मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का प्रदेशवासियों के नाम संबोधन, किसानों को दिए कई बड़े तोहफे, कहा – ‘मुझे यह बताते हुए प्रसन्नता….’
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेश के किसानों के लिए कई बड़ी घोषणा की है। दरअसल उन्होंने कहा है कि राज्य सरकार किसानों की आय बढ़ाने और खेती को मजबूत बनाने के लिए लगातार काम कर रही है। इसी दिशा में इस साल को ‘किसान कल्याण वर्ष’ के रूप में मनाने का फैसला लिया गया है और कई नई योजनाओं पर काम शुरू किया गया है। दरअसल मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा है कि प्रदेश में इस बार गेहूं का उत्पादन काफी अच्छा हुआ है। इसी को देखते हुए केंद्र सरकार से खरीदी सीमा बढ़ाने का आग्रह किया गया था।
दरअसल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बताया कि अब समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी का लक्ष्य 78 लाख मीट्रिक टन से बढ़ाकर 100 लाख मीट्रिक टन कर दिया गया है। साथ ही मुख्यमंत्री ने इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार का आभार भी जताया है।
किसानों के लिए राहत
वहीं मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में अब सभी छोटे-बड़े किसान समर्थन मूल्य पर गेहूं बेचने के लिए स्लॉट बुकिंग कर सकते हैं। सरकार ने स्लॉट बुकिंग की तारीख भी बढ़ा दी है ताकि किसी किसान को परेशानी न हो। बता दें कि पहले यह प्रक्रिया 20 अप्रैल तक तय थी, लेकिन अब इसे 9 मई तक बढ़ा दिया गया है। इसके अलावा गेहूं खरीदी की प्रक्रिया को भी और आसान बनाया गया है। अब सप्ताह में छह दिन खरीदी होगी और शनिवार को भी उपार्जन केंद्र खुले रहेंगे। इससे किसानों को लंबी लाइन या इंतजार जैसी समस्याओं से राहत मिलने की उम्मीद है।
स्लॉट बुकिंग की अवधि को और आगे बढ़ाया
इसके साथ ही मुख्यमंत्री मोहन यादव ने यह भी कहा है कि अगर जरूरत पड़ी तो स्लॉट बुकिंग की अवधि को और आगे बढ़ाया जा सकता है। सरकार की कोशिश है कि प्रदेश के हर किसान को समय पर अपनी फसल बेचने का मौका मिले और उसे पूरा दाम भी मिल सके। दरअसल उन्होंने भूमि अधिग्रहण से जुड़े एक फैसले का भी जिक्र किया। अब किसानों को जमीन के बदले पहले से ज्यादा मुआवजा मिलेगा, जो चार गुना तक हो सकता है। सरकार का मानना है कि इससे किसानों के अधिकार सुरक्षित होंगे और उनका भविष्य भी मजबूत होगा।
उड़द और सरसों पर खास योजना लागू की गई
दरअसल मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि ‘सरकार खेती के साथ-साथ पशुपालन और अन्य गतिविधियों को भी बढ़ावा दे रही है ताकि किसानों की आमदनी के नए रास्ते खुल सकें। वहीं प्रदेश में दलहन और तिलहन की खेती को बढ़ावा देने के लिए उड़द और सरसों पर खास योजना लागू की गई है। उड़द की फसल को समर्थन मूल्य पर खरीदा जाएगा और इसके अलावा किसानों को 600 रुपये प्रति क्विंटल का बोनस भी दिया जाएगा। इसी तरह सरसों की फसल पर भावांतर योजना लागू होने से बाजार में किसानों को बेहतर कीमत मिल रही है।
बिजली व्यवस्था को लेकर भी बड़ा फैसला लिया गया
इसके साथ ही सरकार ने बिजली व्यवस्था को लेकर भी बड़ा फैसला लिया है। दरअसल किसान कल्याण वर्ष के तहत किसानों को सिर्फ 5 रुपये में बिजली कनेक्शन देने की योजना शुरू की गई है। साथ ही भविष्य में सिंचाई के लिए दिन में बिजली उपलब्ध कराने की दिशा में भी काम किया जा रहा है। इसके अलावा ‘कृषक मित्र योजना’ के तहत किसानों को 90 प्रतिशत सब्सिडी पर सोलर पंप देने की योजना भी लागू की गई है। इससे बिजली खर्च कम होगा और किसान अपनी सिंचाई जरूरतें आसानी से पूरी कर सकेंगे।
वहीं मुख्यमंत्री मोहन यादव ने दुग्ध उत्पादन को बढ़ाने की दिशा में उठाए गए कदमों की भी जानकारी दी। प्रदेश में 1752 नई दुग्ध समितियां बनाई गई हैं और रोजाना दूध संग्रहण 10 लाख किलोग्राम से ज्यादा हो गया है। सरकार का लक्ष्य मध्य प्रदेश को भविष्य में देश का ‘मिल्क कैपिटल’ बनाना है।
भारत-उज्बेकिस्तान सैन्य अभ्यास ‘डस्टलिक’ का सफल समापन, बढ़ी आपसी तालमेल और ताकत
नई दिल्ली, 24 अप्रैल (आईएएनएस)। भारत और उज्बेकिस्तान के बीच होने वाला सातवां संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘डस्टलिक’ शुक्रवार को नामंगन के गुरुमसराय फील्ड ट्रेनिंग एरिया में फाइनल वैलिडेशन एक्सरसाइज और क्लोजिंग सेरेमनी के साथ खत्म हुआ।
भारतीय रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, इस अभ्यास ने दोनों देशों की सेनाओं के बीच सहयोग को मजबूत किया और साथ मिलकर काम करने की क्षमता को बेहतर बनाया।
इस अभ्यास से संयुक्त ऑपरेशन के लिए तैयारी और मजबूत हुई, खासकर गैर-कानूनी हथियारबंद समूहों को खत्म करने जैसे मिशनों के लिए। साथ ही, दोनों देशों की सेनाओं को आतंकवाद से निपटने के तरीकों और अनुभव साझा करने का मौका भी मिला। यह जानकारी भारतीय सेना के अतिरिक्त महानिदेशालय जनसंपर्क (एडीजीपीआई) ने दी।
‘डस्टलिक’ एक सालाना अभ्यास है, जो हर साल बारी-बारी से भारत और उज़्बेकिस्तान में आयोजित होता है। पिछला अभ्यास अप्रैल 2025 में पुणे के औंध स्थित फॉरेन ट्रेनिंग नोड में हुआ था।
इंडियन आर्म्ड फोर्सेज की टुकड़ी में कुल 60 सैनिक शामिल थे, जिनमें 45 भारतीय सेना के जवान (मुख्य रूप से महार रेजिमेंट की एक बटालियन से) और 15 भारतीय वायु सेना के कर्मी थे।
उज़्बेकिस्तान की तरफ से भी करीब 60 सैनिकों ने हिस्सा लिया, जिनमें उनकी सेना और वायु सेना के जवान शामिल थे।
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इस अभ्यास का मकसद सैन्य सहयोग बढ़ाना और मिलकर काम करने की क्षमता को मजबूत करना है, खासकर पहाड़ी इलाकों में संयुक्त ऑपरेशन के लिए। इसमें फिटनेस, संयुक्त योजना, सामरिक अभ्यास और विशेष हथियारों के बेसिक कौशल पर ध्यान दिया गया।
यह अभ्यास दोनों सेनाओं के कमांड और कंट्रोल सिस्टम के बीच बेहतर तालमेल बनाने में भी मदद करता है, ताकि भविष्य में संयुक्त ऑपरेशन आसानी से प्लान और किए जा सके।
डस्टलिक के दौरान दोनों देशों ने अपने-अपने अनुभव, तकनीक और ऑपरेशन के तरीके साझा किए। इससे दोनों के बीच तालमेल, समझ और साथ काम करने की क्षमता और बेहतर हुई।
इस अभ्यास ने सैनिकों के बीच दोस्ताना माहौल और आपसी भरोसा भी बढ़ाया, जिससे दोनों देशों के रिश्ते और मजबूत हुए।
समापन में 48 घंटे का एक फाइनल अभ्यास किया गया, जिसमें संयुक्त ऑपरेशन की तैयारी और क्रियान्वयन को परखा गया। इसका मकसद गैर-कानूनी हथियारबंद समूहों को खत्म करने के लिए तैयार की गई रणनीतियों को जांचना था।
--आईएएनएस
एवाई/एबीएम
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