गुजरात स्थानीय निकाय चुनाव में BJP का दबदबा, सभी 15 नगर निगमों में जीत, वोटों की गिनती जारी
गुजरात स्थानीय निकाय चुनाव (Gujarat Local Body Election) लिए वोटों की गिनती 28 अप्रैल को जारी है। जिसमें बीजेपी वर्चस्व साबित करने में सफल रही। सभी 15 नगर निगमों में भारतीय जनता पार्टी ने शानदार जीत हासिल की है। 410 सीटों को पर बीजेपी और 20 सीटों पर कांग्रेस की जीत हुई है। 4 सीटों पर अन्य पार्टियों की जीत हुई। विपक्षी दल कांग्रेस एवं आम आदमी पार्टी को करारी हार का सामना करना पड़ रहा है।
आम आदमी पार्टी पिछले कुछ दिनों से स्थानीय निकाय चुनाव के जरिए गुजरात में अपनी पकड़ मजबूत बनाने कि कोशिश कर रही थी। लेकिन नगर निगमनो में एक भी सीट जीतने में विफल रही। भाजपा सभी नगर निगमों में 50% से अधिक सीटों को जीतने में सफल रही। वहीं बीजेपी को अहमदाबाद में 95 सीटों पर विजय मिली है, जबकि कांग्रेस 9 सीटों को जीत पाई। सूरत में भाजपा को 71 और कांग्रेस को एक सीट पर जीत मिली है। वडोदरा में भाजपा को 32 और कांग्रेस को पांच सीटों पर जीत मिली है।
राजकोट में बीजेपी ने 40 और कांग्रेस ने 4 सीटों को जीता है। भावनगर में बीजेपी को 22 और कांग्रेस को तीन सीटों पर जीत मिली है। जामनगर में बीजेपी को 28 सीटों पर विजय मिली है। सुरेंद्रनगर वधमान में बीजेपी को 48 और नवसारी में 55 सीटों पर विजय प्राप्त हुई है। मोरबी में भाजपा को 52 और नडियाद में 51 सीटों पर बीच जीत मिली है।।
સુરતનો કેસરિયો મિજાજ…
સુરત મહાનગરપાલિકામાં ભાજપના ઐતિહાસિક વિજય બદલ જનતા જનાર્દનનો હૃદયપૂર્વક આભાર. આ જીત એ સુરતની વિકાસયાત્રામાં અતૂટ વિશ્વાસની જીત છે.
તમામ વિજેતા ઉમેદવારો અને રાત-દિવસ મહેનત કરનાર કર્મઠ કાર્યકર્તાઓને હાર્દિક અભિનંદન.#ખીલ્યું_કમળ_જીત્યો_વિકાસ pic.twitter.com/qGi9ySmlsc
— BJP Gujarat (@BJP4Gujarat) April 28, 2026
स्थानीय निकाय चुनाव में बीजेपी का दबदबा जारी
हालिया आंकड़ों के मुताबिक नगर पालिका में 2624 सीटों में से बीजेपी को 1981, कांग्रेस को 458 और अन्य पार्टियों को 177 सीटों पर जीत मिली है। वहीं जिला पंचायत में 1090 सीटों में से बीजेपी को 852, कांग्रेस को 193 और अन्य पार्टियों को 54 सीटों पर जीत मिली है। तालुका पंचायत में 5234 सीटों में से बीजेपी को 3401, कांग्रेस को 959 और अन्य पार्टियों को 461 सीटों पर जीत मिली है।
26 अप्रैल को हुए थे मतदान
26 अप्रैल को 15 नगर निगमों में 1,044 सीटों, 84 नगरपालिक, 34 जिला पंचायत और 260 तालुका पंचायतों में मतदान हुए थे। नगर पालिका चुनाव में कुल 58.12% मतदान हुए। तालुका पंचायत चुनाव में सबसे अधिक वोटिंग देखी गई थी, वोटर टर्नआउट 61.15% दर्ज किया गया था। तालुका पंचायत चुनाव में वोटर टर्नआउट 60.4% दर्ज किया गया है। नगर निगम में वोटर टर्नआउट 48.15% था।
टाइम 100 में एआई के 10 दिग्गज:टेक्नोलॉजी को इंसानी दिमाग सी ताकत दी; तय कर रहे आप क्या सोचेंगे और आपका ऑफिस कैसे चलेगा
टाइम मैगजीन ने 2026 की ‘100 सबसे प्रभावशाली कंपनियों’ की सूची जारी की है, जिसमें एआई के उन 10 दिग्गजों को चुना गया है जो भविष्य की इबारत लिख रहे हैं। अरबों डॉलर के निवेश और करोड़ों यूजर्स के साथ ये कंपनियां तकनीक को प्रयोगशालाओं से निकालकर हमारे बेडरूम और ऑफिस तक ले आई हैं। जानिए इन्हें… बाइडांस - कंटेंट क्रिएशन लागत 90% घटाई सीडांस 2.0 मॉडल, अब वीडियो बनाने के लिए शूटिंग की जरूरत नहीं है। यह टेक्स्ट, इमेज व ऑडियो को एक साथ प्रोसेस कर 4के क्वालिटी का प्रोफेशनल वीडियो बना देता है। कंटेंट क्रिएशन की लागत को 90% तक कम कर दिया है। अमेजन - एआई की रेस का पावरहाउस बना ट्रेनियम 2 चिप्स का इतना बड़ा जाल बिछा दिया है कि अब दुनिया के सबसे बड़े एआई स्टार्टअप्स (जैसे एंथ्रोपिक) को जिंदा रहने के लिए इसके इंफ्रा पर निर्भर रहना ही होगा। झिपू - अमेरिका के चिप बैन की हवा निकाली गेमचेंजर जीएलएम-5 मॉडल। जहां दुनिया एनवीडिया की चिप्स के लिए तरस रही है, झिपू ने हुवावे के प्रोसेसर पर दुनिया का सबसे ताकतवर ओपन-सोर्स मॉडल बनाकर दिखा दिया। इसने अमेरिका के ‘चिप प्रतिबंध’ के गुब्बारे की हवा निकाल दी है। इसके 40 लाख एंटरप्राइज यूजर्स हैं। ओपनएआई - हर ऑफिस में अहम बनने पर जोर पूरा फोकस अब एंटरप्राइज कोडिंग और वर्कप्लेस टूल्स पर है। यानी वे अब सिर्फ ‘कूल’ नहीं, बल्कि हर ऑफिस की ‘जरूरत’ बनना चाहते हैं। चैटजीपीटी के 90 करोड़ वीकली यूजर्स हैं। हर माह 2 अरब डॉलर की कमाई। अल्फाबेट - सर्च इंजन का ‘एआई अवतार’ जेमिनी लाइव की हर डिवाइस में मौजूदगी। अब आप गूगल से ‘सर्च’ नहीं करते, बल्कि ‘बात’ करते हैं। जीमेल, मैप्स और यूट्यूब अब सिर्फ एप्स नहीं हैं, वे आपके निजी सेक्रेटरी बन चुके हैं जो आपके बिना कहे आपके काम निपटा रहे हैं। मेटा - कोडिंग क्रांति- 75% कोड एआई लिखेगा कंपनी का 75% कोड एआई लिखेगा। प्रोग्रामर्स कोड नहीं लिख रहे, वे सिर्फ एआई द्वारा लिखे गए कोड को गाइड कर रहे हैं। यह सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग का भविष्य बदल रहा है। मेटा ‘पर्सनल गोल्स’ समझने वाले और भी एडवांस एआई मॉडल्स बना रही है। एंथ्रोपिक - डिजिटल नैतिकता पर अडिग अमेरिकी रक्षा विभाग पेंटागन ने अपने जासूसी नेटवर्क और हथियारों के लिए क्लाउड एआई के इस्तेमाल की छूट मांगी, तो कंपनी अपनी ही सरकार के खिलाफ कोर्ट पहुंच गई। इस ‘दृढ़ता’ ने कंपनी को और भी लोकप्रिय बना दिया है। अलीबाबा - ओपन सोर्स का बेताज बादशाह अलीबाबा ने अपना सबसे ताकतवर मॉडल दुनिया के लिए मुफ्त कर दिया है। आज एयरबीएनबी और पिनट्रेस्ट दिग्गज अमेरिकी कंपनियां भी अमेजन या गूगल के बजाय चीन के इस मुफ्त और शक्तिशाली मॉडल का इस्तेमाल कर रही हैं। मिस्ट्रल - डेटा अपने ही देश में रखने का मॉडल यूरोप की उन सरकारों को ढाल दे रही है जो अपना डेटा अमेरिका नहीं भेजना चाहतीं। इन्होंने ‘स्थानीय एआई’ का ऐसा मॉडल दिया है जहां डेटा आपके देश की सीमा से बाहर नहीं जाता। इसका राजस्व एक साल में 20 गुना बढ़कर 400 मिलियन डॉलर हो गया है। हगिंग फेस - रोबोटिक्स को घर-घर पहुंचा रही ऐसा ओपन-सोर्स रोबोट पेश किया है जिसे कोई भी घर बैठे प्रोग्राम कर सकता है। यह एआई को कंप्यूटर स्क्रीन से निकालकर असल दुनिया के कामों में लगा रहा है। कंपनी का दावा है कि इस साल के अंत तक इंसानों से ज्यादा ‘एआई एजेंट्स’ उनका प्लेटफॉर्म इस्तेमाल करेंगे।
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