पाकिस्तानी सैन्य बलों की ज्यादतियों का शिकार हो रहीं बलूच महिलाएं, ग्लोबल दखल की उठी मांग
क्वेटा, 27 अप्रैल (आईएएनएस)। पाकिस्तानी सैन्य बलों की ज्यादतियों के खिलाफ बलूच महिला फोरम (बीडब्ल्यूएफ) ने आवाज बुलंद की है। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन को पत्र लिखकर सेना की करतूत पर लगाम लगाने का आग्रह किया है। बीडब्ल्यूएफ की केंद्रीय आयोजक शाली बलूच ने इसे जबरन गायब करने के सिस्टैमटिक पैटर्न का हिस्सा बताया, जिसके निशाने पर कथित तौर पर बलूच महिलाएं रहती हैं।
यह खत संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (यूएनएचआरसी), संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त (ओएचसीएचआर), यूएन वर्किंग ग्रुप ऑन एनफोर्स्ड डिसअपीयरेंस (जबरन या अनैच्छिक रूप से लापता होने पर बना कार्य समूह), यूएन कमिटी ऑन द एलिमिनेशन ऑफ डिस्क्रिमिनेशन अगेंस्ट वीमेन (सीईडीएडब्ल्यू) यानी महिलाओं के खिलाफ भेदभाव उन्मूलन समिति, एमनेस्टी इंटरनेशनल, ह्यूमन राइट्स वॉच और फ्रंट लाइन डिफेंडर्स को भेजा गया था।
चिट्ठी में, शाली ने बलूचिस्तान में बढ़ती ह्यूमन राइट्स इमरजेंसी को सुलझाने की त्वरित जरूरत पर जोर दिया।
उन्होंने कहा, मैं आपका ध्यान बलूचिस्तान में बलूच महिलाओं को निशाना बनाकर जबरन गायब करने के सिस्टमैटिक पैटर्न की ओर दिलाती हूं, जो एक ऐसा डेमोग्राफिक है जो पाकिस्तानी सरकार के अत्याचारों से पैदा हुए संघर्ष की छाया में लंबे समय से पीड़ित है।
बीडब्ल्यूएफ ने पाकिस्तानी सेना द्वारा हाल ही में तीन युवा बलूच महिलाओं, खदीजा बलूच, हसीना नूर बख्श और गुल बनुक ताज को जबरन गायब करने का जिक्र करते हुए तुरंत दखल देने की मांग की। उन्होंने दावा किया कि उनका एकमात्र गुनाह शांतिप्रिय बलूच छात्रा या फिर घरेलू महिला के रूप में उनकी पहचान थी।
शाली ने कहा कि उनके परिवारों को न तो उनके ठिकाने के बारे में कोई जानकारी मिली है और न ही उन पर कोई चार्ज लगाया गया है।
उन्होंने विस्तार से बताया, ये कथित तौर पर अलग-थलग मामले नहीं हैं। ये बलूच महिलाओं को चुप कराने वाली सरकार की स्ट्रैटेजी का हिस्सा हैं, जो उनकी पारिवारिक, सामाजिक और सामुदायिक भूमिका से खौफजदा है और उन्हें देश के लिए खतरा मानती है। अगवा की गई ये बलूच महिलाएं कानूनी तौर पर क्रिमिनल नहीं हैं, लेकिन हां, ये एक मां- छात्रा और घरबार संभालने वाली औरत जरूर हैं।
बलूच एक्टिविस्ट ने खदीजा, हसीना और गुल बानुक को जबरदस्ती गायब करने के खिलाफ बलूचिस्तान और कराची में एक फैक्ट-फाइंडिंग मिशन के जरिए तुरंत और स्वतंत्र जांच की मांग की।
उन्होंने पाकिस्तानी सरकार से इन लापता महिलाओं को ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट के सामने पेश करने या जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए किसी इंटरनेशनल पर्यवेक्षक के दखल की अपील की।
शाली ने कन्वेंशन ऑन द एलिमिनेशन ऑफ ऑल फॉर्म्स ऑफ डिस्क्रिमिनेशन अगेंस्ट वीमेन (सीईडीएडब्ल्यू) ऑप्शनल प्रोटोकॉल के तहत बलूच महिलाओं के जबरदस्ती गायब होने पर एक विशेष प्रतिवेदक की नियुक्ति की भी अपील की।
उन्होंने आगे वैश्विक मानवाधिकार संगठनों से कहा कि वे प्रोविजनल ऑर्डर जारी करें, जिसमें पाकिस्तान को बलूच महिलाओं को निशाना बनाने वाले सभी खुफिया अभियान तब तक रोकने का निर्देश दिया जाए, जब तक कि एक पारदर्शी समीक्षा न हो जाए।
शाली ने जोर देकर कहा कि बीडब्ल्यूएफ ने इस मसले को बार-बार उठाया, लेकिन राष्ट्रीय संस्थानों ने हमें चुप रहने, धमकाने या मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने के अलावा कुछ और नहीं किया।
पत्र के आखिर में लिखा गया, अब हम इंसाफ के लिए आखिरी मुकाम पर खड़े होकर, अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों का रुख कर रहे हैं। समय हमारे साथ नहीं है। हर गुजरता हुआ वक्त इन महिलाओं के जिंदा मिलने की संभावना को कम करता जा रहा है। उनके बच्चे इंतजार कर रहे हैं। उनकी मांएं रो रही हैं। दुनिया को अब इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
--आईएएनएस
केआर/
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
भारत और न्यूजीलैंड ने साइन किया ऐतिहासिक फ्री ट्रेड एग्रीमेंट
नई दिल्ली, 27 अप्रैल (आईएएनएस)। भारत और न्यूजीलैंड ने सोमवार को ऐतिहासिक फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर किए, इसके तहत न्यूजीलैंड को होने वाले 100 प्रतिशत भारतीय निर्यात पर टैरिफ छूट मिलेगी। वहीं, न्यूजीलैंड से भारत आने वाले 95 प्रतिशत सामान पर टैरिफ में छूट दी गई है या फिर टैरिफ कम कर दिया गया है।
वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और उनके न्यूजीलैंड समकक्ष टॉड मैक्ले की उपस्थिति में समझौते पर हस्ताक्षर किए गए।
16 मार्च, 2025 को शुरू हुए इस मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) ने रिकॉर्ड नौ महीनों में संपन्न होकर दोनों देशों के आर्थिक संबंधों में एक नया अध्याय स्थापित किया है। इस समझौते के तहत भारत को सभी टैरिफ उत्पादों पर तत्काल 100 प्रतिशत शुल्क-मुक्त पहुंच प्राप्त होगी।
यह न्यूजीलैंड द्वारा वर्तमान में भारत से निर्यात किए जाने वाले लगभग 450 टैरिफ उत्पादों पर लगाए जाने वाले 10 प्रतिशत शुल्क से कम है, जिनमें वस्त्र और परिधान उत्पाद, चमड़ा और टोपी, चीनी मिट्टी के बर्तन, कालीन और वाहन एवं वाहन पुर्जे शामिल हैं।
इस मुक्त व्यापार समझौते में एक प्रावधान यह भी है कि न्यूजीलैंड अगले 15 वर्षों में भारत में 20 अरब डॉलर का निवेश करेगा। यह यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (ईयू) द्वारा भारत के साथ किए गए मुक्त व्यापार समझौते में किए गए 100 अरब डॉलर के निवेश की प्रतिबद्धता के समान है।
इसके अलावा, इस एफटीए में कामकाजी पेशेवरों और छात्रों की आवाजाही से संबंधित कई प्रावधान शामिल हैं। न्यूजीलैंड ने किसी भी देश के साथ पहली बार छात्र आवाजाही और अध्ययन के बाद कार्य वीजा संबंधी अनुबंध पर हस्ताक्षर किए हैं। इसके तहत, भारतीय छात्र न्यूजीलैंड में पढ़ाई के दौरान विस्तारित अध्ययन के बाद कार्य वीजा के साथ प्रति सप्ताह 20 घंटे तक काम कर सकते हैं।
एफटीए में भारतीय पेशेवरों लोगों को भी उच्च वेतन वाले रोजगार के अवसर खुलेंगे। समझौते के तहत कौशल युक्त भारतीय पेशेवरों को अस्थायी रोजगार वीजा देगा, जिसके तहत पेशेवर न्यूजीलैंड में तीन साल तक रहकर कार्य कर सकेंगे। हालांकि, यह कोटा 5,000 वीजा का निर्धारित किया गया है।
समझौते में शामिल वर्किंग हॉलिडे वीजा कार्यक्रम के तहत, प्रतिवर्ष 1,000 युवा भारतीय 12 महीने की अवधि के लिए न्यूजीलैंड में कई बार प्रवेश कर सकते हैं।
भारत ने दूध, क्रीम, मट्ठा, दही और पनीर जैसे सभी डेयरी उत्पादों के साथ-साथ कृषि उत्पादों सहित कई वस्तुओं को मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) से बाहर रखने में भी कामयाबी हासिल की है।
--आईएएनएस
एबीएस/
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