SSC Stenographer 2026: 12वीं पास के लिए सुनहरा मौका, 700 से ज्यादा पदों पर निकली है भर्ती, 15 मई तक करें आवेदन
कर्मचारी चयन आयोग ने स्टेनोग्राफर ग्रेड सी और डी परीक्षा 2026 के लिए आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी है। इस भर्ती के तहत 713 पदों को भरा जाएगा। ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 24 अप्रैल 2026 से शुरू हो चुकी है। इच्छुक व योग्य उम्मीदवार 15 मई 2026 तक आवेदन जमा कर सकते हैं। आवेदन केवल SSC की नई आधिकारिक वेबसाइट ssc.gov.in के माध्यम से स्वीकार किए जाएंगे। यह भर्ती अभियान भारत सरकार के विभिन्न मंत्रालयों, विभागों, संगठनों और उनके अधीनस्थ कार्यालयों में पदों को भरने के लिए आयोजित किया जा रहा है।
SSC Stenographer Recruitment 2026 (Grade C & D)
कुल पद: 713
आयु सीमा: ग्रेड सी के लिए आयु सीमा 18 से 30 वर्ष और ग्रेड डी के लिए 18 से 27 वर्ष रखी गई है। आरक्षित श्रेणियों जैसे SC/ST को 5 वर्ष और OBC को 3 वर्ष की ऊपरी आयु सीमा में छूट दी गई है। आयु की गणना 01 अगस्त, 2026 के आधार पर की जाएगी।
शैक्षणिक योग्यता: उम्मीदवार का किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से 12वीं कक्षा या उसके समकक्ष परीक्षा पास होना अनिवार्य है।
आवेदन शुल्क: रजिस्ट्रेशन फीस का भुगतान करना अनिवार्य है। अनारक्षित वर्ग के लिए एप्लीकेशन फीस 100 रुपये निर्धारित की गई है। इसके अलावा, एससी एवं एसटी और महिला उम्मीदवारों को रजिस्ट्रेशन फीस में छूट दी गई है।
चयन प्रक्रिया: चयन मुख्य रूप से दो चरणों में होगा।
- कंप्यूटर आधारित परीक्षा (CBT): इसमें जनरल इंटेलिजेंस, जनरल अवेयरनेस और इंग्लिश लैंग्वेज से जुड़े 200 अंकों के प्रश्न पूछे जाएंगे। ध्यान रहे कि प्रत्येक गलत उत्तर पर 0.25 अंकों की नेगेटिव मार्किंग होगी।
- स्टेनोग्राफी स्किल टेस्ट: जो उम्मीदवार CBT पास करेंगे, उन्हें स्किल टेस्ट के लिए बुलाया जाएगा। इसमें 10 मिनट का डिक्टेशन दिया जाएगा।
- परीक्षा में पास होने के लिए जनरल वर्ग के उम्मीदवारों को 30 प्रतिशत, ओबीसी और ईडब्ल्यूएस उम्मीदवारों को 25 प्रतिशत और आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को पास होने के लिए न्यूनतम 20 प्रतिशत अंक प्राप्त करना अनिवार्य है।
महत्वपूर्ण तिथियाँ (Key Dates)
- नोटिफिकेशन जारी होने की तिथि: 24 अप्रैल 2026
- ऑनलाइन आवेदन शुरू: 24 अप्रैल 2026
- आवेदन की अंतिम तिथि: 15 मई 2026 (रात 11:00 बजे तक)
- ऑनलाइन फीस जमा करने की अंतिम तिथि: 16 मई 2026
- आवेदन सुधार विंडो कब खुलेगी: 20 मई से 21 मई 2026 तक
- कंप्यूटर आधारित परीक्षा (CBT): जुलाई-अगस्त 2026 (संभावित)
इंदौर में AI का कमाल: शुरू हुआ ई-चेक गेट, अवैध खनिज परिवहन पर कड़ा एक्शन
मध्य प्रदेश में अब अवैध खनिज परिवहन को रोकने के लिए नई तकनीक का सहारा लिया जा रहा है। AI आधारित ई-चेक गेट सिस्टम लागू होने के बाद अब बिना किसी मानव हस्तक्षेप के ही गाड़ियों की जांच होगी। यह कदम इसलिए अहम माना जा रहा है क्योंकि लंबे समय से खनिज के अवैध परिवहन को लेकर शिकायतें सामने आती रही हैं।
इंदौर जिले में इस सिस्टम की शुरुआत हो चुकी है, जहां से गुजरने वाले हर वाहन की जांच अब पूरी तरह डिजिटल तरीके से की जा रही है। MP AI ई-चेक गेट सिस्टम आने वाले समय में पूरे प्रदेश में लागू किया जाएगा, जिससे निगरानी और सख्ती दोनों बढ़ेंगी।
कैसे काम करेगा यह सिस्टम
MP AI ई-चेक गेट सिस्टम एक ऐसी व्यवस्था है, जिसमें तकनीक के जरिए हर वाहन की जानकारी अपने आप रिकॉर्ड हो जाती है। जब कोई वाहन ई-चेक गेट से गुजरता है, तो वहां लगे कैमरे और सेंसर तुरंत उसकी पहचान कर लेते हैं।
इस सिस्टम में वेरीफोकल कैमरा, एएनपीआर और आरएफआईडी रीडर का इस्तेमाल किया जा रहा है। इन सभी तकनीकों की मदद से वाहन का नंबर, उसमें लदे खनिज की मात्रा और वजन का मिलान अपने आप हो जाता है। MP AI ई-चेक गेट का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसमें किसी व्यक्ति की जरूरत नहीं होती, जिससे गड़बड़ी या भ्रष्टाचार की संभावना भी कम हो जाती है।
इंदौर में शुरू हुई कार्रवाई, सीधे कट रहा ई-चालान
MP AI ई-चेक गेट के लागू होते ही कार्रवाई भी शुरू कर दी गई है। इंदौर में इस सिस्टम के तहत अब बिना ई-ट्रांजिट पास (ई-टीपी) के खनिज ले जाने वाले वाहनों पर सीधे ई-चालान किया जा रहा है। अगर कोई वाहन तय मात्रा से ज्यादा खनिज लेकर चलता है या उसके पास वैध दस्तावेज नहीं होते, तो उसके खिलाफ तुरंत ऑनलाइन कार्रवाई की जाती है। खनिज विभाग के अधिकारियों का कहना है कि MP AI ई-चेक गेट सिस्टम से अब किसी भी तरह की लापरवाही या नियम तोड़ने पर तुरंत पकड़ हो सकेगी।
प्रदेशभर में बढ़ रहा नेटवर्क, 40 गेट पहले से सक्रिय
MP AI ई-चेक गेट सिस्टम सिर्फ इंदौर तक सीमित नहीं रहेगा। प्रदेशभर में अब तक करीब 40 ई-चेक गेट सक्रिय किए जा चुके हैं और आने वाले समय में इनकी संख्या और बढ़ाई जाएगी। इंदौर में भी अन्य प्रमुख मार्गों पर नए गेट लगाने की तैयारी की जा रही है, जिससे हर रूट पर निगरानी मजबूत हो सके। यह नेटवर्क जितना बड़ा होगा, अवैध खनिज परिवहन को रोकना उतना ही आसान हो जाएगा। MP AI ई-चेक गेट सिस्टम इस दिशा में एक बड़ा कदम साबित हो सकता है।
RFID टैग से होगी हर गाड़ी की पहचान
MP AI ई-चेक गेट सिस्टम में हर खनिज परिवहन वाहन पर आरएफआईडी टैग लगाना अनिवार्य किया गया है। यह टैग वाहन के फ्रंट विंडशील्ड पर लगाया जाएगा। जैसे ही वाहन गेट से गुजरेगा, सिस्टम उसे पहचान लेगा और उसकी पूरी जानकारी अपने आप रिकॉर्ड हो जाएगी। इससे यह पता लगाना आसान हो जाएगा कि वाहन कहां से आया है और उसमें कितना खनिज है। इस व्यवस्था से ट्रैकिंग आसान होगी और कोई भी वाहन नियमों से बच नहीं पाएगा।
अवैध खनिज परिवहन पर क्या असर पड़ेगा
MP AI ई-चेक गेट सिस्टम लागू होने के बाद अवैध खनिज परिवहन पर सीधा असर पड़ेगा। पहले जहां निगरानी सीमित थी और कई बार गाड़ियां बिना जांच के निकल जाती थीं, वहीं अब हर वाहन पर नजर रखी जाएगी। इससे न सिर्फ राजस्व का नुकसान रुकेगा, बल्कि पर्यावरण को होने वाले नुकसान को भी कम किया जा सकेगा।
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