'फेक और तथ्यहीन', BSP सुप्रीमो मायावती ने पार्टी के 3 नेताओं के निष्कासन की खबरों पर दी सफाई
Mayawati: बहुजन समाज पार्टी (BSP) सुप्रीमो मायावती ने अपनी पार्टी के तीन वरिष्ठ नेताओं के निष्कासन की खबरों पर झूठा और तथ्यहीन बताया है. बसपा सुप्रीमो ने इसे लेकर वायरल हो रहे एक पत्र का खंडन किया. जिसमें उन्होंने ऐसी खबरों फेक और तथ्यहीन करार दिया. बसपा प्रमुख मायावती ने शनिवार रात सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट किया. जिसमें उन्होंने इसे बारे में स्थिति स्पस्ठ की. अपनी पोस्ट में बीएसपी सुप्रीम मायावती ने लोगों से इस खबर पर ध्यान न देने की अपील की. साथ ही मीडिया से ऐसी खबरों के प्रति सावधानी बरतने की भी सलाह दी.
तीन नेताओं के निष्कासन की खबरों पर क्या बोलीं मायावती?
बसपा प्रमुख मायावती ने एक्स पर एक पोस्ट किया. जिसमें उन्होंने लिखा, "जैसा कि सर्वविदित है कि बीएसपी अध्यक्ष, जिला गाजियाबाद द्वारा कल जय प्रकाश सिंह को तथा बीएसपी अध्यक्ष, जिला बुलन्दशहर द्वारा आज धर्मवीर सिंह अशोक, पूर्व विधायक को पार्टी विरोधी गतिविधियों में लिप्त होने के कारण पार्टी से निष्कासित कर दिया गया, जिसकी काफी चर्चा मीडिया में है."
बीएसपी सुप्रीमो मायावती ने आगे लिखा, "लेकिन आज ही बाद में पाटी के तीन वरिष्ठ लोगों- मेवालाल गौतम, मुनक़ाद अली और नौशाद अली को पार्टी से निष्कासित करने वाला बीएसपी अध्यक्ष, जिला बुलन्दशहर के जाली लेटरपैड पर जारी प्रेस विज्ञप्ति पूर्णतः फेक व फर्जी है. इसीलिये उस पर क़तई ध्यान नहीं दिया जाये. मीडिया भी ऐसी तथ्यहीन खबरों से बचे तथा आगे ऐसे फेक खबरों पर जरूरी सावधानी बरते अर्थात् पुष्टि/सत्यापन जरूर कर ले तो यह उचित होगा."
जैसाकि सर्वविदित है कि बी.एस.पी. अध्यक्ष, ज़िला ग़ाज़ियाबाद द्वारा कल श्री जय प्रकाश सिंह को तथा बी.एस.पी. अध्यक्ष, ज़िला बुलन्दशहर द्वारा आज श्री धर्मवीर सिंह अशोक, पूर्व विधायक को पार्टी विरोधी गतिविधियों में लिप्त होने के कारण पार्टी से निष्कासित कर दिया गया, जिसकी काफी चर्चा…
— Mayawati (@Mayawati) April 25, 2026
जानें क्या है पूरा मामला?
दरअसल, पिछले दिनों बुलंदशहर बसपा के जिलाध्यक्ष रवींद्र प्रधान ने एक पत्र जारी किया था. जिसमें पूर्व एमएलसी धर्मवीर सिंह को पार्टी विरोधी गतिविधियों में लिप्त होने और पार्टी में अनुशासनहीनता अपनाने के कारण बसपा से निष्कासित किए जाने की बात कही गई थी. इसके अलावा इस पत्र में ये भी लिखा गया था कि जबकि इनको पार्टी विरोधी गतिविधियों और पार्टी में अनुशासनहीनता अपनाने के बारे में कई बार चेतावनी भी दी जा चुकी है.
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बावजूद इसके इनकी गतिविधियों और कार्यशैली आदि में कोई सुधार नहीं आया है. इसीलिए पार्टी और मूवमेन्ट के हित में आज इनको पार्टी से निष्कासित कर दिया गया है. यही नहीं इस खबर के बाद बसपा जिलाध्यक्ष बुलंदशहर के जाली लेटरपैड से मेवालाल गौतम, मुनकाद अली और नौशाद अली के बारे में फर्जी प्रेस विज्ञप्ति भी जारी की गई. इसी पर बसपा सुप्रीमो मायावती ने सफाई दी और इन खबरों का खंडन भी किया.
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कैट ने सरकार से छोटे व्यापारियों के हितों को सुरक्षित रखने के लिए मजबूत राष्ट्रीय ई-कॉमर्स नीति बनाने का आग्रह किया
नई दिल्ली, 26 अप्रैल (आईएएनएस)। अखिल भारतीय व्यापारी परिसंघ (कैट) ने रविवार को कहा कि अगर भारत के तेजी से बढ़ते डिजिटल मार्केट को अविनियमित छोड़ा गया तो यह भारत के पारंपरिक खुदरा बाजार के ढांचे को नुकसान पहुंचा सकता है, जो कि बड़े स्तर पर देश में स्वरोजगार और नौकरियों के अवसर पैदा करते हैं।
इसके साथ ही, कैट ने सरकार से आग्रह किया कि वह छोटे व्यापारियों के हितों को सुरक्षित रखने के लिए मजबूत राष्ट्रीय ई-कॉमर्स नीति बनाए।
केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल को भेजे गए एक पत्र में, कैट के महासचिव और सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने डेलॉयट और गूगल की ताजा संयुक्त रिपोर्ट द 250 बिलियन डॉलर कॉमर्स फ्रंटियर का हवाला देते हुए कहा कि रिपोर्ट भारत के डिजिटल वाणिज्य बाजार के भविष्य में होने वाले व्यापक विस्तार को स्पष्ट रूप से दर्शाती है, लेकिन साथ ही निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा और संतुलित विकास सुनिश्चित करने के लिए नीतिगत सुरक्षा उपायों की तत्काल आवश्यकता पर भी जोर देती है।
रिपोर्ट के अनुसार, भारत का ई-कॉमर्स बाजार 2019 से 2025 के बीच बढ़कर लगभग 90 अरब डॉलर हो गया है और 2030 तक इसके 250 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है।
इसमें आगे कहा गया है कि 2030 तक 22 करोड़ नए जनरेशन जेड के ग्राहक ऑनलाइन खरीदारी से जुड़ेंगे, जनरेशन जेड के ग्राहक कुल ऑनलाइन खर्च का 45 प्रतिशत हिस्सा होंगे, 15 करोड़ नए ग्राहक ऑनलाइन आएंगे और प्रति व्यक्ति ई-कॉमर्स खर्च दोगुना होने की उम्मीद है।
टियर-2 शहरों और छोटे कस्बों में पहले से ही 60 प्रतिशत से अधिक ग्राहक सामान खरीद रहे हैं, कुल खर्च का लगभग आधा हिस्सा और कुल ऑर्डर का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा यहीं से आता है।
खंडेलवाल ने कहा कि ये आंकड़े भारत के डिजिटल बाजार की अपार क्षमता और संभावनाओं को दर्शाते हैं।
कैट ने सरकार से आग्रह किया कि वह तत्काल एक व्यापक राष्ट्रीय ई-कॉमर्स नीति लागू करे, जिसमें प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) नियमों का कड़ाई से पालन, अनुचित मूल्य निर्धारण पर प्रतिबंध, अवैध दुकानों का विनियमन, एल्गोरिदम और विक्रेता रैंकिंग में पारदर्शिता, अवैध व्यापार से सुरक्षा, नकली और घटिया वस्तुओं के लिए जवाबदेही, लघु एवं मध्यम उद्यमों और छोटे खुदरा विक्रेताओं के लिए समान अवसर, डेटा सुरक्षा और व्यापारियों एवं उपभोक्ताओं के लिए एक समर्पित शिकायत निवारण प्रणाली के प्रावधान हों।
भारत के छोटे खुदरा विक्रेता, किराना स्टोर, थोक विक्रेता, वितरक, परिवहनकर्ता और संबद्ध क्षेत्र शहरी और ग्रामीण भारत में करोड़ों परिवारों का भरण-पोषण करते हैं। उन्होंने कहा कि इस पारिस्थितिकी तंत्र के कमजोर होने से गंभीर आर्थिक और सामाजिक परिणाम होंगे।
कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष, बीसी भरतिया ने आरोप लगाया कि प्रमुख ई-कॉमर्स कंपनियां अप्रत्यक्ष इन्वेंट्री स्वामित्व, पसंदीदा विक्रेता व्यवस्था, निजी लेबल और जोड़-तोड़ वाली व्यावसायिक संरचनाओं के माध्यम से भारत की एफडीआई नीति की भावना का लगातार उल्लंघन कर रही हैं।
जिसे बाजार मॉडल के रूप में अनुमति दी गई थी, वह तेजी से इन्वेंट्री-नियंत्रित मॉडल में बदल गया है।
उन्होंने आगे कहा कि अनुचित मूल्य निर्धारण, कैश बर्न के माध्यम से भारी छूट, अवैध भंडार, डार्क पैटर्न, तरजीही सूचीकरण और घटिया माल की आपूर्ति जैसी प्रथाएं आम हो गई हैं। ये तरीके न केवल प्रतिस्पर्धा-विरोधी हैं, बल्कि धीरे-धीरे उन लाखों ईमानदार व्यापारियों को खत्म कर रहे हैं जिन्होंने विश्वास और सेवा के माध्यम से भारत के घरेलू बाजार का निर्माण किया है।
--आईएएनएस
एबीएस/
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