विदेशी निवेशकों का भारतीय बाजार से मोहभंग? बेचे ₹1.75 लाख करोड़ के शेयर
विदेशी निवेशक भारतीय बाजार से अपना मुंह फेरते नजर आए हैं। आंकड़े बताते हैं कि 2026 में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने 1,75,089 करोड़ रुपये के शेयर बेच दिए।
नीति आयोग का पुनर्गठन: अशोक लाहिड़ी बने नए उपाध्यक्ष, IISER भोपाल के वैज्ञानिक गोबर्धन दास सदस्य नामित
नई दिल्ली। अर्थशास्त्री अशोक लाहिड़ी और वैज्ञानिक गोबर्धन दास को नीति आयोग में शामिल किया गया है। सूत्रों के अनुसार, अशोक लाहिड़ी को नीति आयोग का उपाध्यक्ष बनाया जाएगा। जबकि, गोबर्धन दास को आयोग में सदस्य के रूप में नियुक्त किया जाने वाला है। दोनों ही विशेषज्ञ पश्चिम बंगाल से संबंध रखते हैं। इन नियुक्तियों को नीति निर्माण के लिए अहम माना जा रहा है। सरकार का मानना है कि इनका अनुभव देश के विकास में सहायक होगा। यह बदलाव नीति आयोग को और मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
लाहिड़ी का वित्तीय प्रबंधन में गहरा अनुभव
अशोक लाहिड़ी देश के जाने-माने अर्थशास्त्री हैं। वे पहले भारत सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार रह चुके हैं। इसके अलावा, वे 15वें वित्त आयोग के सदस्य भी रहे हैं। उनका आर्थिक नीतियों और वित्तीय प्रबंधन में गहरा अनुभव है। नीति आयोग में उनकी नियुक्ति से आर्थिक सुधारों को नई दिशा मिल सकती है। वे देश की आर्थिक रणनीतियों को बेहतर बनाने में योगदान देंगे। सरकार को उनसे महत्वपूर्ण नीतिगत सुझावों की उम्मीद है। उनकी विशेषज्ञता आर्थिक निर्णयों को और प्रभावी बनाएगी।
गोबर्धन दास का वैज्ञानिक क्षेत्र में अनुभव
गोबर्धन दास एक प्रतिष्ठित वैज्ञानिक हैं। वर्तमान में वे आईआईएसईआर भोपाल के निदेशक के रूप में कार्यरत हैं। इससे पहले वे जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में प्रोफेसर थे। उन्होंने स्पेशल सेंटर फॉर मॉलिक्यूलर मेडिसिन में चेयर के रूप में भी काम किया है। उनका शोध कार्य विज्ञान और चिकित्सा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण रहा है। नीति आयोग में उनका जुड़ना वैज्ञानिक दृष्टिकोण को मजबूत करेगा। वे नवाचार और रिसर्च आधारित नीतियों को बढ़ावा देंगे। उनकी भूमिका विज्ञान और तकनीक से जुड़े फैसलों में अहम होगी।
नीति आयोग के लिए अहम हैं ये नियुक्तियां
नीति आयोग देश का प्रमुख नीति-निर्माण संस्थान है। यह सरकार को विभिन्न क्षेत्रों में सुझाव देने का काम करता है। अशोक लाहिड़ी और गोबर्धन दास जैसे विशेषज्ञों का जुड़ना इसकी क्षमता बढ़ाएगा। एक ओर जहां आर्थिक दृष्टिकोण मजबूत होगा, वहीं वैज्ञानिक सोच को भी बढ़ावा मिलेगा। इन दोनों की नियुक्ति से संतुलित और प्रभावी नीतियां बन सकेंगी। देश के विकास कार्यक्रमों में नई दिशा देखने को मिल सकती है। सरकार इन नियुक्तियों के जरिए विशेषज्ञता को प्राथमिकता दे रही है। आने वाले समय में इनके योगदान के सकारात्मक परिणाम सामने आ सकते हैं।
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