भारत की ओर से एक साथ दो मोर्चों पर खेले गए बड़े कूटनीतिक दाव का फल अब भारत को देखने को मिल रहा है। जहां एक तरफ बांग्लादेश में प्रधानमंत्री तारिक रहमान के साथ भारतीय हाई कमिश्नर की मुलाकात हुई है। तो वहीं दूसरी ओर नेपाल में प्रधानमंत्री पद संभालने के बाद बालन शाह ने सबसे पहले जिस विदेशी दूत के साथ आमने-सामने की मुलाकात की वो भारतीय राजदूत नवीन श्रीवास्तव हैं। यह दोनों मुलाकातें ऐसे समय में हुई है जब भारत के दोनों पड़ोसी देशों के साथ रिश्तों को लेकर बीते कुछ समय से लगातार तनाव भी देखने को मिला है। यह दोनों मुलाकातें बेहद अहम मानी जा रही हैं। भारत और बांग्लादेश के रिश्तों में शेख हसीना को लेकर तनाव अभी देखने को मिल रहा है। इन सबके बीच ढाका से एक ऐसी तस्वीर सामने आई जो काफी कुछ बयां करती है। भारतीय हाई कमिश्नर दिनेश त्रिवेदी ने बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान के साथ मुलाकात की। इस मुलाकात का वीडियो भी सामने आया है जिसमें दोनों नेता मुस्कुराते हुए एक दूसरे से मिलते हुए दिखाई दे रहे हैं। माहौल काफी गर्मजशी भरा है।
दिनेश त्रिवेदी ने तारिक रहमान को एक भेंट भी दिया और इसके बाद दोनों पक्षों के बीच बैठक हुई। खास बात यह है कि ये मुलाकात ऐसे समय में हुई है जब शेख हसीना को लेकर भारत और बांग्लादेश के रिश्तों में तल्खी देखने को मिल रही है। इससे ठीक 1 दिन पहले भारतीय हाई कमिश्नर ने बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलील उर रहमान से भी वन टू वन की मुलाकात की थी। वहीं प्रधानमंत्री तारिक रहमान के साथ हुई इस बैठक में बांग्लादेश के विदेश मंत्री भी मौजूद थे। यानी लगातार दो दिनों तक भारत और बांग्लादेश के बीच में उच्च स्तरीय बातचीत देखने को मिली। भारत और बांग्लादेश के बीच हालिया विवाद का मुख्य केंद्र पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना है। 5 अगस्त को नई दिल्ली में शेख हसीना ने एक वर्चुअल संबोधन दिया था। जिसके बाद बांग्लादेश की सरकार ने उस पर आपत्ति जताई थी। शेख हसीना ने अपने इस संबोधन में दिसंबर में बांग्लादेश लौटने के ऐलान को दोहराया था और कहा था कि वह वापस से बांग्लादेश के अंदर लोकतंत्र बहाल करने के लिए वापस जा रही हैं। हालांकि उनके इस बयान के बाद बांग्लादेश ने भारत के सामने कड़ी आपत्ति जताई और अपना विरोध दर्ज कराया था।
बांग्लादेश के विदेश मंत्री ने कहा था कि ऐसे बयानों से जनता की भावनाएं प्रभावित होती हैं और भारत बांग्लादेश के सहयोग को आगे बढ़ाने में मुश्किल आ सकती है। लेकिन इसी तनाव के बीच भारतीय हाई कमिश्नर ने बातचीत को लेकर बेहद सकारात्मक संदेश दिया। उन्होंने कहा कि दोनों नेता एक दूसरे से बात करेंगे तो बहुत सारी समस्याओं का समाधान हो जाएगा और इन सबके बीच उन्होंने खुद बांग्लादेशी प्रधानमंत्री तारिक रहमान के साथ मुलाकात की है। अब हम बात करते हैं दूसरी बड़ी खबर की जो कि नेपाल से सामने आई है। जी हां, नेपाल के प्रधानमंत्री बालन शाह ने जो अपनी पहली विदेशी दूत के साथ मुलाकात को अंजाम दिया, तो भारतीय राजदूत के साथी है। आपको बता दें कि नेपाली प्रधानमंत्री बालन शाह और भारतीय राजदूत नवीन श्रीवास्तव के बीच यह एक लंबी बातचीत थी। लगभग 1 घंटे तक दोनों के बीच बातचीत हुई और इस दौरान भारत नेपाल संबंध आपसी हित विकास साझेदारी और दोनों देशों के बीच चल रहे सहयोग को लेकर काफी सारी चर्चाएं हुई।
भारतीय राजदूत नवीन श्रीवास्तव ने प्रधानमंत्री बालन शाह को शुभकामनाएं भी दी और भारत की ओर से दोनों देशों के रिश्तों को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता को दोहराया है। व नेपाल के प्रधानमंत्री बालन शाह की ओर से भारत और नेपाल के ऐतिहासिक संबंधों को और गहरा करने की जरूरत पर जोर दिया गया। यह मुलाकात इसलिए भी अहम हो जाती है क्योंकि प्रधानमंत्री बनने के बाद बालन शाह ने अपनी विदेश नीति को थोड़ा अलग रखा था और कहा था कि वह किसी राजदूत के साथ आमने-सामने की बातचीत नहीं अपनाएंगे। लेकिन अब उन्होंने अपनी इस नीति में बदलाव करते हुए सीधे भारतीय राजदूत के साथ अपनी पहली मुलाकात को अंजाम दिया है।
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यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार की सेना ने कहा कि मोखा पर हुए हमले में सात लोग मारे गए, जिनमें चार सैनिक और तीन आम नागरिक शामिल थे, और कम से कम 30 अन्य घायल हो गए। अल जज़ीरा के अनुसार, रविवार को मोखा पर हुए हमलों के एक पिछले दौर में कम से कम 11 लोग मारे गए थे। ग्रंडबर्ग ने कहा कि ये ताज़ा हमले 2022 में संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता से हुए युद्धविराम के बाद से सैन्य गतिविधियों में सबसे बड़ी तेज़ी के बीच हुए हैं, जिससे यमन में पूर्ण पैमाने पर संघर्ष के फिर से शुरू होने का ख़तरा काफ़ी बढ़ गया है।
उन्होंने कहा कि अंसार अल्लाह के हालिया हमलों ने मोखा, मारिब और उसके बाहर भी आम नागरिकों को गंभीर ख़तरे में डाल दिया है। इस तनाव को रोकना होगा, और आम नागरिकों तथा नागरिक बुनियादी ढांचे की सुरक्षा करनी होगी। उन्होंने सभी पक्षों से "अधिकतम संयम बरतने" और तनाव कम करने तथा युद्धविराम के तहत हासिल की गई उपलब्धियों को और कम होने से रोकने के लिए ठोस उपायों पर उनके कार्यालय के साथ मिलकर काम करने का आह्वान किया। ग्रंडबर्ग ने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि संघर्ष को केवल एक समावेशी राजनीतिक प्रक्रिया के माध्यम से ही स्थायी रूप से समाप्त किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि यह संघर्ष केवल एक समावेशी राजनीतिक प्रक्रिया के माध्यम से ही स्थायी रूप से समाप्त हो सकता है, और तनाव का बढ़ना यमन को विपरीत दिशा में ले जा रहा है।
सोमवार को जारी एक बयान में, यमनी सरकार की सेना के आधिकारिक प्रवक्ता कर्नल माजिद अब्दुल्ला अल-नुज़ैली ने कहा कि हमले में अल-मोखा और उसके आसपास कई जगहों को निशाना बनाया गया, जिनमें नागरिक बुनियादी ढांचा, कर्मचारियों के लिए आवासीय सुविधाएं, कार्यालय, बिजली उत्पादन केंद्र और सैन्य ठिकाने शामिल थे। उन्होंने बताया कि हमले में सशस्त्र बलों के चार सदस्य और तीन आम नागरिक मारे गए, जबकि 30 लोग घायल हुए, जिनमें से ज़्यादातर आम नागरिक थे।
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