हाल के महीनों में वैश्विक ऊर्जा बाजार में उतार-चढ़ाव काफी तेज रहा है और इसका असर भारत की बड़ी कंपनियों पर भी पड़ा है। इसी बीच देश की सबसे बड़ी निजी रिफाइनरी कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड ने वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही में बदलते हालात के बीच अपनी रणनीति में लचीलापन दिखाते हुए काम जारी रखा है।
ईरान से जुड़े तनाव और पश्चिम एशिया में संघर्ष के कारण खाड़ी देशों से तेल और गैस की आपूर्ति प्रभावित हुई। ऐसे में कंपनी ने पारंपरिक फारस की खाड़ी के स्रोतों पर निर्भर रहने के बजाय अन्य क्षेत्रों से कच्चे तेल की आपूर्ति सुनिश्चित की। बता दें कि गुजरात के जामनगर में स्थित दुनिया के सबसे बड़े रिफाइनिंग कॉम्प्लेक्स का संचालन करने वाली कंपनी ने वैकल्पिक आपूर्तिकर्ताओं से समझौते कर उत्पादन पर असर नहीं पड़ने दिया है।
गौरतलब है कि कंपनी ने अपने निवेशकों को दी जानकारी में बताया कि फारस की खाड़ी से आने वाले लोडिंग अनुबंधों को बदलकर रिफाइनरी संचालन में कटौती से बचा गया। साथ ही, अलग-अलग देशों से कच्चे तेल की खरीद बढ़ाकर आपूर्ति को संतुलित रखा गया हैं।
वैश्विक स्तर पर 2025-26 के दौरान कच्चे तेल की आपूर्ति उम्मीद से अधिक रही, हालांकि रूस पर अमेरिका और यूरोप के प्रतिबंधों ने कुछ समय के लिए बाजार को प्रभावित किया। इसके बावजूद ईंधन की मांग में वृद्धि और सीमित रिफाइनिंग क्षमता के कारण ईंधन मार्जिन में तेजी देखने को मिली है।
इन परिस्थितियों में रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड ने तेजी से कदम उठाते हुए न सिर्फ कच्चे माल की उपलब्धता सुनिश्चित की, बल्कि अपनी रिफाइनरी और गैस आधारित इकाइयों के लिए लगातार आपूर्ति बनाए रखी। कंपनी ने घरेलू बाजार को प्राथमिकता देते हुए उत्पादों की उपलब्धता बनाए रखने पर जोर दिया और परिवहन लागत को कम करने के लिए लॉजिस्टिक्स में भी सुधार किए है।
मार्च तिमाही के दौरान ऊर्जा बाजार में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला, जहां कच्चे तेल की कीमतों, माल ढुलाई और बीमा लागत में तेज वृद्धि हुई। इसके साथ ही विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क लागू होने से घरेलू बिक्री पर मार्जिन पर दबाव बना है।
इन चुनौतियों से निपटने के लिए कंपनी ने प्रोपेन और ब्यूटेन जैसे संसाधनों का उपयोग बढ़ाकर रसोई गैस उत्पादन में वृद्धि की और प्राथमिक क्षेत्रों के लिए गैस आपूर्ति को प्राथमिकता दी। इसके अलावा ईंधन मिश्रण और बिजली उपयोग में बदलाव कर लागत को नियंत्रित करने की कोशिश की गई।
आगे की स्थिति को लेकर कंपनी का मानना है कि वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव और व्यापारिक अनिश्चितता के कारण ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है। हालांकि आने वाले समय में कच्चे तेल की मांग में हल्की गिरावट और सीमित नई रिफाइनिंग क्षमता के कारण बाजार संतुलन धीरे-धीरे सुधर सकता है।
कंपनी का कहना है कि उसकी जटिल रिफाइनिंग प्रणाली, विविध आपूर्ति रणनीति और पूरे मूल्य श्रृंखला में दक्षता बढ़ाने पर ध्यान ही भविष्य में बेहतर प्रदर्शन बनाए रखने में मदद करेगा।
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शेयर बाजार में पिछले हफ्ते जो गिरावट देखने को मिली, उसने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। लगातार तीसरे सत्र तक बाजार दबाव में रहा और प्रमुख सूचकांकों में तेज गिरावट दर्ज की गई। मौजूद जानकारी के अनुसार, निफ्टी 50 सूचकांक तीन सत्रों में करीब 679 अंक टूट गया, जबकि बीएसई सेंसेक्स में बुधवार से शुक्रवार के बीच 2600 अंकों से ज्यादा की गिरावट देखी गई है।
गौरतलब है कि बैंक निफ्टी भी इस गिरावट से अछूता नहीं रहा और मंगलवार के 57,371 के स्तर से गिरकर 56,089 पर बंद हुआ, यानी करीब 1300 अंकों की कमजोरी दर्ज की गई हैं। सेक्टर के लिहाज से देखा जाए तो सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र में सबसे ज्यादा दबाव रहा, जहां 10 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई, जबकि कमजोर माहौल के बावजूद उपभोक्ता सामान और ऊर्जा क्षेत्र में करीब 2 प्रतिशत की तेजी देखने को मिली है।
जानकारों का मानना है कि ऊंचे स्तरों पर मुनाफावसूली के कारण बाजार में गिरावट आई है। बता दें कि बाजार अपने 50-दिवसीय औसत स्तर 24,300 (निफ्टी) और 78,000 (सेंसेक्स) के नीचे फिसल गया, जिसके बाद बिकवाली का दबाव और बढ़ गया है।
चॉइस ब्रोकिंग के कार्यकारी निदेशक सुमीत बगाड़िया के अनुसार, मौजूदा समय में बाजार का रुझान कमजोर बना हुआ है और निफ्टी 50 निकट भविष्य में 23,700 से 23,650 के स्तर का परीक्षण कर सकता है। उन्होंने बताया कि हालिया बंद स्तर 23,897 यह संकेत देता है कि बाजार में लगातार बिकवाली का दबाव बना हुआ है और निवेशकों का भरोसा कमजोर हुआ है।
तकनीकी विश्लेषण के आधार पर देखें तो 23,650 से 23,700 के बीच निफ्टी के लिए समर्थन स्तर है, जबकि 24,050 से 24,150 के बीच प्रतिरोध देखने को मिल सकता है। इसके अलावा, रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स 50 के नीचे खिसककर 49.21 पर आ गया है, जो कमजोर गति का संकेत देता है। वहीं, अस्थिरता सूचकांक में बढ़ोतरी यह दिखाती है कि बाजार में अनिश्चितता बढ़ रही हैं।
डेरिवेटिव आंकड़ों के अनुसार 24,000 और 24,100 के स्तर पर कॉल राइटिंग अधिक देखने को मिली, जबकि 23,900 और 23,800 पर पुट राइटिंग से यह संकेत मिलता है कि ये स्तर निकट भविष्य में सहारा दे सकते हैं।
शेयरों की बात करें तो सुमीत बगाड़िया ने भारतीय स्टेट बैंक, कोल इंडिया लिमिटेड और ग्रासिम इंडस्ट्रीज के शेयरों में खरीदारी की सलाह दी है। उनके अनुसार भारतीय स्टेट बैंक का शेयर करीब 1100 के स्तर पर मजबूत आधार बना रहा है और इसमें ऊपर की तरफ बढ़त की संभावना बनी हुई हैं।
कोल इंडिया लिमिटेड में भी कीमतों का ढांचा सुधरता दिख रहा है और इसमें धीरे-धीरे तेजी का रुख बन सकता है, जबकि ग्रासिम इंडस्ट्रीज फिलहाल स्थिर दायरे में कारोबार कर रहा है और इसमें आगे बढ़त के संकेत मिल रहे हैं।
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