'जैकेट उतारते हुए...', इंटीमेट सीन्स करते हुए ये एक्ट्रेस हुई अनकंफर्टेबल, खाली कमरे में डायरेक्टर ने कराया था शूट
Khushi Dubey On Intimate Scenes: टीवी और ओटीटी की दुनिया में अपनी पहचान बना चुकीं एक्ट्रेस खुशी दुबे इन दिनों अपनी नई वेब सीरीज ‘सर्विस गर्ल’ को लेकर चर्चा में हैं. सीरीज स्ट्रीम हो चुकी है और रिलीज से पहले इसके ट्रेलर ने भी दर्शकों का ध्यान खींचा था. शो में खुशी का एक अलग और बोल्ड अंदाज देखने को मिल रहा है, जिसे लेकर एक्ट्रेस लगातार सुर्खियों में हैं.
खुशी दुबे ने अपने करियर में अलग-अलग तरह के किरदार निभाए हैं और टीवी के साथ-साथ ओटीटी पर भी अपनी एक्टिंग का दम दिखाया है. अब ‘सर्विस गर्ल’ में उनका किरदार पहले के मुकाबले काफी अलग नजर आ रहा है. शो में कुछ ऐसे सीन्स भी हैं, जिन्हें शूट करने के दौरान खुशी को असहजता महसूस हुई थी. हाल ही में एक इंटरव्यू में एक्ट्रेस ने पहली बार इस बारे में खुलकर बात की और बताया कि इन सीन्स को शूट करते समय सेट पर किस तरह का माहौल रखा गया था.
‘कुछ सीन्स को लेकर मैं असहज थी’
‘Buzzzooka Prime’ के साथ बातचीत में खुशी दुबे से ‘सर्विस गर्ल’ में इंटीमेट और बोल्ड सीन्स को लेकर सवाल किया गया. इस पर एक्ट्रेस ने साफ किया कि शो में बहुत ज्यादा इंटीमेसी नहीं है लेकिन कुछ सीन्स ऐसे जरूर थे जिनको लेकर वो शूटिंग के दौरान थोड़ी असहज थीं. खुशी ने बताया कि कुछ सीन्स देखने में भले ही ज्यादा रिवीलिंग न हों, लेकिन उनके किरदार और सिचुएशन की वजह से उन्हें शूट करना आसान नहीं था. एक्ट्रेस के मुताबिक, वो शो में ‘सर्विस गर्ल’ के अटायर में थीं और एक सीन में जैकेट उतारने के पीछे भी कहानी से जुड़ी एक खास वजह थी. यानी ये सीन सिर्फ ग्लैमर या बोल्डनेस दिखाने के लिए नहीं रखा गया था, बल्कि किरदार की परिस्थिति और कहानी का हिस्सा था.
‘जैकेट उतारने के पीछे भी एक इंटेंशन था’
खुशी ने बताया कि उनके लिए ये जरूरी था कि बोल्ड सीन सिर्फ दर्शकों का ध्यान खींचने के लिए न हों. हर सीन के पीछे कोई न कोई मकसद होना चाहिए. उन्होंने बताया कि जिस सीन में उन्हें जैकेट उतारनी थी, उसके पीछे भी एक इंटेंशन था. ऐसे में उन्होंने सिर्फ सीन को बोल्ड बनाने के बजाय उसे किरदार और कहानी के हिसाब से निभाने की कोशिश की. एक्ट्रेस के मुताबिक, इस तरह के सीन्स में सबसे जरूरी चीज होती है कि एक्टर खुद को सुरक्षित और सहज महसूस करे. अगर सेट पर माहौल ठीक हो तो कलाकार के लिए ऐसे सीन्स करना आसान हो जाता है.
‘डायरेक्टर ने मुझे बहुत कंफर्टेबल फील कराया’
खुशी दुबे ने इस बातचीत में अपनी शूटिंग प्रक्रिया के बारे में भी डिटेल में बताया. उन्होंने कहा कि ‘सर्विस गर्ल’ के डायरेक्टर ने उन्हें ऐसे सीन्स के दौरान काफी कंफर्टेबल महसूस कराया. एक्ट्रेस के मुताबिक, शूटिंग के दौरान सेट पर ज्यादा लोगों को मौजूद नहीं रखा गया. जब सीन शूट किया जाता था तो बाकी लोग वहां से चले जाते थे. खुशी ने बताया कि उस समय कमरे में सिर्फ डायरेक्टर, DOP यानी डायरेक्टर ऑफ फोटोग्राफी और वो खुद मौजूद रहती थीं. इस तरह की व्यवस्था इसलिए की गई थी ताकि उन्हें किसी तरह की झिझक या असहजता महसूस न हो और वो अपने किरदार पर पूरी तरह ध्यान दे सकें. उन्होंने कहा कि टीम ने ये तय किया कि सीन को एस्थेटिक तरीके से शूट किया जाए और वह स्क्रीन पर जरूरत से ज्यादा अश्लील न लगे.
‘सीन को रियलिस्टिक बनाने की कोशिश की’
खुशी ने बताया कि ऐसे सीन्स को शूट करते समय टीम का फोकस सिर्फ बोल्डनेस पर नहीं था. कोशिश ये थी कि सीन कहानी का हिस्सा लगे और स्क्रीन पर रियल दिखाई दे. उनके मुताबिक, सीन को एस्थेटिक और रियलिस्टिक तरीके से शूट करने की कोशिश की गई. कैमरा एंगल, लाइटिंग और शूटिंग के तरीके पर भी ध्यान दिया गया, ताकि सीन की जरूरत पूरी हो लेकिन वो ज्यादा रिवीलिंग न लगे.
क्या कभी खुशी के साथ हुई बदतमीजी?
इंटरव्यू के दौरान खुशी दुबे से ये भी पूछा गया कि क्या कभी उनके साथ काम के दौरान किसी ने बदतमीजी की है? इस सवाल पर एक्ट्रेस ने बताया कि उन्हें सोशल मीडिया यूजर्स की तरफ से अश्लील मैसेज जरूर मिलते हैं. खुशी ने कहा कि सोशल मीडिया पर कई बार उन्हें ऐसे मैसेज आते हैं, जिन्हें पढ़ना भी असहज कर देने वाला होता है. हालांकि, उन्होंने ये भी बताया कि वो अब तक कास्टिंग काउच का शिकार होने से बची हैं.
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आईआईएम अहमदाबाद का नेतृत्व निर्माण पर फोकस उसे नई लीडरशिप अकादमी के लिए स्वाभाविक साझेदार बनाता है: परिधि अदाणी
अहमदाबाद, 10 अगस्त (आईएएनएस)। देशभर में लीडर्स को विकसित करने के आईआईएम अहमदाबाद के रिकॉर्ड ने उसे सायरिल अमरचंद मंगलदास के लिए सायरिल श्रोफ-आईआईएमए जीसी लीडरशिप अकादमी की स्थापना में स्वाभाविक साझेदार बना दिया है। यह बयान प्रतिष्ठित लॉ फर्म में पार्टनर और गुजरात प्रमुख परिधि अदाणी ने सोमवार को दिया।
परिधि अदाणी ने कहा कि यह सहयोग विशेष रूप से महत्वपूर्ण था, क्योंकि आईआईएम अहमदाबाद ने पारंपरिक कानूनी शिक्षा से आगे बढ़कर अर्थव्यवस्था और उद्यमों में कानून तथा वकीलों की व्यापक भूमिका का अध्ययन किया है।
उन्होंने आईएएनएस से कहा, “मुझे लगता है कि आईआईएम अहमदाबाद का चुनाव स्वाभाविक था। यह ऐसा संस्थान है जो संस्थान निर्माण और देश के इतने सारे लीडर्स को विकसित करने के लिए जाना जाता है और हम इस बात से हैरान थे कि उन्होंने इस विचार को कितनी खुले दिल से स्वीकार किया।”
परिधि अदाणी ने कहा, “जिन निदेशक और प्रोफेसरों के साथ हम पिछले कुछ महीनों से सहयोग कर रहे हैं, उन्होंने इस पहल के लिए अपना समय, ऊर्जा, प्रयास और दृष्टिकोण पूरी प्रतिबद्धता के साथ दिया है।”
उनके अनुसार, अकादमी उन क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करेगी जिनसे कानूनी पेशेवरों का लॉ स्कूल या पारंपरिक कानूनी प्रैक्टिस में नियमित रूप से सामना नहीं होता। इनमें नीति और प्रौद्योगिकी का मेल, मानव व्यवहार तथा व्यवसायों और व्यापक अर्थव्यवस्था से जुड़े अन्य सिद्धांत शामिल हैं।
लॉ फर्म सायरिल अमरचंद मंगलदास के मैनेजिंग पार्टनर सायरिल श्रोफ और भारतीय प्रबंधन संस्थान अहमदाबाद ने संयुक्त रूप से सायरिल श्रोफ-आईआईएमए जीसी लीडरशिप अकादमी की स्थापना की है। इसका उद्देश्य आधुनिक दौर के जनरल काउंसल के लिए तैयारी करना है, जिन्हें पारंपरिक कानूनी सलाह देने की भूमिका से आगे बढ़कर आधुनिक उद्यमों के विभिन्न प्रबंधकीय पहलुओं की जिम्मेदारी संभालनी होती है।
आधिकारिक बयान के अनुसार, इस अकादमी की स्थापना सायरिल श्रोफ और श्रोफ परिवार की व्यक्तिगत परोपकारी प्रतिबद्धता के माध्यम से की गई है।
--आईएएनएस
एबीएस
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