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Etawah News: इटावा पुलिस लाइन में फिर महिला की मौत, महिला सिपाही प्रियंका ने जहर खाया; पति गिरफ्तार

इटावा पुलिस लाइन में महिला आरक्षी प्रियंका ने आत्महत्या कर ली. पति रजत पर दहेज उत्पीड़न, मारपीट व पैसों की मांग का गंभीर आरोप है, जिसके बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया है.

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'गुरुजी' की तस्वीर, हेमंत के खिलाफ तीर,सड़कों पर छात्र, विरोध की अनोखी 'भीड़'

झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं की धांधली के खिलाफ उबला गुस्सा एक अनूठा विरोधाभास बयां कर रहा है। एक तरफ सड़कों पर उतरा युवाओं का सैलाब हेमंत सोरेन सरकार की ईंट से ईंट बजा रहा है, तो दूसरी तरफ उन्हीं के हाथों में मुख्यमंत्री के दिवंगत पिता 'दिशोम गुरु' शिबू सोरेन के पोस्टर लहरा रहे हैं। भगत सिंह और डॉ. बीआर आंबेडकर के साथ शिबू सोरेन की तस्वीर थामे ये युवा साफ संदेश दे रहे हैं कि लड़ाई झारखंड मुक्ति मोर्चा की विचारधारा से नहीं, बल्कि सत्ता के अहंकार में अपने ही पुरखों के आदर्शों को भूल बैठे मौजूदा नेतृत्व से है। राजनीति में ऐसे विरोध प्रदर्शनों के कई उदाहरण मिलते हैं, जहां सत्ताधारी दल की मूल विचारधारा पर तो सवाल नहीं उठाया जाता, लेकिन उसके मौजूदा नेतृत्व पर पार्टी के उन आदर्शों से भटकने का आरोप लगाया जाता है जिनका वह दावा करती है। जेएमएम के सह-संस्थापक और प्रमुख नेता रहे शिबू सोरेन 1980 के दशक से अलग आदिवासी राज्य झारखंड के आंदोलन के सबसे प्रमुख चेहरा थे। उनकी यह मांग साल 2000 में पूरी हुई, जब अटल बिहारी वाजपेयी सरकार ने बिहार से अलग करके झारखंड राज्य का गठन किया। हालांकि शिबू सोरेन पर अपने दौर में भ्रष्टाचार के कई आरोप लगे, लेकिन इसके बावजूद राज्य में खासकर आदिवासियों के बीच उनकी स्थिति हमेशा एक जननायक और सर्वमान्य नेता की बनी रही। राज्य के गठन और खासकर आदिवासी मुद्दों से खुद को अलग न करते हुए, प्रदर्शनकारियों ने सोरेन सीनियर की विरासत को उनके बेटे हेमंत की राजनीति से अलग रखा है। इस तरह, वे बेटे की सरकार की आलोचना करते हुए भी पिता का सम्मान करते हैं।

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ट्राइ एंड टेस्टेड फॉर्मूला

यह तरीका नया नहीं है। महाराष्ट्र में भी एकनाथ शिंदे की शिवसेना बालासाहेब ठाकरे का सम्मान करती है, जबकि शिवसेना (यूबीटी) के उनके बेटे उद्धव पर हमला करती है और उन पर पिता की विरासत को कमजोर करने का आरोप लगाती है। बीजेपी भी बाला ठाकरे का सम्मान करती है, जो वाजपेयी और एलके आडवाणी के समय में सहयोगी थे। जबकि उद्धव की कड़ी आलोचना करती है। नेताओं की पारिवारिक विरासत पर ध्यान दिया गया है। उन पर लगभग यह आरोप लगाया जाता है कि वे अपने पिताओं की विरासत को कमज़ोर कर रहे हैं। हालाँकि, यह पैटर्न अक्सर राजनीतिक दलों और उनकी सोच के संदर्भ में भी लागू होता है, भले ही इसमें कोई सीधी पारिवारिक विरासत शामिल न हो। बीजेपी सरदार पटेल और नरसिम्हा राव जैसी शख्सियतों  का सम्मान करती है, जबकि जवाहरलाल नेहरू और नेहरू-गांधी परिवार में उनके वंशजों को अलग-थलग करके निशाना बनाती है। जिसका सीधा सा मकसद ये बताना है कि एक परिवार ने उस पुरानी और बड़ी पार्टी पर कब्ज़ा कर लिया, जिसके पास कई दिग्गज नेता थे, और उसे "बर्बाद" कर दिया। यह आलोचना कांग्रेस के पूरे इतिहास पर नहीं है।

कांग्रेसी का वाजपेयी के नाम भावुक लेटर

बीजेपी के आलोचक भी कभी-कभी वाजपेयी के दौर की तारीफ़ करते हैं ताकि नरेंद्र मोदी सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाए जा सके। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सबसे मुखर आलोचकों में से एक, कांग्रेस के मणी शंकर अय्यर ने 2016 में 'द इंडियन एक्सप्रेस' के लिए बीमार वाजपेयी को एक भावुक खुला पत्र लिखा था, जिसका शीर्षक था प्लीज़ कम बैक, अटल जी। हालाँकि अय्यर हमेशा से आरएसएस और बीजेपी के आलोचक रहे हैं, फिर भी उन्होंने यह दिखाने की कोशिश की कि मोदी ने किसी तरह वाजपेयी की विरासत को कमज़ोर किया है, जो BJP से उनसे पहले प्रधानमंत्री थे। सरकार या नेता की इस तरह की आलोचना 1975-77 की इमरजेंसी के दौरान और उसके ठीक बाद साफ़ तौर पर देखी गई थी। इतिहासकार रामचंद्र गुहा बताते हैं कि इमरजेंसी के दौरान पश्चिमी देशों की प्रेस में इंदिरा गांधी की ऐसी आलोचना हुई थी। गुहा अपनी किताब 'इंडिया आफ्टर गांधी' में लिखते हैं, इमरजेंसी के दौरान नई दिल्ली आए 'द न्यूयॉर्क टाइम्स' के ए.एम. रोसेन्थल  ने यह नतीजा निकाला कि अगर इंदिरा गांधी के शासनकाल में जवाहरलाल नेहरू ज़िंदा होते, तो वे सहयोगी के बजाय राजनीतिक विरोधी होते। रोसेन्थल के एक भारतीय दोस्त ने उस काल्पनिक स्थिति को कुछ इस तरह बयां किया था: 'इंदिरा प्रधानमंत्री आवास में हैं और जवाहरलाल नेहरू जेल से उन्हें फिर से चिट्ठियां लिख रहे हैं। 

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इमरजेंसी की आलोचना में भी  नेहरू समेत कांग्रेस के नेताओं का जिक्र

इमरजेंसी खत्म होने के ठीक बाद, किशोर कुमार ने 'नसबंदी' फ़िल्म के लिए एक गाना गाया 'बापू तेरे देश में कैसा अत्याचार'। यह फ़िल्म इमरजेंसी के दौरान जबरन की गई नसबंदी पर आधारित थी। इस गाने में महात्मा गांधी और नेहरू समेत कांग्रेस के आज़ादी की लड़ाई लड़ने वाले नेताओं का ज़िक्र करते हुए इमरजेंसी की आलोचना की गई थी। इसमें उसी तरीके का इस्तेमाल किया गया था जिसमें किसी नेता की आलोचना इसलिए की जाती है क्योंकि वह अपने ही परिवार और पार्टी की विरासत को कमज़ोर कर रहा होता है। इमरजेंसी के दौरान, सरकार की योजनाओं की तारीफ़ में गाना गाने से इनकार करने पर कुमार पर ऑल इंडिया रेडियो और दूरदर्शन में कुछ समय के लिए रोक लगा दी गई थी।

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  Sports

Mohammed Shami का खुलासा: Yuvraj Singh के सामने कांपने लगी थी आवाज, Dressing Room का वो अनसुना किस्सा

भारतीय क्रिकेट टीम में जगह बनाना हर खिलाड़ी का सपना होता है, लेकिन जब कोई युवा खिलाड़ी पहली बार उस ड्रेसिंग रूम में पहुंचता है, जहां उसके बचपन के पसंदीदा सितारे मौजूद हों, तो वह पल बेहद खास बन जाता है। तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी ने अपने करियर के शुरुआती दिनों का ऐसा ही किस्सा साझा किया है। उन्होंने बताया कि भारतीय टीम के ड्रेसिंग रूम में पहली बार पहुंचने पर वह इतने घबरा गए थे कि टीम के सामने अपना परिचय देने के अलावा कुछ बोल ही नहीं पाए थे।

मोहम्मद शमी ने बताया कि भारतीय टीम में पहली बार शामिल होने से पहले उन्हें अंदाजा नहीं था कि अंदर का माहौल कैसा होगा। मैच से एक दिन पहले टीम की बैठक हो रही थी। जैसे ही वह कमरे के अंदर पहुंचे और आसपास बैठे खिलाड़ियों को देखा, उन्हें ऐसा लगा जैसे उनके बचपन के लगभग सभी पसंदीदा खिलाड़ी उनके सामने बैठे हों। इस वजह से वह चुपचाप जाकर बैठ गए और किसी से ज्यादा बातचीत नहीं कर पाए।

इसी दौरान पूर्व भारतीय क्रिकेटर युवराज सिंह ने शमी से कुर्सी पर खड़े होने के लिए कहा और टीम के सामने कुछ बोलने को कहा। शमी ने बताया कि उस समय उनके दिमाग में कुछ भी नहीं आ रहा था। बड़े खिलाड़ियों को सामने देखकर वह इतना नर्वस हो गए थे कि उन्हें अपना भाषण तक याद नहीं रहा। आखिर में उन्होंने सिर्फ अपना नाम और अपने शहर के बारे में बताया और वहीं रुक गए।

गौरतलब है कि यह घटना शमी के अंतरराष्ट्रीय करियर की शुरुआत के दौर की है। उन्होंने छह जनवरी 2013 को दिल्ली में पाकिस्तान के खिलाफ एकदिवसीय मुकाबले से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कदम रखा था। उसी साल नवंबर में कोलकाता के ईडन गार्डन्स में वेस्टइंडीज के खिलाफ उन्हें टेस्ट पदार्पण का मौका मिला। इसके बाद 21 मार्च 2014 को मीरपुर में पाकिस्तान के खिलाफ उन्होंने टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में भी पदार्पण किया।

उस शुरुआती झिझक के बाद शमी ने भारतीय तेज गेंदबाजी में अपनी अलग पहचान बनाई। उन्होंने भारत के लिए 64 टेस्ट मुकाबले खेले हैं और 229 विकेट लिए हैं। टेस्ट क्रिकेट में उनके नाम छह बार एक पारी में पांच या उससे ज्यादा विकेट लेने का रिकॉर्ड है। एकदिवसीय क्रिकेट में शमी ने 108 मुकाबलों में 206 विकेट हासिल किए हैं, जबकि इस प्रारूप में भी उन्होंने छह बार पांच विकेट लिए हैं। टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में उन्होंने 25 मैच खेलकर 27 विकेट अपने नाम किए हैं।

शमी ने भारतीय टीम के ड्रेसिंग रूम से जुड़ा एक और मजेदार किस्सा भी बताया। उनसे जब टीम के सबसे मजाकिया खिलाड़ी का नाम पूछा गया तो उन्होंने पूर्व सलामी बल्लेबाज शिखर धवन को चुना। शमी के मुताबिक, धवन मुश्किल परिस्थितियों में भी टीम का माहौल हल्का रखने की कोशिश करते थे।

उन्होंने बताया कि अगर भारत कोई मुकाबला हार जाता था और सभी खिलाड़ी चुपचाप बैठते थे, तब धवन अचानक जोर से हंसने लगते थे। पूछने पर वह मजाक में कहते थे कि मैच हार गए हैं, इसलिए हंसी आ रही है। शमी के मुताबिक, धवन कभी-कभी पंजाबी गाने बजने पर मेज पर खड़े होकर नाचने भी लगते थे। ऐसी हरकतों से हार के बाद ड्रेसिंग रूम का माहौल ज्यादा भारी नहीं होता था।

बता दें कि शिखर धवन ने भारत के लिए 34 टेस्ट, 167 एकदिवसीय और 68 टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले खेले हैं। उन्होंने 2024 में अंतरराष्ट्रीय और घरेलू क्रिकेट से संन्यास की घोषणा की थी। शमी के मुताबिक, पूरे साल क्रिकेट खेलने के दौरान जीत और हार दोनों आती रहती हैं, इसलिए खिलाड़ियों के लिए मुश्किल समय में भी माहौल को सामान्य रखना जरूरी होता है।

मौजूद जानकारी के अनुसार, शमी ने भारत के लिए अपना आखिरी अंतरराष्ट्रीय मुकाबला नौ मार्च 2025 को दुबई में न्यूजीलैंड के खिलाफ चैंपियंस ट्रॉफी के फाइनल में खेला था। भारत ने यह मुकाबला चार विकेट से जीतकर खिताब अपने नाम किया था। शमी के करियर की शुरुआत में जिस खिलाड़ी के सामने वह कुछ बोल नहीं पाए थे, उसी टीम के सबसे भरोसेमंद तेज गेंदबाजों में उनका नाम आज शामिल है।
Mon, 10 Aug 2026 21:43:21 +0530

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