अब घर के कोने-कोने में पकड़ेगा नेटवर्क! ट्राई ने पहली बार शुरू किया ऐसा काम, इमारतों में लगाए जाएंगे ताकतवर बैंड
Mobile Network Connection : मकानों के अंदर मोबाइल नेटवर्क को सुधारने के लिए दूरसंचार नियामक ट्राई ने बड़ी तैयारी कर ली है. ट्राई ने कहा है कि भवनों के अंदर ज्यादा ताकतवर बैंड लगाए जाएंगे, ताकि घर के कोने-कोने में नेटवर्क को बेहतर बनाया जा सके.
यूक्रेन की फ्रंटलाइन पर ओलेक्सी:बम धमाके, मिसाइलें और गोलियां भी नहीं रोक पाईं, सरहद तक चिट्ठियां-पार्सल पहुंचा रहे पोस्टमैन ओलेक्सी
आसमान से कब मिसाइल गिर जाए, कोई नहीं जानता। ऐसे खतरे के बीच 37 साल के पोस्टमैन ओलेक्सी क्लोचकोवस्की रोज ट्रक लेकर निकलते हैं। वे सैनिक नहीं हैं, बल्कि प्राइवेट पोस्टल सर्विस ‘नोवा पोष्टा’ के ड्राइवर हैं। पिछले चार साल से वे उन इलाकों में पार्सल पहुंचा रहे हैं, जहां जाने से कई बार सेना भी बचती है। रूसी हमलों में उनके तीन ट्रक जल चुके हैं, लेकिन उनके चेहरे की मुस्कान आज भी बरकरार है। ओलेक्सी ट्रक चलाते वक्त संगीत नहीं सुनते। उनके दाएं कान में सिर्फ फोन कॉल के लिए ईयरफोन रहता है, जबकि बायां कान हमेशा खुला रखते हैं। वे कहते हैं, ‘ड्रोन की आवाज सुनना जरूरी है।’ पिछली गर्मियों में इसी सावधानी की वजह से उनकी जान बच पाई। उन्होंने ड्रोन की आवाज सुनी और तुरंत ट्रक रोक दिया। कुछ ही सेकंड बाद ड्रोन उनके सामने फट गया। वे बताते हैं कि अगर उस वक्त म्यूजिक चल रहा होता, तो शायद वे जिंदा नहीं होते। ओलेक्सी को हर माह करीब 450 डॉलर (लगभग 38 हजार रुपए) मिलते हैं, लेकिन वे इसे सिर्फ नौकरी नहीं मानते। उनके ट्रक में दरवाजे के पास हमेशा ट्रॉमा किट रखी होती है, जिसमें खून रोकने की दवाएं और पेनकिलर मौजूद रहते हैं। डर लगता है, पर रुकना मुमकिन नहीं लगातार बमबारी के तनाव ने ओलेक्सी को कई बार तोड़ा भी है। पिछले साल उन्हें हल्का स्ट्रोक आया था, लेकिन अस्पताल से निकलते ही वे फिर काम पर लौट आए। वे कहते हैं, ‘हम स्टील के नहीं बने हैं, डर सबको लगता है। लेकिन अगर मैं यह काम नहीं करूंगा, तो शायद कोई और भी नहीं करेगा। ड्राइविंग ही मेरी जिंदगी है।’ जब भी हवा में सायरन गूंजता है, ओलेक्सी सबसे पहले अपनी बुजुर्ग मां को फोन करते हैं। मां को अब इसकी आदत हो गई है। उन्हें पता है कि उनका बेटा उस जगह है, जहां जिंदगी और मौत के बीच सिर्फ एक ‘ट्रक’ का फासला है। जंग के बीच लोगों के लिए ‘लाइफलाइन’ बना डाकिया ओलेक्सी जंग से तबाह इलाकों में जब दुकानें बंद हो जाती हैं और जिंदगी ठहर जाती है, तब नोवा पोष्टा की शाखाएं ही उम्मीद की एकमात्र जगह बनती हैं। 2022 से अब तक ड्यूटी के दौरान कंपनी के 16 कर्मचारी मारे जा चुके हैं और 400 से ज्यादा ऑफिस तबाह हो चुके हैं। फिर भी लोग यहां पार्सल लेने, फोन चार्ज करने और अपने परिवार को यह बताने आते हैं कि वे अभी जिंदा हैं।
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