भारत ने श्रीलंका को मानवीय सहायता के तहत मेडिकल यूनिट क्यूब और सैन्य सहयोग प्रदान किया
कोलंबो, 24 अप्रैल (आईएएनएस)। भारत ने अपने निरंतर मानवीय सहयोग के तहत शुक्रवार को श्रीलंका को दो बीएचआईएसएम (भारत हेल्थ इनिशिएटिव फॉर सहयोग हित और मैत्री) क्यूब सौंपे। यह कदम भारत की ‘आरोग्य मैत्री’ पहल के तहत उठाया गया है।
ये आधुनिक पोर्टेबल मेडिकल यूनिट हैं, जिनमें एक साथ करीब 200 आपातकालीन मामलों को संभालने की क्षमता है। इनमें जरूरी दवाइयां और छोटे ऑपरेशन के लिए सर्जिकल उपकरण भी मौजूद हैं, ताकि तुरंत इलाज दिया जा सके।
इसके साथ ही भारत अपनी समुद्री सुरक्षा सहयोग को और मजबूत करते हुए श्रीलंका नौसेना को 50,000 राउंड नौ मिमी गोलियां भी सौंपेगा।
ये मेडिकल यूनिट भारतीय नौसेना के जहाज आईएनएस निरीक्षक के जरिए पहुंचाई गईं, जो 21 अप्रैल को कोलंबो बंदरगाह पर पहुंचा था। यह जहाज चौथे द्विपक्षीय डाइविंग अभ्यास में हिस्सा लेने आया है, जो 27 अप्रैल तक चलेगा। आईएनएस निरीक्षक भारतीय नौसेना का एक डाइविंग सपोर्ट और सबमरीन रेस्क्यू जहाज है।
भारतीय नौसेना के अनुसार, इन-एसएलएन डाइविंग एक्सरसाइज भारत और श्रीलंका के बीच गहरे समुद्री सहयोग का एक अहम हिस्सा है। यह दोनों देशों की साझेदारी, भरोसे और मिलकर काम करने की भावना को दिखाता है। यह सहयोग हिंद महासागर क्षेत्र में स्थिरता, आपसी विकास और सुरक्षा को बढ़ावा देने के लक्ष्य से किया जा रहा है, जिसे महासागर (क्षेत्रों में सुरक्षा और विकास के लिए आपसी और समग्र उन्नति) विजन के तहत आगे बढ़ाया जा रहा है।
कोलंबो में चल रही यह एक्सरसाइज दोनों देशों के बीच मजबूत समुद्री सहयोग और पेशेवर तालमेल को और मजबूत कर रही है।
भारतीय नौसेना के प्रवक्ता ने कहा कि समुद्र के नीचे किए गए मिक्स्ड-गैस डाइव्स में दोनों देशों के गोताखोरों ने बेहतरीन तालमेल, कौशल और सटीकता दिखाई।
इसके अलावा, गोताखोरों ने डाइविंग के बाद एक दोस्ताना वॉलीबॉल मैच भी खेला। साथ ही दोनों देशों के गोताखोरों ने मिलकर बीच की सफाई भी की, जिससे समुद्र और तटों को साफ रखने का संदेश दिया गया।
--आईएएनएस
एवाई/एबीएम
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AI Driven Traffic Control: इस शहर में अब AI संभालेगा ट्रैफिक, स्मार्ट सिग्नल खुद तय करेंगे कब होगी लाल बत्ती
AI Driven Traffic Control: भारत के प्रमुख शहरों में से एक अहमदाबाद अब तकनीक के मामले में एक कदम और आगे बढ़ गया है. शहर की सड़कों पर हर दिन बढ़ते ट्रैफिक और सिग्नलों पर लगने वाले लंबे जाम से आम जनता को राहत दिलाने के लिए प्रशासन ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई का सहारा लिया है. अब गुजरात के अहमदाबाद की सड़कों पर ट्रैफिक लाइटें किसी तय समय के हिसाब से नहीं, बल्कि सड़क पर मौजूद गाड़ियों की संख्या को देखकर बदलेंगी. इस नई पहल का मकसद ट्रैफिक को पूरी तरह से सुव्यवस्थित करना और लोगों के सफर को पहले से कहीं ज्यादा आसान और तेज बनाना है.
स्मार्ट तकनीक से जाम का खात्मा
अहमदाबाद शहर ने अपनी ट्रैफिक व्यवस्था को आधुनिक बनाने की दिशा में यह बड़ी शुरुआत की है. शहर के सबसे व्यस्त और भीड़भाड़ वाले इलाकों में अक्सर देखा जाता था कि लोग सिग्नल पर घंटों फंसे रहते थे. इस समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए एआई आधारित ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम को जमीन पर उतारा गया है. एक पायलट प्रोजेक्ट के तहत अभी शहर के दस सबसे महत्वपूर्ण चौराहों पर यह सिस्टम लगाया गया है. इस तकनीक के आने से अब चौराहों पर बेवजह रुकने की जरूरत नहीं पड़ेगी, क्योंकि सिस्टम खुद तय करेगा कि किस तरफ की सड़क को पहले खोलना है.
क्या है एडैप्टिव ट्रैफिक कंट्रोल सिस्टम?
इस पूरी व्यवस्था के पीछे जो सबसे बड़ी तकनीक काम कर रही है, उसे एडैप्टिव ट्रैफिक कंट्रोल सिस्टम यानी एटीसीएस कहा जाता है. यह पुराने ट्रैफिक सिग्नल से बिल्कुल अलग है. पुराने सिस्टम में लाइट के जलने और बुझने का समय पहले से ही तय होता था, चाहे सड़क पर गाड़ियां हों या न हों. लेकिन एटीसीएस एक स्मार्ट सिस्टम है जो हर पल बदलती ट्रैफिक की स्थिति को भांप लेता है. यह सड़क पर मौजूद वाहनों की कतारों को देखता है और वास्तविक समय की जानकारी के आधार पर सिग्नल के समय को घटाता या बढ़ाता रहता है.
कैमरे और सेंसर की जुगलबंदी
यह नया एआई सिस्टम आधुनिक कैमरों और सेंसर के एक बड़े नेटवर्क की मदद से काम करता है. चौराहों पर लगे ये खास उपकरण लगातार सड़क की निगरानी करते हैं. ये सेंसर इस बात का पता लगाते हैं कि किस लेन में कितनी गाड़ियां खड़ी हैं और उनकी रफ्तार क्या है. कैमरों से मिलने वाली तस्वीरें और डाटा सीधे कंट्रोल रूम तक पहुंचते हैं, जहां एआई सॉफ्टवेयर इस बात का विश्लेषण करता है कि किस तरफ का ट्रैफिक ज्यादा भारी है. इसी सटीक जानकारी के आधार पर सिस्टम हरी बत्ती का समय तय करता है, जिससे ज्यादा भीड़ वाली सड़क को प्राथमिकता मिलती है.
कैसे काम करता है यह नया सिस्टम?
इस सिस्टम की सबसे खास बात इसकी फुर्ती और सटीक निर्णय लेने की क्षमता है. उदाहरण के लिए, अगर किसी सिग्नल का अधिकतम समय पचास सेकंड तय किया गया है, लेकिन सड़क का ट्रैफिक सिर्फ बीस सेकंड में ही खाली हो जाता है, तो एआई तुरंत उस सिग्नल को बंद कर देता है. बचा हुआ समय उस दूसरी सड़क को दे दिया जाता है जहां वाहनों की लंबी कतार लगी होती है. इससे खाली सड़क पर लोगों को लाल बत्ती का इंतजार नहीं करना पड़ता और जाम वाली जगह पर गाड़ियां जल्दी निकल जाती हैं. यह पूरी प्रक्रिया ऑटोमेटिक होती है, जिससे ट्रैफिक का प्रवाह बिना किसी रुकावट के बना रहता है.
भविष्य की राह और फायदे
अहमदाबाद में शुरू किया गया यह प्रयोग आने वाले समय में पूरे शहर के लिए गेम चेंजर साबित हो सकता है. इससे न केवल लोगों के समय की बचत हो रही है, बल्कि सिग्नल पर गाड़ियों के खड़े रहने से होने वाले प्रदूषण और ईंधन की खपत में भी कमी आ रही है. अगर यह पायलट प्रोजेक्ट पूरी तरह सफल रहता है, तो प्रशासन इसे पूरे शहर के अन्य चौराहों पर भी लागू करने की योजना बना रहा है. तकनीक के इस बेहतर इस्तेमाल से अहमदाबाद अब एक स्मार्ट और जाम मुक्त शहर बनने की राह पर तेजी से अग्रसर है.
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