष डैन केन ने कहा कि वैश्विक जोखिम तेजी से बढ़ रहे हैं, क्योंकि अब संघर्ष सीधे तौर पर सुरक्षा और अर्थव्यवस्था दोनों को प्रभावित कर रहे हैं। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक है। यहां किसी भी प्रकार की बाधा से वैश्विक आपूर्ति तुरंत प्रभावित होती है और कीमतों में उछाल आता है।
मौजूदा संघर्ष ने इस दबाव को और बढ़ा दिया है, जिससे यह चिंता गहराने लगी है कि यह स्थिति कितने समय तक जारी रहेगी और ऊर्जा पर निर्भर देशों पर इसका कितना गहरा असर पड़ेगा।
अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय प्रभाव को लेकर लंबे समय से तनाव रहा है। खाड़ी क्षेत्र में पहले भी ऐसे संकट उत्पन्न हो चुके हैं, जिनके कारण तेल की कीमतों में तेज वृद्धि देखी गई है।
--आईएएनएस
वीसी
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