मारुति सुजुकी का मुनाफा वित्त वर्ष 26 की चौथी तिमाही में 6.4 प्रतिशत गिरा, 140 रुपए प्रति शेयर के डिविडेंड का किया ऐलान
मुंबई, 28 अप्रैल (आईएएनएस)। देश की दिग्गज ऑटोमोबाइल कंपनी मारुती सुजुकी इंडिया लिमिटेड ने मंगलवार को कहा कि वित्त वर्ष 26 की चौथी तिमाही में कंपनी ने 3,659 करोड़ रुपए का शुद्ध मुनाफा दर्ज किया है। यह पिछले वर्ष समान अवधि में दर्ज किए गए 3,911 करोड़ रुपए के शुद्ध मुनाफे से 6.4 प्रतिशत कम है।
इससे पहली तिमाही में कंपनी ने 3,879 करोड़ रुपए का शुद्ध मुनाफा दर्ज किया था।
कंपनी की ओर से एक्सचेंज फाइलिंग में दी गई जानकारी के मुताबिक, वित्त वर्ष 26 की चौथी तिमाही में कंपनी की आय सालाना आधार पर 28 प्रतिशत बढ़कर 52,462.5 करोड़ रुपए हो गई है, जो कि पिछले साल समान अवधि में 40,920 करोड़ रुपए थी। इसमें तिमाही आधार पर 5 प्रतिशत का उछाल देखा गया है। दिसंबर तिमाही में यह 49,904 करोड़ रुपए थी।
पूरे वित्त वर्ष 26 में कंपनी का कंसोलिडेटेड कर के बाद मुनाफा 14,619 करोड़ रुपए रहा है, इसमें सालना आधार पर 0.8 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। वित्त वर्ष 25 में यह 14,500.2 करोड़ रुपए पर था।
इस दौरान कंपनी की आय सालाना आधार पर 20 प्रतिशत बढ़कर 1,83,316 करोड़ रुपए हो गई है, जो कि पिछले वित्त वर्ष में 1,52,913 करोड़ रुपए पर थी।
31 मार्च, 2026 तक कंपनी की कुल संपत्ति बढ़कर 1,48,881 करोड़ रुपए हो गई, जबकि एक वर्ष पहले यह 1,31,016 करोड़ रुपए थी। वहीं, गैर-चालू संपत्ति 1,09,923.6 करोड़ रुपए रही।
आय के अलावा, कंपनी ने वित्त वर्ष 2026 के लिए 140 रुपए प्रति शेयर का फाइनल डिविडेंड घोषित किया, जबकि पिछले वर्ष यह 135 रुपए प्रति शेयर था।
कंपनी ने वित्त वर्ष 2026 में 23.4 लाख यूनिट का वार्षिक उत्पादन दर्ज किया था।
हालांकि, मुनाफे में गिरावट के कारण कंपनी के शेयर में कमजोरी दर्ज की गई। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) पर मारुति सुजुकी का शेयर 2.51 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 12,890 रुपए पर बंद हुआ।
--आईएएनएस
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पधारो म्हारे देस: MP में 100 साल बाद जंगली भैंसों की वापसी, सीएम डॉ. मोहन यादव ने किया 4 भैंसों का सॉफ्ट रिलीज
मध्यप्रदेश के वन्यजीव संरक्षण में एक नया अध्याय जुड़ गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने आज बालाघाट जिले के कान्हा टाइगर रिजर्व में अंतर्गत जंगली भैंसा पुनर्स्थापना योजना का शुभारंभ किया। इस दौरान असम के काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान से लाए गए चार युवा जंगली भैंसों को सॉफ्ट रिलीज किया गया।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि यह कदम प्रदेश की धरती से लगभग एक सदी पहले विलुप्त हो चुकी इस प्रजाति को वापस लाने की दिशा में महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा। उन्होंने कहा कि “मध्यप्रदेश आज टाइगर, चीता और गिद्ध स्टेट के रूप में वन्यजीव समृद्धि का अग्रणी केंद्र बन चुका है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में में प्रदेश में चीतों की ऐतिहासिक वापसी हुई। विलुप्त वन्य प्राणियों के पुनर्स्थापन के साथ मध्यप्रदेश देश में वन्यजीव संरक्षण की नई मिसाल प्रस्तुत कर रहा है।”
मुख्यमंत्री ने किया जंगली भैंसा पुनर्स्थापन योजना का शुभारंभ
मध्यप्रदेश में जैव विविधता संरक्षण की दिशा में एक और कदम उठाते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जंगली भैंसा पुनर्स्थापन योजना का शुभारंभ किया। बालाघाट जिले के सूपखार क्षेत्र में आयोजित कार्यक्रम में असम के काजीरंगा से लाए गए जंगली भैंसों को कान्हा टाइगर रिजर्व में सॉफ्ट रिलीज किया गया। करीब 100 वर्षों पहले प्रदेश से विलुप्त हो चुकी इस प्रजाति की वापसी को सरकार ने वन्य-जीव संरक्षण के नए अध्याय के रूप में देखा है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस अवसर पर कहा कि “आज का दिन मध्यप्रदेश के लिए ऐतिहासिक है। पीएम मोदी के मार्गदर्शन में हम विलुप्त प्रजातियों को वापस ला रहे हैं। जंगली भैंसों के पुनर्वास से घास के मैदानों का संरक्षण होगा, पारिस्थितिकी तंत्र मजबूत बनेगा और स्थानीय स्तर पर पर्यटन बढ़ने से लोगों को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे।”
उन्होंने बताया कि असम के मुख्यमंत्री डॉ. हेमंत बिस्वा सरमा के साथ हुई चर्चा के दौरान दोनों राज्यों के बीच वन्यजीवों के आदान-प्रदान पर सहमति बनी थी। इस अंतर्राज्यीय सहयोग से मध्यप्रदेश और असम के बीच एक नया रिश्ता स्थापित हुआ है।
इस तरह हुई स्थानांतरण की प्रक्रिया
इस योजना के पहले चरण में 19 मार्च से 10 अप्रैल 2026 के बीच काजीरंगा के विभिन्न क्षेत्रों से सात किशोर भैंसों का चयन किया गया। इनमें से चार भैंसों को 25 अप्रैल को लगभग 2000 किलोमीटर की दूरी तय कर कान्हा टाइगर रिजर्व लाया गया। पूरी प्रक्रिया विशेषज्ञों और पशु चिकित्सकों की निगरानी में सावधानीपूर्वक संपन्न हुई। सूपखार क्षेत्र में इन्हें नियंत्रित वातावरण में सॉफ्ट रिलीज किया गया है ताकि वे धीरे-धीरे नए परिवेश के अनुकूल हो सकें।
वन्यजीव संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम
मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश पहले से ही टाइगर और चीता स्टेट के रूप में अपनी पहचान बना चुका है। राज्य में मगरमच्छ, घड़ियाल, भेड़िया और गिद्धों की भी अच्छी संख्या है। कूनो अभयारण्य में चीतों के सफल पुनर्वास के बाद अब गांधी सागर और नौरादेही में भी इसी तरह के प्रयास किए जा रहे हैं। जंगली भैंसों की वापसी इसी श्रृंखला का अगला चरण है।
पर्यावरण और अर्थव्यवस्था को मिलेगा लाभ
वन विभाग के अनुसार, जंगली भैंस घासभूमि पारिस्थितिकी तंत्र के संतुलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इनके पुनर्स्थापन से न केवल जैव विविधता बढ़ेगी बल्कि अन्य वन्य प्रजातियों को भी लाभ मिलेगा। साथ ही, कान्हा में पर्यटन आकर्षण बढ़ने से स्थानीय लोगों के लिए आय और रोजगार के नए अवसर भी विकसित होंगे।
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