मुंबई के मीरा रोड पर पहलगाम जैसा हमला: 'क्या तुम कलमा पढ़ सकते हो...' पूछकर चाकू से किए वार; Video Viral
Mumbai Mira Road Attack: मुंबई के मीरा रोड से एक ऐसी घटना सामने आई है, जिसने लोगों के रोंगटे खड़े कर दिए हैं। यहां पहलगाम जैसा हमला हुआ है। एक युवक ने गार्ड्स से पूछा कि, 'क्या तुम कलमा पढ़ सकते हो?' सवाल का जवाब जब न में दिया गया तो आरोपी ने चाकू से वार कर दिया। हमले के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई।
मीरा रोड पर दो गार्डों को बेरहमी से चाकू मारने का चौंकाने वाला वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है। वीडियो में पीड़ितों में से एक को मदद के लिए चीखते हुए देखा जा सकता है। जबकि हमलावर उसे बार-बार चाकू मार रहा है।
आरोपी गिरफ्तार
बताया जा रहा है कि, दो सुरक्षा गार्डों पर हमला करने के आरोप में 31 साल के एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया है। उसके खिलाफ मामला दर्ज होने के बाद कई जांच एजेंसियां इसमें शामिल हो गई हैं।
THE MOMENT MUMBAI'S "KALMA" KNIFER SPREAD TERROR.
— Rahul Shivshankar (@RShivshankar) April 28, 2026
Radicalized Zubair Ansari caught on camera attacking guards in Mumbai because they couldn't recite the Kalma. Shocking details in F.I.R. filed by the police brings back echoes of Pahalgam. pic.twitter.com/HKDwOmNFD1
पुलिस के अनुसार, यह घटना सोमवार सुबह करीब 4 बजे मीरा रोड ईस्ट के नयानगर में एक निर्माणाधीन जगह पर हुई। उस समय दोनों पीड़ित वहां सुरक्षा गार्ड के तौर पर ड्यूटी पर तैनात थे।
एक गार्ड गंभीर रूप से घायल
अधिकारियों ने बताया कि, आरोपी ने कथित तौर पर चाकू से दोनों लोगों पर हमला किया। इस हमले में राजकुमार मिश्रा को गंभीर चोटें आईं और फिलहाल उनका इलाज एक स्थानीय अस्पताल में चल रहा है। सुब्रतो सेन को अपेक्षाकृत हल्की चोटें आईं और बाद में उन्होंने नयानगर पुलिस स्टेशन में प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) दर्ज कराई।
आरोपी से की पूछताछ
आरोपी की पहचान जैब जुबैर अंसारी के रूप में हुई है। सीसीटीवी खंगालकर एक घंटे के भीतर ही उसे गिरफ्तार कर लिया गया। ठाणे आतंकवाद निरोधक दस्ते (ATS) भी मामले की जांच कर रहा है। ATS ने स्थानीय पुलिस के साथ मिलकर आरोपी से पूछताछ की।
मुंबई ATS जांच में जुटी
मीरा भायंदर-वसई विरार (MBVV) पुलिस अधिकारियों ने घटना के बाद लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की। शुरू में, MBVV अधिकारियों ने कहा कि केस की जांच स्थानीय पुलिस और ठाणे ATS मिलकर कर रहे हैं। हालांकि रिपोर्ट्स के अनुसर अब यह जांच मुंबई ATS को सौंप दी गई है।
धुरंधर-4: 1300 किमी का इलेक्ट्रिक हाईवे टेस्ट, तेल पर निर्भरता घटाने का सबसे बड़ा प्लान!
एक तरफ देश भीषण गर्मी से जूझ रहा है और ऊर्जा की मांग तेजी से बढ़ रही है… दूसरी तरफ सरकार लंबी प्लानिंग में जुटी है, तेल पर निर्भरता कम करने की। वैश्विक तेल सप्लाई से जुड़े जोखिम, खासकर हार्मुज जैसे अहम रूट्स पर तनाव, भारत के लिए हमेशा चिंता का विषय रहे हैं। ऐसे में अब धुरंधर-4 को उसी बड़ी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के रूप में विदेशों से मंगाता है। अगर दुनिया में कहीं भी तेल सप्लाई पर असर पड़ता है, तो इसका सीधा असर भारत की अर्थव्यवस्था और आम लोगों की जेब पर पड़ता है।इसी जोखिम को कम करने के लिए सरकार अब ट्रांसपोर्ट सिस्टम को बदलने की दिशा में काम कर रही है। धुरंधर-4 उसी सोच का हिस्सा है।
बहुत खास है ये ट्रायल
दिल्ली से मुंबई तक 1300 किलोमीटर लंबा ये इलेक्ट्रिक ट्रायल सिर्फ एक टेस्ट नहीं, बल्कि ये देखने की कोशिश है कि क्या भारत लंबी दूरी के सफर में भी पेट्रोल-डीजल से आगे बढ़ सकता है। अगर ये ट्रायल सफल होता है, तो आने वाले समय में हाईवे पर इलेक्ट्रिक गाड़ियों का इस्तेमाल तेजी से बढ़ेगा। इससे पेट्रोल-डीजल की खपत कम होगी और देश का तेल आयात भी घटेगा।
इस पूरे प्रोजेक्ट में चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर पर खास जोर है। पूरे रूट पर थोड़ी-थोड़ी दूरी पर चार्जिंग स्टेशन बनाए जा रहे हैं। फास्ट चार्जिंग, लगातार बिजली सप्लाई और ड्राइवर के लिए बेहतर रेस्ट पॉइंट ताकि सफर आसान और भरोसेमंद हो सके।
थर्ड जेनरेशन चार्जिंग सिस्टम
नेशनल हाईवे फॉर इलेक्ट्रिक व्हीकल्स के प्रोजेक्ट डायरेक्टर अभिजीत सिंहा के मुताबिक,ये थर्ड जेनरेशन चार्जिंग सिस्टम है। पहले जेनरेशन में पेट्रोल-डीजल था, लेकिन अब इन स्टेशनों पर सोलर, विंड और हाइड्रोजन जैसे रिन्यूएबल सोर्स का इस्तेमाल होगा।नीति आयोग का अनुमान है कि अगर 2030 तक देश 20% इलेक्ट्रिक मोबिलिटी का लक्ष्य हासिल कर लेता है, तो करीब 6 करोड़ गाड़ियां पेट्रोल-डीजल की जगह नई ऊर्जा पर चलेंगी। इन गाड़ियों के लिए फास्ट चार्जिंग और लॉजिस्टिक्स की पूरी व्यवस्था भी की जाएगी चाहे वो बस हो, ट्रक हो या कार।
अब तक देश में कई छोटे ट्रायल हो चुके हैं
दिल्ली-आगरा, दिल्ली-जयपुर और चेन्नई-त्रिची रूट पर। ये सभी ट्रायल सफल रहे हैं और कई जगह इलेक्ट्रिक गाड़ियों का इस्तेमाल भी शुरू हो चुका है।लेकिन धुरंधर-4 सबसे बड़ा और असली टेस्ट है, क्योंकि इसकी दूरी 1300 किलोमीटर से ज्यादा है। अगर ये सफल रहा, तो एक ही रूट पर ट्रक, बस और कार तीनों तरह की इलेक्ट्रिक गाड़ियां चल सकती हैं।
सबसे अहम बात ये है कि देश में सबसे ज्यादा तेल की खपत ट्रक और बस में होती है, और प्रदूषण का बड़ा हिस्सा भी इन्हीं से आता है। अगर इन्हें इलेक्ट्रिक में बदला गया, तो बिना लोगों पर दबाव डाले ही बड़ा बदलाव लाया जा सकता है।
भारत की ऊर्जा सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और पर्यावरण तीनों स्तर पर अहम
यही नहीं अगर किसी वजह से कुछ दिनों के लिए तेल की सप्लाई रुक जाए, तो भी ऐसे इलेक्ट्रिक हाईवे देश की बुनियादी जरूरतों को पूरा करने में मदद कर सकते हैं। यानि धुरंधर-4 सिर्फ एक ट्रायल नहीं, बल्कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और पर्यावरण तीनों को बदलने की दिशा में बड़ा कदम है। अगर ये सफल हुआ, तो आने वाले समय में सड़कों पर दौड़ती तस्वीर ही बदल सकती है।
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