स्टेटहुड-सिक्स्थ शेड्यूल विवाद के बीच 30 अप्रैल को अमित शाह का लद्दाख दौरा, 22 मई को सब-कमेटी की बैठक
लद्दाख में स्टेटहुड और 6th शेड्यूल की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन के बीच गृह मंत्री Amit Shah 2 दिनों के दौरे पर 30 अप्रैल को लेह पहुंचेंगे. लद्दाख के हाल ही में बने एलजी V. K. Saxena ने ट्विटर पर इस बात की जानकारी साझा की है. एलजी द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक अमित शाह 1 मई को बुद्ध पूर्णिमा के दिन भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों को श्रद्धांजलि देंगे और 1 मई से 14 मई के बीच Sacred Exposition के आध्यात्मिक महत्व को लेकर अपने विचार लोगों के सामने रखेंगे. एलजी ने यह भी कहा है कि गृह मंत्री का यह दौरा सरकार की लद्दाख के विकास को लेकर प्रतिबद्धता को दर्शाता है.
22 मई को सब-कमेटी की बैठक
दूसरी तरफ गृह मंत्री के दौरे से पहले बड़ी खबर यह है कि गृह मंत्रालय द्वारा लद्दाख के मुद्दों को लेकर बनाई गई सब-कमेटी की 22 मई को बैठक होगी. इसकी जानकारी एलजी वीके सक्सेना ने अमित शाह के दौरे वाले ट्वीट के कुछ ही घंटों बाद ट्विटर पर साझा की है. राजनीतिक संवाद के लिए बनाई गई यह कमेटी लद्दाख के सभी स्टेकहोल्डर्स से बातचीत करेगी और कोशिश करेगी कि उनकी आकांक्षाओं पर खरा उतर सके. एलजी के इस ट्वीट के बाद एक बात साफ है कि लद्दाख में अलग-अलग संगठनों द्वारा की जा रही मांगों को लेकर जो बातचीत का सिलसिला रुका था, वह फिर से शुरू होने जा रहा है. यही कारण है कि अमित शाह का यह दौरा बातचीत से पहले काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
2023 से चल रहा आंदोलन
लद्दाख में पिछले काफी लंबे समय से चल रहे आंदोलन की बात करें तो लद्दाख में स्टेटहुड और 6th शेड्यूल की मांग को लेकर 2023 के बाद से यह आंदोलन लगातार जारी है. क्लाइमेट संरक्षण कार्यकर्ता Sonam Wangchuk के नेतृत्व में इस मुहिम की शुरुआत की गई थी. इस दौरान केंद्र सरकार द्वारा बनाई गई सब-कमेटी और लद्दाख के प्रतिनिधियों के बीच बातचीत भी हुई, लेकिन कोई ठोस फैसला नहीं लिया जा सका. पिछले साल सितंबर में चल रहे आंदोलन के दौरान कुछ हिंसक घटनाएं भी देखने को मिली थीं.
अमित शाह के दौरे से उम्मीद
इसके बाद एक बार फिर अब लद्दाख में बातचीत के रास्ते खुलते नजर आ रहे हैं. जेल से बाहर आने के बाद सोनम वांगचुक भी कह चुके हैं कि अगर सरकार कई मुद्दों पर बातचीत को तैयार है तो उन्हें भी कुछ मुद्दों पर लचीलापन दिखाना होगा. ऐसे में साफ है कि गृह मंत्री अमित शाह का लद्दाख दौरा अहम माना जा रहा है और अब देखना यह होगा कि उनके इस दौरे के दौरान उनकी मुलाकात किन-किन लोगों से होती है और क्या कोई ठोस समाधान निकल पाता है.
निजी क्षेत्र का अंतरिक्ष निवेश पांच वर्षों में 600 मिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक : डॉ.जितेंद्र सिंह
नई दिल्ली, 26 अप्रैल (आईएएनएस)। केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने रविवार को पूरे देश के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में अंतरिक्ष प्रयोगशालाएं स्थापित करने की योजनाओं की समीक्षा के दौरान कहा कि निजी क्षेत्र का अंतरिक्ष निवेश पांच वर्षों में 600 मिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक हो गया है।
इन योजनाओं के तहत, पहले चरण में सात ऐसी प्रयोगशालाएं स्थापित की जाएंगी ताकि छात्रों को उपग्रह प्रणालियों, रॉकेटरी और मिशन डिजाइन में व्यावहारिक अनुभव प्रदान किया जा सके।
यह समीक्षा इन-स्पेस के अध्यक्ष डॉ. पवन गोयनका द्वारा दी गई विस्तृत जानकारी के बाद हुई, जिन्होंने भारत के अंतरिक्ष सुधारों में हुई प्रगति और मूल्य श्रृंखला में निजी खिलाड़ियों की बढ़ती भागीदारी का अवलोकन प्रस्तुत किया।
भारत का निजी अंतरिक्ष पारिस्थितिकी तंत्र तेजी से विकसित हुआ है, और स्टार्टअप्स की संख्या 2019 में एकल अंक से बढ़कर 2026 की शुरुआत तक 400 से अधिक हो गई है। ये स्टार्टअप्स अब प्रक्षेपण यान, उपग्रह और पेलोड निर्माण, जमीनी अवसंरचना, डेटा सेवाओं और उभरते इन-ऑर्बिट क्षेत्रों में सक्रिय हैं।
इस गति को बनाए रखने के लिए कई लक्षित पहलें शुरू की गई हैं। विकास के चरण में स्टार्टअप्स को सहयोग देने के लिए एसआईडीबीआई के साथ मिलकर 1,000 करोड़ रुपए का वेंचर कैपिटल फंड शुरू किया जा रहा है, वहीं 500 करोड़ रुपए का टेक्नोलॉजी एडॉप्शन फंड शुरुआती चरण के नवाचारों को व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य उत्पादों में परिवर्तित करने में मदद कर रहा है। सीड फंड योजना के तहत विचार और प्रोटोटाइप चरण में स्टार्टअप्स को 1 करोड़ रुपये तक का अनुदान, मार्गदर्शन और इकोसिस्टम सहायता प्रदान की जा रही है।
केंद्र सरकार के अंतरिक्ष विभाग के मुताबिक,कुशल कार्यबल तैयार करने के प्रयास भी जारी हैं, जिसके तहत 17 विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम पूरे किए जा चुके हैं और उपग्रह निर्माण, प्रक्षेपण यान प्रणाली और अंतरिक्ष साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में लगभग 900 प्रतिभागियों को प्रमाणित किया जा चुका है।
अंतरिक्ष क्षेत्र में भारत की वैश्विक भागीदारी लगातार मजबूत होती जा रही है, और अब इसकी साझेदारी 45 से अधिक देशों तक फैली हुई है। हाल के सहयोगों में सिंगापुर और संयुक्त अरब अमीरात के साथ समझौते, अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष मंचों में भारतीय कंपनियों की भागीदारी और घरेलू स्टार्टअप को वैश्विक बाजारों से जोड़ने की पहल शामिल हैं।
--आईएएनएस
एबीएस/
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