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बांग्लादेश का स्टार्टअप इकोसिस्टम संकट में, विदेशी निवेश पर निर्भरता बनी बड़ी चुनौती
नई दिल्ली, 26 अप्रैल (आईएएनएस)। बांग्लादेश का कभी फलता-फूलता स्टार्टअप इकोसिस्टम फंडिंग घटने की वजह से दबाव में दिख रहा है। एक रिपोर्ट के मुताबिक कंपनियां अपने संचालन को सीमित कर रही हैं और कई प्रमुख फर्में कर्मचारियों को वेतन देने जैसी बुनियादी जिम्मेदारियां निभाने में भी संघर्ष कर रही हैं।
द डेली स्टार की रिपोर्ट के अनुसार, यह संकट मार्च की शुरुआत में सामने आया। जब वेतन न मिलने के कारण सैकड़ों कर्मचारियों ने चालदाल के जशोर स्थित दफ्तर के बाहर विरोध प्रदर्शन किया। कुछ कर्मचारियों ने तो यह भी दावा किया कि उन्हें चार महीने तक वेतन नहीं मिला है।
इस घटना ने एक ऐसे सेक्टर की सेहत को लेकर नई चिंताएं खड़ी कर दी हैं, जिसे कभी देश के डिजिटल और आर्थिक उभार का प्रतीक माना जाता था।
2013 में शुरू हुई चालदाल बांग्लादेश में ऑनलाइन किराना डिलीवरी के क्षेत्र में एक अग्रणी कंपनी के तौर पर उभरी थी और शहरी इलाकों में घर-घर में जाना-पहचाना नाम बन गई थी।
रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी ने 2015 से 2025 के बीच करीब 40 मिलियन डॉलर की फंडिंग जुटाई और तेजी से अपना विस्तार किया। यह विस्तार खासकर कोविड-19 महामारी के दौरान हुआ, जब कंपनी का सालाना राजस्व बढ़कर 55 मिलियन डॉलर तक पहुंच गया था।
चालदाल की मुश्किलें पूरे स्टार्टअप इकोसिस्टम में आई एक व्यापक मंदी को दर्शाती हैं। यह इकोसिस्टम 2010 के दशक में बीकाश , शॉपअप , पथाओ और सहज जैसी कंपनियों के उभार के साथ खूब फला-फूला था।
उसी दौरान उबर और फूडपांडा जैसी ग्लोबल कंपनियां भी बांग्लादेश के बाजार में आईं, क्योंकि वहां डिजिटल इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा था और अर्थव्यवस्था मजबूत हो रही थी।
अपने चरम पर बांग्लादेश में 1,200 से ज्यादा स्टार्टअप सक्रिय थे और हर साल करीब 200 नए स्टार्टअप शुरू हो रहे थे।
2010 के बाद से इस सेक्टर में 1.12 अरब डॉलर से ज्यादा की फंडिंग आई, जिसमें ज्यादातर पैसा विदेशी निवेशकों का था।
सबसे अच्छा समय 2021 में आया, जब स्टार्टअप्स ने 94 डील्स के जरिए 434 मिलियन डॉलर से ज्यादा की फंडिंग जुटाई। इसमें एक बड़ी डील सॉफ्ट बैंक की ओर से बिकाश में 250 मिलियन डॉलर का निवेश था।
उसके बाद तेजी से गिरावट आई। 2024 तक सालाना फंडिंग घटकर सिर्फ 42 मिलियन डॉलर रह गई, जिसमें 41 डील्स हुईं। वहीं 2025 में सिर्फ 12 डील्स हुईं, जिनसे करीब 124 मिलियन डॉलर आए।
खास बात यह है कि इस फंडिंग का लगभग पूरा हिस्सा 110 मिलियन डॉलर की एक ही डील से आया, जिसने सल्कि ग्रुप को सपोर्ट किया। यह ग्रुप शॉपअप और सऊदी-बेस्ड सेरी के मर्जर से बना था।
इंडस्ट्री के लोगों का कहना है कि यह गिरावट वैश्विक और घरेलू दोनों तरह के दबावों की वजह से आई है।
वसीम अलीम ने कहा कि पिछले 12-13 वर्षों में अगस्त 2025 से पहले कंपनी को कभी सैलरी देने में दिक्कत नहीं हुई थी। वहीं फहीम अहमद का कहना है कि पिछले दो वर्षों में स्टार्टअप्स की हालत लगातार कमजोर होती जा रही है, जैसा कि रिपोर्ट में बताया गया है।
--आईएएनएस
एवाई/वीसी
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