पाकिस्तान में सड़कों पर क्यों उतरे किसान? प्रेस क्लब के बाहर प्रदर्शन कर जलाई 500 किलो फसल
Pakistani Farmers: भारत के पड़ोसी देश पाकिस्तान में आम आवाम के साथ किसान भी परेशान हैं. अपनी मांगों को लेकर किसान सड़क पर उतर आए हैं. पाकिस्तान के स्वाबी में तंबाकू किसानों ने फसल की कम कीमत मिलने के विरोध में प्रदर्शन किया. किसानों ने राजनीतिक और सामाजिक संगठनों के साथ मिलकर स्वाबी प्रेस क्लब के बाहर प्रदर्शन किया और अपनी नाराजगी जताई.
पाकिस्तान के किसानों का कहना है कि पाकिस्तान तंबाकू बोर्ड ने तंबाकू की कीमत 750 पाकिस्तानी रुपये प्रति किलो तय की है, लेकिन उन्हें बाजार में करीब 350 रुपये प्रति किलो के हिसाब से फसल बेचने के लिए मजबूर किया जा रहा है. इससे किसानों को भारी नुकसान हो रहा है.
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500 किलो फसल में लगाई आग
विरोध के दौरान स्थानीय तंबाकू किसान और एएनपी के पूर्व जिला महासचिव हाजी तमीज खान ने प्रेस क्लब के बाहर करीब 500 किलो तंबाकू के बंडलों में आग लगा दी. किसानों ने सरकार से तय कीमत के मुताबिक उनकी फसल खरीदने और उन्हें उचित दाम दिलाने की मांग की. कहा कि आज मैंने तंबाकू नहीं जलाया; मैंने अपने बच्चों का खून, उनकी जरूरतें और अपने घर की आवश्यक वस्तुएं जलाई हैं. उन्होंने बताया कि पिछले साल तंबाकू उत्पादकों को पहले ही भारी नुकसान हुआ था और वे कर्ज में डूब चुके थे.
تمباکو کاشتکاروں نے تمباکو کی کم نرخ اور ٹیکسوں کے خلاف صوابی پریس کلب کے سامنے احتجاج کیا اور تمباکو کاشتکار تمریز خان نے 500کلوگرام تمباکو کے بنڈلز نذر آتش کردئیے۔@geonews_urdu @HamidMirPAK @HammadHassan30 @gnnhdofficial @ARYNEWSOFFICIAL @DunyaNews @SaleemKhanSafi @Dawn_News pic.twitter.com/p49cRL52Ol
— Swabi Digital News (@SwabiDigital) August 9, 2026
लकड़ी सप्लायरों और मजदूरों का लाखों का कर्ज
एक्सप्रेस ट्रिब्यून के मुताबिक, किसानों पर इस सीजन में लकड़ी सप्लायरों और मजदूरों का लाखों रुपये का कर्ज है. अब उन्हें चिंता है कि कम कीमत पर फसल बेचने के बाद वे यह कर्ज कैसे चुकाएंगे. तंबाकू किसान तमीज खान ने बताया कि एक किलो तंबाकू उगाने में करीब 750 पाकिस्तानी रुपये का खर्च आता है, जबकि खरीदार इसके लिए सिर्फ 350 रुपये प्रति किलो देने को तैयार हैं. उनका कहना है कि इतनी कम कीमत पर फसल बेचने से किसानों को भारी नुकसान होगा. इसी वजह से उन्होंने काम बंद करने और अपनी फसल जलाने का फैसला किया.
कंपनियां अरबों कमाती हैं लेकिन...
तमीज खान ने कहा कि तंबाकू का इस्तेमाल सिगरेट बनाने में होता है और इस कारोबार से कंपनियां अरबों रुपये कमाती हैं, लेकिन किसानों को अपनी फसल की सही कीमत के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर तंबाकू कंपनियों ने किसानों को उचित दाम नहीं दिया, तो आने वाले दिनों में और किसान भी इसी तरह विरोध कर सकते हैं.
तमीज खान ने किसानों की समस्या का समाधान नहीं करने के लिए पाकिस्तान तंबाकू बोर्ड और बड़ी तंबाकू कंपनियों को जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने कहा कि बोर्ड को इस मामले में दखल देना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि कंपनियां किसानों से तंबाकू की खरीद सरकार की तय कीमत पर ही करें.
स्वाबी की प्रमुख नकदी फसलों में एक है तंबाकू
नेशनल अवामी पार्टी के जिला अध्यक्ष मसूद जब्बार ने कहा कि तंबाकू स्वाबी की प्रमुख नकदी फसलों में से एक है और यहां के किसानों की आर्थिक स्थिति बेहतर होगी तो इसका फायदा पूरे देश की अर्थव्यवस्था को मिलेगा. एक्सप्रेस ट्रिब्यून के मुताबिक, उन्होंने चेतावनी दी कि अगर तंबाकू किसानों की समस्याओं का जल्द समाधान नहीं किया गया, तो आंदोलन को और बड़ा किया जाएगा. उन्होंने कहा कि आगे होने वाले प्रदर्शनों में पूरे जिले के किसानों के शामिल होने की संभावना है.
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कौन हैं JPSC के पूर्व चेयरमैन एल. खियांग्ते? जानें पहले भी किन विवादों से रहा है नाता
झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) के पूर्व चेयरमैन एल. खियांग्ते की गिरफ्तारी के बाद आयोग की भर्ती परीक्षाओं को लेकर चल रहा विवाद एक बार फिर सुर्खियों में है. CID ने उन्हें 14वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में कथित अनियमितताओं की जांच के सिलसिले में गिरफ्तार किया है. उनकी गिरफ्तारी ऐसे समय हुई है, जब परीक्षा को लेकर अभ्यर्थी लंबे समय से सवाल उठा रहे हैं.
इन विवादों से जुड़ चुका नाम?
14वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा के परिणाम सामने आने के बाद कई अभ्यर्थियों ने परीक्षा प्रक्रिया में गड़बड़ी के आरोप लगाए थे. आरोपों में OMR शीट से छेड़छाड़, कुछ परीक्षा केंद्रों पर कथित तौर पर अनुचित लाभ पहुंचाने और परीक्षा से जुड़ी व्यवस्थाओं में अनियमितता जैसे मुद्दे शामिल रहे.
विवाद बढ़ने के बाद CID ने मामले की जांच शुरू की. जांच के दौरान JPSC मुख्यालय समेत कई स्थानों पर छापेमारी की गई और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों तथा परीक्षा से जुड़े दस्तावेजों की जांच की गई.
कौन हैं एल. खियांग्ते?
एल. खियांग्ते यानी लाल बियाकतुलुआंगा खियांग्ते देश के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों में गिने जाते रहे हैं. वह मिजोरम के आदिवासी समुदाय से आते हैं. उन्होंने इतिहास विषय से स्नातक की पढ़ाई की और वर्ष 1987 में संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा पास की.
वर्ष 1988 बैच के IAS अधिकारी के रूप में उन्होंने बिहार-झारखंड कैडर में करीब 36 वर्षों तक प्रशासनिक सेवाएं दीं. अपने लंबे करियर में उन्होंने राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी और प्रशासनिक प्रशिक्षण संस्थान के महानिदेशक सहित कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं.
मुख्य सचिव से JPSC चेयरमैन तक का सफर
सेवानिवृत्ति से पहले खियांग्ते झारखंड के मुख्य सचिव जैसे महत्वपूर्ण पद पर भी रह चुके थे. फरवरी 2025 में सेवानिवृत्ति के बाद उन्हें झारखंड लोक सेवा आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किया गया.
हालांकि, उनके कार्यकाल में JPSC की कई भर्ती परीक्षाओं को लेकर विवाद सामने आए. खासतौर पर 14वीं सिविल सेवा परीक्षा को लेकर अभ्यर्थियों के आरोपों ने आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए.
परीक्षा विवाद के बीच दिया इस्तीफा
परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर विरोध बढ़ने के बीच एल. खियांग्ते ने जुलाई 2026 में JPSC अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया. उनका इस्तीफा ऐसे समय आया, जब अभ्यर्थी परीक्षा प्रक्रिया की निष्पक्षता और परिणाम को लेकर आंदोलन कर रहे थे.
इसके बाद CID की जांच और तेज हुई. जांच के दायरे में आयोग से जुड़े अधिकारियों, कर्मचारियों और परीक्षा प्रक्रिया में शामिल बाहरी एजेंसियों की भूमिका भी आई.
कई भर्ती परीक्षाओं पर पड़ा असर
जांच के दौरान सामने आए तथ्यों के बाद आयोग की कुछ अन्य भर्ती परीक्षाओं को भी स्थगित या रद्द करना पड़ा. इससे अभ्यर्थियों की चिंताएं और बढ़ गईं. परीक्षा प्रक्रिया में शामिल आउटसोर्स एजेंसियों और कुछ अधिकारियों की भूमिका को लेकर भी जांच आगे बढ़ी.
CID ने मामले में कई आरोपियों को गिरफ्तार किया है. जांच एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि कथित गड़बड़ियों का दायरा कितना बड़ा था और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका रही.
गिरफ्तारी से बढ़ी राजनीतिक और प्रशासनिक हलचल
पूर्व चेयरमैन की गिरफ्तारी ने JPSC परीक्षा विवाद को नया मोड़ दे दिया है. रांची में बड़ी संख्या में अभ्यर्थी लगातार निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं.
अब जांच का अहम सवाल यही है कि 14वीं JPSC परीक्षा में कथित अनियमितताएं किस स्तर तक पहुंची थीं और क्या आयोग के शीर्ष स्तर तक इसकी जानकारी या भूमिका थी. CID की आगे की जांच और अदालत में पेश होने वाले साक्ष्य ही इस पूरे मामले की तस्वीर को स्पष्ट करेंगे.
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