Lamborghini URUS: लेम्बोर्गिनी Urus SE लिमिटेड एडिशन पेश दमदार परफॉर्मेंस और स्टाइल का परफेक्ट कॉम्बो
Lamborghini URUS: इटालियन लग्जरी कार निर्माता Lamborghini ने अपनी पॉपुलर सुपर SUV Lamborghini Urus SE का एक बेहद खास लिमिटेड एडिशन “टेटोनेरो कैप्सूल” पेश किया है। यह मॉडल एक्सक्लूसिविटी का बेहतरीन उदाहरण है, क्योंकि दुनियाभर में इसकी सिर्फ 60 यूनिट्स ही बनाई जाएंगी। इसे Milan Design Week 2026 में पहली बार शोकेस किया गया था और इसे अब तक के सबसे ज्यादा कस्टमाइजेबल Urus मॉडल्स में से एक माना जा रहा है।
डिजाइन और कस्टमाइजेशन
Urus SE टेटोनेरो कैप्सूल का लुक पूरी तरह ब्लैक-थीम पर आधारित है। इसमें ग्लॉसी ब्लैक Tettonero रूफ और डार्क एक्सटीरियर फिनिश दिया गया है, जो इसे एक अग्रेसिव और प्रीमियम अपील देता है। खास बात यह है कि इसे 6 एक्सटीरियर कलर ऑप्शंस—वियोला पैसिफे, वर्डे मरकुरियस, बियान्को लेडा, अरानचियो ड्रायोप, गियालो क्वेरकस और वर्डे वाइपर—के साथ पेश किया गया है, जिससे शानदार कलर कॉन्ट्रास्ट देखने को मिलता है।
केबिन और इंटीरियर
SUV का इंटीरियर नेरो एडे थीम में तैयार किया गया है, जो इसे स्पोर्टी और लग्जरी फील देता है। इसमें स्टिचिंग, ट्रिम और इनलेज के लिए 6 अलग-अलग कलर ऑप्शंस मिलते हैं। इन एक्सटीरियर और इंटीरियर ऑप्शंस को मिलाकर ग्राहक 70 से ज्यादा यूनिक कॉम्बिनेशन बना सकते हैं, जो इसे बेहद खास बनाता है।
परफॉर्मेंस और हाइब्रिड पावरट्रेन
मैकेनिकल रूप से इसमें वही 4.0-लीटर ट्विन-टर्बो V8 इंजन और 25.9kWh लिथियम-आयन बैटरी दी गई है, जो स्टैंडर्ड Urus SE में मिलती है। यह सेटअप एक इलेक्ट्रिक मोटर के साथ आता है, जो 8-स्पीड ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन से जुड़ी है और जरूरत के अनुसार इंजन को अतिरिक्त पावर देती है।
पावर और स्पीड
यह हाइब्रिड SUV कुल 789hp की पावर और 950Nm का टॉर्क जनरेट करती है। कंपनी के मुताबिक, यह कार 0-100 किमी/घंटा की रफ्तार सिर्फ 3.4 सेकंड में पकड़ लेती है और इसकी टॉप स्पीड 312 किमी/घंटा है। वहीं, इलेक्ट्रिक मोड में यह लगभग 60 किमी तक चल सकती है, जिसकी अधिकतम स्पीड 135 किमी/घंटा है।
(मंजू कुमारी)
Car Tyre Rotation: अब टायर बदलने का खर्च होगा कम, अपनाएं यह आसान ट्रिक और बढ़ाएं टायर की उम्र
Car Tyre Rotation: गाड़ी की बेहतर परफॉर्मेंस और आपकी सुरक्षा के लिए टायरों का सही रखरखाव बेहद जरूरी है। अक्सर लोग इंजन ऑयल और सर्विसिंग पर ध्यान देते हैं, लेकिन टायरों को नजरअंदाज कर देते हैं। जबकि टायर रोटेशन एक आसान और असरदार तरीका है, जिससे टायरों की उम्र बढ़ाई जा सकती है और ड्राइविंग अनुभव बेहतर बनता है।
क्या है टायर रोटेशन?
टायर रोटेशन का मतलब है गाड़ी के टायरों की पोजिशन को समय-समय पर बदलना। इसमें आगे के टायरों को पीछे और पीछे के टायरों को आगे लगाया जाता है। यह प्रक्रिया टायरों के घिसाव को संतुलित करने में मदद करती है।
क्यों जरूरी है टायर रोटेशन?
गाड़ी के आगे वाले टायरों पर इंजन का वजन और स्टेयरिंग का दबाव ज्यादा होता है, जिससे वे जल्दी घिसते हैं। टायर रोटेशन से चारों टायर समान रूप से घिसते हैं, जिससे उनकी लाइफ बढ़ती है और गाड़ी की परफॉर्मेंस बनी रहती है।
बेहतर माइलेज और स्मूथ ड्राइविंग
असमान रूप से घिसे टायर सड़क पर ज्यादा घर्षण पैदा करते हैं, जिससे इंजन पर दबाव बढ़ता है और ईंधन की खपत ज्यादा होती है। नियमित रोटेशन से टायर संतुलित रहते हैं और गाड़ी स्मूथ चलती है, जिससे माइलेज में भी सुधार होता है।
सुरक्षित ड्राइविंग और बेहतर ग्रिप
घिसे हुए टायरों की सड़क पर पकड़ कमजोर हो जाती है, खासकर बारिश में। असमान घिसाव से अचानक ब्रेक लगाने पर गाड़ी फिसल सकती है। सही समय पर टायर रोटेशन करने से ग्रिप बनी रहती है और ड्राइविंग सुरक्षित होती है।
पैसों की बचत
अगर टायर रोटेशन नहीं किया जाए तो आगे के टायर जल्दी खराब हो जाते हैं, जिससे बार-बार नए टायर खरीदने पड़ते हैं। रोटेशन से चारों टायर लंबे समय तक चलते हैं और खर्च कम होता है।
कब कराना चाहिए टायर रोटेशन?
विशेषज्ञों के अनुसार हर 5,000 से 8,000 किलोमीटर के बीच टायर रोटेशन कराना चाहिए। सर्विसिंग के दौरान इसे आसानी से करवाया जा सकता है। साथ ही, टायर बदलते समय व्हील अलाइनमेंट और बैलेंसिंग की जांच भी जरूर करवाएं।
(मंजू कुमारी)
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