सीमा पर भोटेकोशी नदी किनारे चीन के दीवार निर्माण का नेपाल ने जताया विरोध
काठमांडू, 28 अप्रैल (आईएएनएस)। चीन ने नेपाल-चीन सीमा पर भोटेकोशी नदी के किनारे अपनी तरफ एक सुरक्षा दीवार बनानी शुरू की है, जिससे नेपाल में काफी विरोध हो रहा है।
नेपाल को चिंता है कि इस निर्माण से नदी का रास्ता बदल सकता है। इसका असर नेपाल की तरफ पड़ सकता है। नेपाली अधिकारियों का कहना है कि चीन का यह कदम 1963 में दोनों देशों के बीच हुए सीमा समझौते का उल्लंघन है। इस समझौते के मुताबिक, सीमा पर कोई भी निर्माण करने से पहले एक-दूसरे को जानकारी देना जरूरी है।
समझौते में यह भी साफ लिखा है कि कोई भी देश अकेले अपने स्तर पर सीमा से जुड़ी नदी का रास्ता नहीं बदल सकता।
नेपाल के गृह मंत्रालय के अधिकारियों ने आईएएनएस को जानकारी देते हुए इस बात की पुष्टि की है कि चीन अपनी सीमा के अंदर ही नदी के किनारे यह दीवार बना रहा है।
भोटेकोशी नदी सिंधुपालचौक जिले के तातोपानी बॉर्डर पॉइंट से होकर गुजरती है और कुछ हिस्सों में यह दोनों देशों के बीच प्राकृतिक सीमा का काम करती है।
सिंधुपालचौक के मुख्य जिला अधिकारी राम कृष्ण अधिकारी ने भी कहा कि दीवार चीन की तरफ ही बनाई गई है। यह निर्माण दोनों देशों के आपसी समझौते के दायरे में आता है या नहीं, इसका फैसला संबंधित नेपाली अधिकारी करेंगे।
गृह मंत्रालय के एक अधिकारी के अनुसार, सिंधुपालचौक के जिला प्रशासन ने हाल ही में इस निर्माण की जानकारी सरकार को दी थी, जिसके बाद मामला विदेश मंत्रालय को भेजा गया, ताकि कूटनीतिक स्तर पर कार्रवाई की जा सके।
इसके बाद विदेश मंत्रालय ने चीन से तुरंत निर्माण रोकने की मांग की, जैसा कि काठमांडू पोस्ट ने मंगलवार को बताया।
विदेश मंत्रालय के अधिकारी तुरंत टिप्पणी के लिए उपलब्ध नहीं थे, लेकिन गृह मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि चीन को बिना जानकारी दिए निर्माण करने पर विरोध जताते हुए आधिकारिक पत्र भेजा गया है। हमने निर्माण से जुड़ी पूरी जानकारी विदेश मंत्रालय को दी थी।
भोटेकोशी नदी वाला इलाका आपदा के लिहाज से काफी संवेदनशील है। अधिकारियों का कहना है कि नदी के किनारे कोई भी निर्माण या उसके रास्ते में बदलाव मानसून के समय नेपाल की तरफ बड़ा नुकसान कर सकता है। बारिश के मौसम में यहां अक्सर भूस्खलन होता है, जिससे चीन के साथ व्यापार भी प्रभावित होता है।
रिपोर्ट के मुताबिक, यह निर्माण नेपाल-चीन सीमा के पिलर नंबर 53 के पास हो रहा है। 1963 के समझौते के तहत दोनों देशों को यह सुनिश्चित करना होता है कि वे जानबूझकर नदी का रास्ता न बदलें और ऐसे बदलावों को रोकने के लिए कदम उठाएं। साथ ही, अगर नदी के रास्ते में बदलाव से दूसरे देश को नुकसान होता है, तो उसके लिए मुआवजे का भी प्रावधान है।
--आईएएनएस
एवाई/एबीएम
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
आरकॉम केस में ईडी ने जब्त की अनिल अंबानी ग्रुप की 3,034 करोड़ की अतिरिक्त संपत्ति
नई दिल्ली, 28 अप्रैल (आईएएनएस)। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने रिलायंस कम्युनिकेशंस (आरकॉम) बैंक फ्रॉड मामले में 3,034.90 करोड़ रुपए की अतिरिक्त संपत्तियां जब्त (अटैच) की हैं। इससे रिलायंस अनिल अंबानी समूह (आरएएजी) से जुड़े मामलों में कुल जब्ती 19,344 करोड़ रुपए से ज्यादा हो गई है। यह जानकारी मंगलवार को जारी जांच एजेंसी के एक बयान में दी गई है।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर बनी विशेष जांच टीम (एसआईटी) इस मामले की जांच कर रही है। इसमें बैंक और सार्वजनिक धन के गलत इस्तेमाल और मनी लॉन्ड्रिंग की जांच की जा रही है।
बयान में ईडी ने बताया कि मनी लॉन्ड्रिंग रोकने वाले कानून धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) की धारा 5 के तहत यह कार्रवाई की गई है, ताकि संपत्तियों को बेचे या छिपाए जाने से रोका जा सके और बैंकों व जनता के हित सुरक्षित रहें।
यह जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की कई एफआईआर के आधार पर शुरू हुई थी, जो स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, पंजाब नेशनल बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा और भारतीय जीवन बीमा निगम की शिकायतों पर दर्ज की गई थीं। इन शिकायतों में अनिल अंबानी और उनकी कंपनी आरकॉम समेत अन्य लोगों को आरोपी बनाया गया है।
आरकॉम और उसकी ग्रुप कंपनियों ने देश-विदेश के बैंकों से लोन लिया था, जिसमें कुल 40,185 करोड़ रुपए बकाया हैं।
जांच में पता चला है कि प्रमोटर ग्रुप की कुछ संपत्तियां जैसे मुंबई के उषा किरण बिल्डिंग में फ्लैट, पुणे के खंडाला में फार्महाउस और अहमदाबाद के साणंद में जमीन शामिल हैं।
इसके अलावा, रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड के 7.71 करोड़ शेयर भी जब्त किए गए हैं, जो राइजी इंफिनिटी प्राइवेट लिमिटेड के पास थे। यह कंपनी अनिल अंबानी के परिवार से जुड़ी एक ट्रस्ट का हिस्सा है।
राइजी ट्रस्ट को परिवार की संपत्ति सुरक्षित रखने और उसे व्यक्तिगत कर्ज की जिम्मेदारियों से बचाने के लिए बनाया गया था।
बयान में कहा गया है कि ये संपत्तियां अनिल अंबानी परिवार के उपयोग के लिए थीं, जबकि जिन बैंकों का पैसा फंसा हुआ है, उन्हें इसका फायदा नहीं मिल रहा था।
पीएमएलए की धारा 8 के तहत, जब्त संपत्तियों को कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद सही दावेदारों को वापस दिया जा सकता है, जिसमें नुकसान उठाने वाले बैंक भी शामिल हैं।
इसका मतलब है कि इन संपत्तियों को सुरक्षित रखकर बाद में बैंकों और जनता का पैसा वापस दिलाया जा सकता है।
ईडी ने कहा कि वह देश की वित्तीय व्यवस्था को सुरक्षित रखने और जनता के पैसे की रक्षा करने के लिए ऐसी कार्रवाई करता रहेगा।
बयान में आगे कहा गया है कि इस मामले में आगे की जांच अभी जारी है।
--आईएएनएस
डीबीपी
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