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Ank Jyotish Prediction: मूलांक 3, 5, 8, और 9 वालों की चमकेगी किस्मत, Career में मिलेगी बंपर सफलता

आज 27 अप्रैल, सोमवार का दिन है और यह दिन मूलांक 9 की तेजस्वी ऊर्जा का है, जो हमें जीवन के पुराने चैप्टर को समाप्त करने और एक नई, ऊंचे उद्देश्य वाली शुरुआत की प्रेरणा देता है। अंक ज्योतिष में यह 9 नंबर का संबंध पूर्णता, क्षमा और मन की गहराई से है। माना जाता है कि यह दिन पुरानी बातों को छोड़कर आगे बढ़ने और खुद को भावनात्मक रुप से मजबूत बनाने का है। 27 अप्रैल का भाग्यांक 5 (2+7+0+4+2+0+2+6 = 23, 2+3 = 5) है, जो जीवन में अचानक बदलाव और नए अवसर को लेकर आथा है। वहीं, मूलांक 9 हमें सिखाता है कि पुरानी कड़वाहट को छोड़ देते हैं, तभी हमारे जीवन में नई खुशियों के लिए जगह बनती है।
 
मूलांक 9 पुरानी चीजों से मुक्ति दिलाता है, वहीं भाग्यांक 5 नई दिशाओं में बढ़ने और लोगों से जुड़ने में मदद करेगा। आज का दिन काफी हलचल भरा हो सकता है। यह बदलाव तरक्की के लिए बेहद ही जरुरी है। आइए आपको इस लेख में बताते है 1 से 9 मूलांक का दिन कैसा रहने वाला है।

मूलांक 1 

जो लोग 1, 10, 19 या 28 इन तारीखों पर जन्में हैं, उनका मलूांक 1 है। आज के दिन अचानक से आपकी लाइफ बदलाव आएगा और नई ऊर्जा के साथ आगे बढ़ने का है। आज आप किसी पुराने प्रोजेक्ट को पूरा कर सकते हैं। कम करने के तरीकों में बदलाव आएगा। वर्क के चलते नए लोगों से मुलाकात हो सकती है और अपनी बातों को खुलकर रखें। भाग्यांक 5 की मदद से आज आपको आगे बढ़ने के नए रास्ते मिलेंगे। आपको अपने साथ बात करते समय धैर्य रखें और किसी भी तरह की जिद से बचें। परिवार का साथ मिलेगा।

क्या न करें- गुस्से में किसी से भी गलत शब्द न बोलें।

आज की सीख- क्षमा करना असली ताकत है।

मूलांक 2

जिन लोगों का जन्म 2, 11, 20 या 29 तारीख हुआ है, उनका मूलांक 2 होता है। आज का दिन आपके लिए भावनाओं से भरा रहेगा। मन को शांत रखने की कोशिश करें। वर्क प्रेशर को बोझ होगा और अनचाहे बदलाव भी देखने को मिलेंगे। भाग्यांक 5 की ऊर्जा आपको नए समाचार दे सकती हैं, जो आपके करियर के लिए काफी महत्वपूर्ण होंगे। अपनो के साथ बातचीत करते समय ईमानदार रहें और मन में कोई बात न छिपाएं। आज आप महसूस करेंगे कि जब आप सच का सामना करते हैं, तो मन का डर अपने आप खत्म हो जाता है।

क्या न करें- पुरानी बातों सोचकर खुद को दुखी न करें।

आज की सीख - सच बोलने से मन हल्का और रिश्ते मजबूत होते हैं।

मूंलाक 3

जिन लोगों का जन्म 3, 12, 21 या 30 तारीख को हुआ है, उनका मूलांक 3 है। आज के दिन आप अपने कार्य में रचनात्मकता दिखाएंगे और लोगों से जुड़ने के लिए काफी बढ़िया है। आज आप अपनी बातों से दूसरों को प्रभावित कर सकते हैं और इसके साथ ही आपका समाज में सम्मान बढ़ेगा। भाग्यांक 5 के चलते आप काफी एक्टिव रहेंगे और नए कामों की शुरुआत हो सकती है। परिवार में हंसी-खुशी का माहौल रहेगा। आज दिन नया सीखने या जानकारी इक्ट्ठा करने का है। 

क्या न करें- बिना सोचे-समझे किसी को कोई वादा न करें।
आज की सीख : जब आप नेक इरादे से काम करते हैं, तो सफलता जरूर मिलती है।

मूलांक 4

जिन लोगों का जन्म 4, 13, 22 या 31 को हुआ, उनका मूलांक 4 है। आज के दिन वर्क में थोड़ा अस्थिर महसूस हो सकता है, लेकिन यह आपको कुछ नया सिखाने के लिए है। कामकाज के तरीकों के बदलना बहुत जरुरी है, जो भविष्य के लिए फायदेमंद है। भाग्यांक 5 की चंचलता आपको थोड़ा परेशान कर सकती है, इसलिए शांत रहकर अपने काम पर ध्यान दें। परिवार के साथ आज थोड़ा समय जरुर बिताएं और उनकी जरुरतों को समझें। आज के दिन खुद की लचीला बनाएं और खुद में बदलावों को स्वीकार करें।

क्या न करें- हर चीज को अपने नियंत्रण में रखने की कोशिश न करें।
आज की सीख - बदलाव ही विकास का असली रास्ता है।

मूलांक 5

जिन लोगों का जन्म 5,14 या 23 तारीख को हुआ है, उन लोगों का मूलांक 5 होता है। आज के दिन आप काफी एनर्जेटिक और सफल रहने वाला है क्योंकि भाग्यांक 5 आपकी अपनी ऊर्जा है। वर्क में आपको अचानक से कोई बड़ा अवसर प्राप्त हो सकता है या आप किसी जरूरी काम के लिए यात्रा पर भी जा सकते हैं। मूलांक 9 की मदद से आज आपको किसी पुराने काम को सफलतापूर्वक पूरा कर पाएंगे। आज आप अपनो के साथ काफी खुश नजर आएंगे और रिश्तों में नई ताजगी महसूस होगी। आज अपनी बुद्धिमानी का सही प्रयोग करें और किसी भी मौके को अपने हाथ से न जाने दें।

क्या न करें- भावनाओं में आकार अपनी जिम्मेदारियों को न भूलें।

आज की सीख - समझदारी और आजादी का सही मेल ही जीवन को सफल बनाता है।

मूलांक 6

जिन लोगों का जन्म 6, 15 या 24 तारीख को हुआ है, उनका मूलांक 6 है। आज के दिन रिश्तों में सुधार और कामकाज को नई दिशा मिलेगी। वर्क में आपको नए लोगों का सहयोग मिलेगा और आपके वर्क की तारीफ की जाएगी। भाग्यांक 5 की ऊर्जा आज आपको कुछ नया और अलग करने के लिए प्रेरित करेगी। परिवार में आज शांति और प्यार का माहौल बना रहेगा। आज के दिन आप दूसरों को क्षमा करते हैं, तो आपका जीवन और भी सुंदर बन जाएगा।

क्या न करे- दूसरों से ज्यादा उम्मीदें न रखें।

आज की सीख - बिना शर्त प्यार करना ही सबसे बड़ी खुशी है।

मूलांक 7

जिन लोगों का जन्म 7, 16 या 25 तारीख को हुआ है, उनका मूलांक 7 होता है, जो कि केतु से रुल होता है। आज के दिन आप थोड़ा गंभीर और सोच-विचार वाला रह सकता है। कामकाज में कोई खबर आपको चौंका सकती है, इससे घबराएं नहीं और अपनी समझदारी से काम लेना ही जरुरी है। भाग्यांक 5 की ऊर्जा आपको कुछ नया सीखने और लिखने-पढ़ने के काम में मदद करेगी। अपनो के साथ खुलकर बात करें, अपनी भावनाओं को जरुर शेयर करें। आज का दिन अपनी अंतरात्मा की आवाज जरुर सुने और खुद को भगवान से जोड़े। शांति से लिया गया हर एक फैसला सही साबित होगा।

क्या न करें- खुद को अकेला करके दुनिया से न दूर रहें।

आज की सीख- बदलाव कोई सजा नहीं, बल्कि ईश्वर का सही मार्गदर्शन होता है।

मूलांक 8

जिन लोगों का जन्म 8, 17 या 26 तारीख को हुआ, उनका मूलांक 8 होता है, जो कि कर्मफलदाता शनिदेव से रुल है। आज का दिन वर्क में बड़ी सफलता और पुराने रुके हुए कामों को पूरा करने का है। कामकाज में आज आप अपनी मेहनत से किसी बड़े सौदे को अंतिम रूप दे सकते हैं। भाग्यांक 5 की सहायता से आप अपने काम को विस्तार कर पाएंगे और नए लोगों से जुडेंगे। परिवार के साथ नरमी से पेश आएं, क्योंकि आपका सख्त स्वभाव उन्हें दुखी कर सकता है। आज के दिन आपके कर्मों का फल मिल सकता है। ईमानदारी से अपना काम करें और सबका सम्मान जरुर करें।

क्या न करें- अहंकार में आकर किसी का अपमान बिल्कुल भी न करें।

आज की सीख- जब आप दयालु होते हैं, तो आपके कर्म और भी हल्के हो जाएंगे।

मूलांक 9

जिन लोगों का जन्म किसी भी महीने की 9, 18 या 27 तारीख को हुआ है, उनका मूलांक 9 है। आज का दिन आपके लिए काफी शक्तिशाली और भावनात्मक स्पष्टता को लेकर आएगा क्योंकि मूलांक 9 आपकी अपनी ऊर्जा है। कामकाज में आप बहुत ही आत्मविश्वास के साथ बड़े-बड़े फैसले ले पाएंगे और अपनी मंजिल की ओर बढ़ पाएंगे। भाग्यांक 5 की चंचलता आपको नए अवसर देगी, जो आपको देश-दुनिया से जोड़ सकते हैं। आज आपके रिश्तों में पुरानी कड़वाहट दूर होगी और नई शुरुआत करने का समय सबसे बढ़िया है। आज के दिन आप खुद काफी हल्का और आजाद महसूस करेंगे।

क्या न करें- पुरानी बातों को न पकड़े और भावनाओं में बहने से बचें।

आज की सीख- पुरानी चीजों को छोड़ना हार नहीं, बल्कि असली आजादी है। 

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Prabhasakshi NewsRoom: न्यायाधीश के खिलाफ 'सत्याग्रह' न्यायिक तंत्र को बदनाम करने की साजिश लगती है

राजनीतिक और न्यायिक हलकों में उस समय नई बहस छिड़ गई जब आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली उच्च न्यायालय की न्यायाधीश स्वर्णा कांता शर्मा को पत्र लिखकर स्पष्ट कर दिया कि वह न तो स्वयं और न ही किसी वकील के माध्यम से अदालत में पेश होंगे। अपने पत्र में केजरीवाल ने कहा कि उन्हें न्याय मिलने की उम्मीद समाप्त हो चुकी है और इसी कारण उन्होंने महात्मा गांधी के सत्याग्रह के मार्ग पर चलने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि यह निर्णय उन्होंने अपनी अंतरात्मा की आवाज पर लिया है। साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वह न्यायाधीश के आदेश के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय जाने का अधिकार सुरक्षित रखेंगे। हम आपको बता दें कि यह मामला दिल्ली आबकारी नीति से जुड़ा है, जिसमें सीबीआई द्वारा उन पर आरोप लगाए गए हैं।

केजरीवाल ने एक वीडियो संदेश में स्वयं को जीवन के एक ऐसे मोड़ पर खड़ा बताया जहां उन्हें कठिन और आसान रास्ते में से एक चुनना है। उन्होंने कहा कि कई बार जीत और हार से अधिक महत्वपूर्ण यह होता है कि क्या सही है और क्या गलत। उन्होंने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को झूठा बताते हुए कहा कि उन्हें जेल भेजा गया और एक चुनी हुई सरकार को गिराया गया, लेकिन अंततः सच्चाई की जीत हुई। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि 27 फरवरी को अदालत ने उन्हें पूरी तरह निर्दोष घोषित किया और जांच एजेंसी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।

इसे भी पढ़ें: सवालों का सामना करेगी आम आदमी पार्टी?

हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि सच्चाई का रास्ता कभी आसान नहीं होता। उन्होंने कहा कि जैसे ही निचली अदालत का फैसला आया, जांच एजेंसी ने उसे उच्च न्यायालय में चुनौती दी और मामला न्यायाधीश स्वर्णा कांता शर्मा के समक्ष आया। केजरीवाल ने कहा कि यहीं से उनके मन में यह संदेह उत्पन्न हुआ कि क्या उन्हें निष्पक्ष न्याय मिल सकेगा? उन्होंने जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा के समक्ष पेश नहीं होने के फैसले के पीछे दो मुख्य कारण बताते हुए कहा कि जिस विचारधारा से जुड़े लोगों ने उनके खिलाफ आरोप लगवाये, उसी से संबंधित मंचों से न्यायाधीश का जुड़ाव रहा है, जबकि वह और उनकी पार्टी उस विचारधारा के विरोध में हैं। इसके चलते केजरीवाल ने हितों के टकराव की आशंका जताते हुए यह भी कहा कि इस मामले में केंद्रीय सरकार की जांच एजेंसी पक्षकार है और न्यायाधीश के दोनों बच्चे सरकारी वकीलों के पैनल में शामिल हैं।

हालांकि केजरीवाल ने यह भी कहा कि उनका उद्देश्य न्यायपालिका का अपमान करना नहीं है, बल्कि लोगों के विश्वास को मजबूत करना है। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है और उन्होंने ही उन्हें जमानत दी तथा बाद में निर्दोष घोषित किया। लेकिन उन्होंने न्याय के एक मूल सिद्धांत का उल्लेख करते हुए कहा कि न्याय केवल होना ही नहीं चाहिए बल्कि होता हुआ दिखाई भी देना चाहिए।
 
उन्होंने बताया कि इसी आधार पर उन्होंने न्यायाधीश से स्वयं को मामले से अलग करने का अनुरोध किया था, जिसे अस्वीकार कर दिया गया। इसके बाद उन्होंने सत्याग्रह का मार्ग अपनाने का निर्णय लिया और कहा कि वह अदालत में पेश नहीं होंगे, हालांकि अपने कानूनी अधिकारों का प्रयोग करते रहेंगे।

हम आपको याद दिला दें कि न्यायाधीश स्वर्णा कांता शर्मा ने केजरीवाल की याचिका को खारिज करते हुए स्पष्ट किया था कि केवल आशंकाओं या धारणाओं के आधार पर स्वयं को अलग नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा था कि ऐसे प्रयास न्यायपालिका में जनता के विश्वास को कमजोर कर सकते हैं। उन्होंने आरोपों को अटकलों और संकेतों पर आधारित बताते हुए कहा कि यह कानूनी मानकों को पूरा नहीं करते।

अपने बच्चों के सरकारी पैनल में होने के आरोप पर उन्होंने कहा था कि यह केवल केजरीवाल द्वारा लगाया गया आरोप है। उन्होंने यह भी कहा था कि यदि इस प्रकार के आधार पर मामलों की सुनवाई से अलग होना पड़े तो अदालतें किसी भी ऐसे मामले की सुनवाई नहीं कर पाएंगी जिसमें सरकार पक्षकार हो। उन्होंने यह भी जोड़ा था कि जैसे राजनेताओं के बच्चे राजनीति में आते हैं, वैसे ही न्यायाधीशों के बच्चे भी विधि के क्षेत्र में अपना स्थान बना सकते हैं और इसमें कोई अनुचित बात नहीं है।

देखा जाये तो इस पूरे घटनाक्रम ने राजनीति और न्यायपालिका के संबंधों पर एक नई बहस को जन्म दे दिया है। केजरीवाल का यह कदम कई गंभीर प्रश्न खड़े करता है। सत्याग्रह का मार्ग अपनाना एक ऐतिहासिक और नैतिक परंपरा रही है, जिसका उद्देश्य अन्याय के खिलाफ शांतिपूर्ण प्रतिरोध था। लेकिन क्या किसी न्यायाधीश पर आरोप लगाकर अदालत में पेश होने से इंकार करना उसी भावना के अनुरूप है?यदि हर आरोपी इसी तरह न्यायाधीश की निष्पक्षता पर सवाल उठाकर अदालत में आने से मना कर दे, तो न्यायिक व्यवस्था कैसे चलेगी? यह स्थिति न्यायपालिका की विश्वसनीयता को कमजोर कर सकती है। न्यायालयों का आधार ही यह है कि वह कानून और प्रक्रिया के अनुसार निष्पक्ष निर्णय दें। यदि व्यक्तिगत आशंकाओं के आधार पर प्रक्रिया को ठुकराया जाने लगे तो यह खतरनाक परंपरा बन सकती है।
 
सत्याग्रह का अर्थ आत्मसंयम और नैतिक बल से अन्याय का विरोध करना है, न कि संस्थाओं को कटघरे में खड़ा करना। इस प्रकार का कदम न केवल सत्याग्रह की मूल भावना के विपरीत है बल्कि यह न्यायिक तंत्र को बदनाम करने की साजिश जैसा भी प्रतीत हो सकता है। इसलिए यह जरूरी है कि राजनीतिक नेता अपने कदमों के व्यापक प्रभाव को समझें और ऐसी परंपरा न स्थापित करें जो आने वाले समय में न्याय व्यवस्था के लिए चुनौती बन जाए।

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