तनाव और थकान को कहना है अलविदा तो आज से ही आजमाएं शवासन
नई दिल्ली, 27 अप्रैल (आईएएनएस)। आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए योगासन एक बेहद प्रभावी उपाय है। नियमित योगाभ्यास न केवल तनाव और थकान को कम करता है, बल्कि शरीर को एनर्जेटिक भी बनाता है। इनमें सबसे सरल और प्रभावी योगासन है शवासन, जो पूरे शरीर को नई ऊर्जा प्रदान करता है।
शवासन एक विश्राम आसन है। यह एक संस्कृत शब्द है। शव का अर्थ मृत शरीर और आसन का अर्थ है मुद्रा। इस आसन में व्यक्ति शांत और स्थिर अवस्था में लेटकर शरीर और मन को पूर्ण विश्राम देता है। यह योग का सबसे सरल और प्रभावी आसन है, जो तनाव, चिंता और थकाम को करने में अहम भूमिका निभाता है।
भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने इस आसन को शरीर और मन को पूर्ण विश्राम देने वाला बताया। उनके अनुसार, यह आसन मानसिक शांति प्रदान करता है और चिंता को कम करता है। साथ ही ब्लड प्रेशर को नियत्रित करने में सहायक है।
इस आसन को योग सत्र के अंत में तनाव, थकान कम करने और एकाग्रता बढ़ाने के लिए किया जाता है। यह एक मृत देह के समान अवस्था है जो तंत्रिका तंत्र को शांत करता है और गर्मियों के दौरान शरीर को ठंडा रखने के लिए किया जा सकता है।
सबसे पहले योगा मैट बिछाएं और पीठ के बल लेट जाएं। दोनों हाथों को शरीर से थोड़ा दूर, हथेलियां ऊपर की ओर रखें। पैरों को थोड़ा फैलाएं। आंखें बंद करें और गहरी, सामान्य सांस लें। प्रत्येक सांस के साथ शरीर को और अधिक रिलैक्स महसूस करें। इस दौरान ध्यान केंद्रित करें। मन को शांत रखें और बाहरी विचारों से ध्यान हटाएं। एक्सपर्ट बताते हैं कि 5-10 मिनट तक इस अवस्था में रहने के बाद फिर धीरे-धीरे सामान्य स्थिति में आना चाहिए।
शवासन का नियमित अभ्यास न केवल शारीरिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाता है, बल्कि मानसिक शांति और संतुलन भी प्रदान करता है। इसके नियमित अभ्यास से मांसपेशियों में तनाव कम होता है और शरीर में ऊर्जा का संचार होता है।
--आईएएनएस
एनएस/वीसी
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लद्दाख में बनेंगे 5 नए जिले, LG अधिसूचना जारी कर किया ऐलान
केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के लिए एक ऐतिहासिक फैसला सामने आया है. प्रशासन को और मजबूत बनाने के उद्देश्य से यहां पांच नए जिलों के गठन की अधिसूचना जारी कर दी गई है. इस अहम निर्णय की जानकारी एलजी विनय कुमार सक्सेना ने स्वयं साझा की और इसे क्षेत्र के विकास की दिशा में बड़ा कदम बताया.
कौन-कौन से बने नए जिले?
नए जिलों के गठन के साथ अब लद्दाख में जिलों की संख्या 2 से बढ़कर 7 हो जाएगी. जिन पांच नए जिलों की घोषणा की गई है, वे हैं..
1. नुब्रा
2. शाम
3. चांगथांग
4. जांस्कर
5. द्रास
ये सभी क्षेत्र भौगोलिक रूप से चुनौतीपूर्ण और दूरस्थ माने जाते हैं, जहां प्रशासनिक पहुंच सीमित रही है. नए जिलों के बनने से इन इलाकों में शासन की पकड़ मजबूत होगी.
क्यों लिया गया यह बड़ा फैसला?
यह निर्णय लंबे समय से उठ रही स्थानीय मांगों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है. एलजी ने इसे ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि इससे लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करने में मदद मिलेगी. यह कदम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “विकसित और समृद्ध लद्दाख” के विजन के अनुरूप है.
इस फैसले को पहले ही गृह मंत्रालय ने अगस्त 2024 में मंजूरी दे दी थी, जिसका नेतृत्व गृह मंत्री अमित शाह ने किया था. अब इसकी अधिसूचना जारी होने के बाद इसे लागू करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है.
प्रशासनिक व्यवस्था में क्या होगा बदलाव?
नए जिलों के गठन से प्रशासन का विकेंद्रीकरण होगा, यानी शासन सीधे लोगों के करीब पहुंचेगा. खासकर दूर-दराज और दुर्गम क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सरकारी सेवाएं तेजी से मिल सकेंगी.
- स्थानीय स्तर पर फैसले जल्दी होंगे
- सरकारी योजनाओं का बेहतर क्रियान्वयन होगा
- लोगों को लंबी दूरी तय करने की जरूरत कम होगी
- इससे प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही भी बढ़ेगी.
विकास, रोजगार और अवसर
नए जिलों के बनने का असर सिर्फ प्रशासन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इससे विकास के नए रास्ते भी खुलेंगे.
- बुनियादी ढांचे में सुधार होगा
- पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा
- स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ेंगे
- उद्यमिता और छोटे व्यवसायों को नई गति मिलेगी
लद्दाख जैसे पर्यटन और रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण क्षेत्र में यह बदलाव आर्थिक गतिविधियों को तेज कर सकता है.
भविष्य की दिशा
यह फैसला लद्दाख को एक नई पहचान देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है. इससे न केवल प्रशासनिक ढांचा मजबूत होगा, बल्कि क्षेत्र के समग्र विकास को भी गति मिलेगी. कुल मिलाकर, पांच नए जिलों का गठन लद्दाख के लोगों के लिए बेहतर सुविधाएं, तेज विकास और उज्जवल भविष्य की उम्मीद लेकर आया है.
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