भारत में नीतियां स्पष्ट, तेजी से बढ़ रहा क्रियान्वयन : सागर अदाणी
नई दिल्ली, 29 अप्रैल (आईएएनएस)। अदाणी ग्रीन एनर्जी के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर सागर अदाणी ने बुधवार को कहा कि भारत में नीतियां स्पष्ट और निरंतर हैं और इससे तेजी से क्रियान्वयन बढ़ा रहा है।
इकोनॉमिस्ट एंटरप्राइज के रेजिलिएंट फ्यूचर्स समिट में बोलते हुए सागर अदाणी ने कहा कि हम स्वयं को केवल एक इन्फ्रास्ट्रक्चर ऑपरेटर के तौर पर नहीं, बल्कि कई दशकों के लिए भारत की ऊर्जा की रीढ़ के रूप में देखते हैं।
उन्होंने संबोधन में कहा,हमारे चेयरमैन गौतम अदाणी ने देश के एनर्जी ट्रांजिशन में 100 अरब डॉलर निवेश करने का ऐलान किया है, जो कि वैश्विक स्तर पर किसी निजी क्षेत्र की कंपनी द्वारा घोषित की गई अब तक की सबसे बड़ी प्रतिबद्धताओं में से एक है।
उन्होंने कहा,“लेकिन इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि यह अलग-थलग निवेशों का एक समूह नहीं है। यह एक एकीकृत रणनीति है। हम दुनिया के सबसे बड़े रिन्यूएबल एनर्जी पोर्टफोलियो में से एक का निर्माण कर रहे हैं। बड़े पैमाने पर ऊर्जा भंडारण में निवेश कर रहे हैं, देश भर में कुशलतापूर्वक बिजली पहुंचाने के लिए ट्रांसमिशन नेटवर्क का विस्तार कर रहे हैं और ग्रीन हाइड्रोजन इकोसिस्टम विकसित कर रहे हैं। ऊर्जा के अलावा, बंदरगाहों, लॉजिस्टिक्स, हवाई अड्डों और डेटा केंद्रों में हमारी उपस्थिति भी इसी दृष्टिकोण का हिस्सा है।”
सागर अदाणी ने आयातित ऊर्जा पर संरचनात्मक निर्भरता कम करने पर जोर दिया।
उन्होंने कहा, “हमें देश के भीतर उपलब्ध संसाधनों पर आधारित एक मजबूत ऊर्जा प्रणाली बनानी होगी, क्योंकि विद्युतीकरण न केवल अधिक कुशल है, बल्कि यह भारत के लिए दीर्घकालिक स्थिरता का सबसे विश्वसनीय मार्ग भी है।”
उन्होंने कहा कि लचीलापन अलग-थलग रहकर नहीं बनती, बल्कि यह एकीकृत प्रणालियों के माध्यम से बनता है।
उन्होंने आगे कहा, “ऊर्जा उद्योग को शक्ति देती है। रसद व्यापार को सक्षम बनाती है। डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर उत्पादकता को बढ़ावा देती है और जब ये प्रणालियां एक साथ काम करती हैं, तो आप न केवल विकास करते हैं, बल्कि स्थायी लचीलापन भी बनाते हैं।”
सागर अदाणी ने कहा, “क्योंकि अंततः, लचीलापन केवल इरादों से नहीं बनता। यह क्रियान्वयन से बनता है - बड़े पैमाने पर, तेजी से और उद्देश्यपूर्ण तरीके से इन्फ्रास्ट्रक्चर बनाने की क्षमता से बनता है।”
उन्होंने आगे कहा, “अगर भारत इसमें सफल हो जाता है और हम आवश्यक पैमाने पर प्रचुर मात्रा में, सस्ती और स्वच्छ ऊर्जा उपलब्ध करा पाते हैं तो हम न केवल अपना भविष्य सुरक्षित करेंगे, बल्कि 1.4 अरब लोगों का उत्थान भी करेंगे। हम वैश्विक अर्थव्यवस्था के भविष्य को स्थिर करने में भी मदद करेंगे।”
--आईएएनएस
एबीएस/
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
होर्मुज शिपिंग पर हमलों की भारत ने की निंदा, फ्री नेविगेशन फिर से शुरू करने की उठाई मांग
संयुक्त राष्ट्र, 29 अप्रैल (आईएएनएस)। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत ने होर्मुज स्ट्रेट में कमर्शियल शिपिंग पर हुए हमलों की निंदा की और फ्री नेविगेशन को फिर से शुरू करने की मांग की है। होर्मुज स्ट्रेट भारत की ऊर्जा और आर्थिक सुरक्षा के लिए बहुत जरूरी है।
भारत की उप स्थायी प्रतिनिधि योजना पटेल ने मंगलवार को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को बताया, “कमर्शियल शिपिंग को मिलिट्री हमलों का टारगेट नहीं बनाया जाना चाहिए, और ऐसी कोशिशें बहुत बुरी हैं।”
पटेल ने किसी देश का नाम तो नहीं लिया, लेकिन ईरान की तरफ इशारा करते हुए याद दिलाया कि भारत ने बहरीन के लाए गए काउंसिल के एक प्रस्ताव को को-स्पॉन्सर किया था, जिसमें मिडिल ईस्ट पड़ोसियों पर तेहरान के हमलों की कड़े शब्दों में निंदा की गई थी।
उन्होंने कहा, “इस मामले में यह बताना जरूरी है कि भारत ने यूएनएससी प्रस्ताव 2817 को को-स्पॉन्सर किया था, जिसे 11 मार्च को अपनाया गया था।”
बता दें, ईरान ने भारतीय जहाजों और वहां जा रहे एक जहाज पर हमला किया है। इसके साथ ही दूसरे देशों के जहाजों पर हमलों में कम से कम तीन भारतीय नाविक मारे गए हैं। दूसरी तरफ अमेरिका ने होर्मुज इलाके में नाकाबंदी कर दी।
पटेल ने मिडिल ईस्ट के हालात पर काउंसिल प्रेसिडेंट बहरीन की बुलाई मीटिंग में कहा, “हम इस बात पर जोर देते हैं कि कमर्शियल शिपिंग को टारगेट करना और बेकसूर सिविलियन क्रू मेंबर्स को खतरे में डालना या होर्मुज स्ट्रेट में नेविगेशन और कॉमर्स की आजादी में रुकावट डालना मंजूर नहीं है।”
उन्होंने कहा कि स्ट्रेट के रास्ते से बिना किसी रोक-टोक वाली शिपिंग बेहद जरूरी है। यह भारत के लिए एक अहम कनेक्टिविटी का रास्ता है। यहां से भारत की व्यापारिक और ऊर्जा आपूर्ति शृंखला भौगोलिक रूप से जुड़ी हुई हैं। इसका सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ता है।
उन्होंने कहा, “लगभग 10 मिलियन भारतीय खाड़ी क्षेत्र में रहते और काम करते हैं; उनकी सुरक्षा और भलाई हमारे लिए सबसे जरूरी है।”
खाड़ी क्षेत्र में तनाव कम करने के लिए बातचीत और कूटनीति की अपील करते हुए, उन्होंने कहा, “मिडिल ईस्ट हमारा सबसे करीबी पड़ोस है और इस क्षेत्र की सुरक्षा और स्थिरता में हमारा बहुत बड़ा हिस्सा है।”
--आईएएनएस
केके/एएस
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