ट्रंप से बातचीत के बाद नेतन्याहू का बड़ा बयान, ईरान पर बढ़ रहा दबाव, लेबनान संग शांति प्रक्रिया जारी
नई दिल्ली, 24 अप्रैल (आईएएनएस)। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने शुक्रवार को कहा कि वह मध्य-पूर्व की दिशा बदलने के अपने लक्ष्य में ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ हुई बातचीत का जिक्र करते हुए बताया कि ईरान पर आर्थिक और सैन्य दबाव बढ़ाया जा रहा है। साथ ही लेबनान के साथ शांति प्रक्रिया अपनाने की बात कही।
बेंजामिन नेतन्याहू ने शुक्रवार को सोशल मीडिया अकाउंट एक्स पोस्ट में लिखा, मैंने आपसे वादा किया था कि हम मध्य-पूर्व का चेहरा बदल देंगे और हम ठीक वैसा ही कर रहे हैं। सबसे पहले और सबसे जरूरी, ईरान के मामले में मेरी राष्ट्रपति ट्रंप के साथ बहुत अच्छी बातचीत हुई है। वह ईरान पर आर्थिक और सैन्य, दोनों ही तरह से बहुत कड़ा दबाव डाल रहे हैं। हम पूरी तरह से आपसी सहयोग के साथ काम कर रहे हैं।
नेतन्याहू ने बताया, हमने इजरायल और लेबनान के बीच एक ऐतिहासिक शांति स्थापित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। हमारे लिए यह बिल्कुल स्पष्ट है कि हिजबुल्लाह इसमें बाधा डालने की कोशिश कर रहा है। हम किसी भी खतरे के खिलाफ, जिसमें नए उभरते खतरे भी शामिल हैं, कार्रवाई करने की अपनी पूरी आजादी बनाए हुए हैं। हमने कल भी हमला किया था और आज भी हमला किया है। हम उत्तरी क्षेत्र के निवासियों की सुरक्षा बहाल करने के लिए पूरी तरह से दृढ़-संकल्पित हैं।
इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी इजरायल और लेबनान के बीच युद्ध विराम को तीन सप्ताह के लिए बढ़ाने की घोषणा कर चुके हैं। ट्रंप ने इसे एक ऐतिहासिक कदम बताया और वाशिंगटन में दोनों पक्षों के बीच संभावित सीधी बातचीत का संकेत दिया।
यह फैसला ओवल ऑफिस में हुई एक बैठक के बाद सामने आया, जिसमें दोनों देशों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। अमेरिका में लेबनान की राजदूत नादा हमादेह मोवाद और इजरायल के राजदूत येचिएल लीटर बैठक में शामिल थे।
इजरायली राजदूत येचिएल लीटर ने कहा कि इजरायल शांति और नागरिकों की सुरक्षा चाहता है। दोनों सरकारें एकजुट हैं और हिजबुल्लाह के प्रभाव से देश को मुक्त कराना चाहती हैं।
लेबनान की राजदूत नादा हमादेह मोवाद ने अमेरिकी समर्थन का स्वागत करते हुए कहा, आपकी मदद और समर्थन से हम लेबनान को फिर से स्थिर बना सकते हैं।
ट्रंप ने युद्धविराम के प्रयास को व्यापक क्षेत्रीय कूटनीति से जोड़ा, जिसमें ईरान से संबंधित अमेरिकी प्रयास भी शामिल हैं। उन्होंने कहा, इजरायल-लेबनान वार्ता, उन कुछ मुद्दों की तुलना में आसान होनी चाहिए जिन पर हम काम कर रहे हैं। दोनों पक्ष एक साझा खतरे के खिलाफ एकजुट हैं।
--आईएएनएस
एवाई/वीसी
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अग्निकांड में सैकड़ों परिवारों का सहारा बने धवल, खास शेल्टर्स बनाकर लोगों को लू और गर्मी से दी सुरक्षा
राजस्थान की माटी की यह पहचान रही है कि यहां के सपूतों ने न केवल युद्ध के मैदान में, बल्कि इंसानियत की जंग में एक नजीर पेश की है. इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए जोधपुर (मारवाड़) के आपदा प्रबंधन विशेषज्ञ धवल दर्जी ने उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में मिसाल पेश की है.
लखनऊ के विकास नगर में हुए उस खौफनाक अग्निकांड ने जब सैकड़ों परिवारों को सड़क पर ला दिया, तब मारवाड़ का यह बेटा अपनी टीम के साथ यहां पर लोगों की मदद करने पहुंचा.
शेल्टर्स रातों-रात खड़े किए
लखनऊ की 40 डिग्री की चिलचिलाती गर्मी और लू के थपेड़ों से लोगों को बचाने के लिए धवल दर्जी और उनकी संस्था 'ट्रू होप फाउंडेशन' (True Hope Foundation) ने पारंपरिक ढर्रे को ठुकराते हुए 100 'हीट-रेसिस्टेंट' (ताप-रोधी) शेल्टर्स रातों-रात खड़े कर दिए. यह केवल मदद नहीं थी, बल्कि जोधपुर का वह 'स्मार्ट मॉडल' था. इससे लखनऊ के बेघरों को लू और गर्मी से सुरक्षा मिली.
10x20 फीट के शेल्टर्स का निर्माण
जोधपुर के धवल ने जिन 10x20 फीट के शेल्टर्स का निर्माण किया है, वे सूरज की किरणों को रिफ्लेक्ट करने में सक्षम हैं. अंदर का तापमान बाहर की तुलना में 5 से 8 डिग्री तक कम रहता है.
हाल ही में 'डिजास्टर मैनेजमेंट हीरो अवार्ड' से उन्हें नवाजा गया है. धवल दर्जी साबित किया कि मारवाड़ का ज्ञान केवल किताबों तक सीमित नहीं, बल्कि आपदा के समय जान बचाने के काम आता है. जब लखनऊ की बस्तियों में धमाके हो रहे थे और 10 किमी दूर से धुएं का गुबार दिख रहा था. उस समय बेसहारा लोगों के लिए सहारा बने थे धवल दर्जी.
हर नागरिक के लिए गौरव की बात
विकास नगर की उस जलती हुई बस्ती में आज जोधपुर के इन युवाओं की बदौलत 'उम्मीद की सफेद चादर' बिछी हुई है. स्थानीय बुजुर्गों और महिलाओं की आखों में धवल दर्जी के लिए जो दुआएं हैं, वह राजस्थान के हर नागरिक के लिए गौरव की बात है.
क्या कहना है धवल दर्जी का?
धवल दर्जी ने कहा, "जब हम जोधपुर की गर्मी को हरा सकते हैं, तो लखनऊ के बेघरों को क्यों नहीं बचा सकते? हमारा मकसद सिर्फ राहत सामग्री बांटना नहीं, बल्कि राजस्थान की उस संस्कृति को निभाना था. ये कहती है कि 'परहित सरिस धरम नहिं भाई'."
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