नेपाल: भारतीय सहायता से इलाम अस्पताल में इमरजेंसी ब्लॉक का निर्माण शुरू
काठमांडू, 24 अप्रैल (आईएएनएस)। नेपाल के पूर्वी क्षेत्र में स्थित इलाम नगरपालिका के इलाम अस्पताल में भारतीय सरकार की वित्तीय सहायता से इमरजेंसी ब्लॉक के निर्माण कार्य की शुरुआत हो गई है।
नेपाल स्थित भारतीय दूतावास की काउंसलर गीतांजलि ब्रैंडन और नगरपालिका के मेयर केदार थापा ने शुक्रवार को संयुक्त रूप से इस परियोजना का शिलान्यास किया। यह जानकारी नेपाल में भारतीय दूतावास द्वारा जारी बयान में दी गई।
दूतावास के अनुसार, इस इमरजेंसी ब्लॉक के निर्माण के लिए भारत सरकार द्वारा लगभग 9.4 करोड़ नेपाली रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है।
इस अवसर पर मेयर थापा और अन्य स्थानीय प्रतिनिधियों ने नेपाल में विकास कार्यों के लिए भारत के निरंतर सहयोग की सराहना की। उन्होंने कहा कि इस नई आपातकालीन सुविधा के बनने से इलाम नगरपालिका और आसपास के क्षेत्रों के लोगों को बेहतर और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकेंगी।
यह परियोजना हाई इम्पैक्ट कम्युनिटी डेवलपमेंट प्रोजेक्ट के तहत क्रियान्वित की जा रही है, जिसका कार्यान्वयन स्थानीय नगरपालिका द्वारा किया जाएगा।
भारतीय दूतावास ने कहा कि पड़ोसी देशों के रूप में नेपाल और भारत के बीच कई क्षेत्रों में व्यापक सहयोग है। हाई-इम्पैक्ट कम्युनिटी डेवलपमेंट प्रोजेक्ट परियोजनाओं के माध्यम से भारत, नेपाल के विकास प्रयासों को मजबूत करने में लगातार सहयोग दे रहा है, खासकर स्वास्थ्य, शिक्षा और सामुदायिक सेवाओं जैसे प्राथमिक क्षेत्रों में।
बताया गया कि 27 मार्च को बालेंद्र शाह के नेतृत्व में नई सरकार बनने के बाद भारतीय सहायता से दो स्वास्थ्य ढांचा परियोजनाओं, एक स्कूल भवन और एक वेस्ट मैनेजमेंट सेंटर का शिलान्यास किया जा चुका है। इसके अलावा, हाई इम्पैक्ट कम्युनिटी डेवलपमेंट प्रोजेक्ट के तहत सात स्थानीय इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर भी किए गए हैं।
हाई इम्पैक्ट कम्युनिटी डेवलपमेंट प्रोजेक्ट कार्यक्रम भारत-नेपाल विकास साझेदारी का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बनकर उभरा है, जो जमीनी स्तर पर विकास कार्यों को बढ़ावा देता है। यह पहल वर्ष 2003 में शुरू की गई थी, जिसे पहले स्मॉल डेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स के नाम से जाना जाता था।
जनवरी 2024 में हुए एक नए समझौते के तहत भारत की वित्तीय सहायता की सीमा को प्रति परियोजना 50 लाख नेपाली रुपये से बढ़ाकर 2 करोड़ नेपाली रुपये कर दिया गया है, जिससे इस कार्यक्रम को और मजबूती मिली है।
--आईएएनएस
डीएससी
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
तकनीक चोरी का मुकाबला करने के लिए एआई कंपनियों के साथ काम करेगा अमेरिका
नई दिल्ली, 24 अप्रैल (आईएएनएस)। ऑनलाइन हमलों और गोपनीय जानकारी के लीक होने की आशंका के बीच अमेरिका ने अपने यहां की आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कंपनियों के साथ सहयोग बढ़ाने का फैसला किया है। ट्रंप प्रशासन ने यह कदम उन दावों के बाद उठाया है, जिसमें चीन पर अमेरिकी रिसर्च और डेवलपमेंट को कमजोर करने और गोपनीय जानकारी तक पहुंच बनाने की कोशिश के आरोप लगाए गए हैं।
बीबीसी की एक रिपोर्ट के अनुसार, व्हाइट हाउस के ऑफिस ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी पॉलिसी के डायरेक्टर माइकल क्रैट्सियोस ने एक आंतरिक मेमो में कहा है कि नए सबूत सामने आए हैं जिनमें यह दावा किया गया है कि विदेशी इकाइयां डिस्टिलेशन नाम की प्रक्रिया के जरिए अमेरिकी कंपनियों का दुरुपयोग कर रही हैं।
दरअसल एआई में डिस्टिलेशन एक तकनीक है जिसमें एक बड़ा, जटिल मॉडल अपनी सीखी हुई जानकारी एक छोटे और तेज मॉडल को सिखाता है।
संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति के विज्ञान सलाहकार माइकल क्रैट्सियोस का कहना है कि चीन की यह रणनीति अमेरिकी रिसर्च और डेवलपमेंट को कमजोर करने और गोपनीय जानकारी तक पहुंच बनाने की कोशिश है।
इन गतिविधियों को रोकने के लिए व्हाइट हाउस अब अमेरिकी एआई कंपनियों के साथ ज्यादा जानकारी साझा करेगा। जैसे कि ये हमले कैसे किए जाते हैं और इसमें कौन लोग शामिल हैं। इसके साथ ही कंपनियों के साथ मिलकर बेहतर तालमेल बनाया जाएगा, ताकि इन हमलों को रोका जा सके और उनसे निपटने के लिए सर्वोत्तम कार्यप्रणालियां तैयार की जा सके। साथ ही, ऐसे विदेशी तत्वों को जिम्मेदार ठहराने के तरीके भी तलाशे जाएंगे।
डिस्टिलेशन कैंपेन में कंपनियां हजारों फर्जी अकाउंट बनाकर किसी एआई टूल या चैटबॉट को इस्तेमाल करती हैं, ताकि वे आम यूजर की तरह दिखें। फिर ये अकाउंट मिलकर एआई मॉडल को “जेलब्रेक” करने या ऐसी जानकारी निकालने की कोशिश करते हैं, जो सार्वजनिक नहीं होनी चाहिए। इसके बाद उस जानकारी का इस्तेमाल अपने एआई मॉडल बनाने और ट्रेनिंग में किया जाता है।
क्रैट्सियोस ने कहा कि जैसे-जैसे इन बड़े पैमाने के डिस्टिलेशन को पहचानने और रोकने के तरीके बेहतर होते जाएंगे, वैसे-वैसे ऐसे विदेशी मॉडल्स की विश्वसनीयता पर सवाल उठेंगे, जो इसी तरह की कमजोर नींव पर बनाए गए हैं।
वहीं वॉशिंगटन डीसी में स्थित चीन के दूतावास के एक प्रतिनिधि ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि चीन की तकनीकी प्रगति उसकी अपनी मेहनत और अंतरराष्ट्रीय सहयोग का नतीजा है।
अमेरिका की एआई कंपनी एंथ्रोपिक ने मार्च में आरोप लगाया था कि चीन की तीन यूनिकॉर्न कंपनियों डीपसीक, मिनीमैक्स और मूनशॉट एआई ने उसके क्लाउड मॉडल से गैरकानूनी तरीके से क्षमताएं निकालकर अपने सिस्टम को बेहतर बनाया।
--आईएएनएस
एवाई/वीसी
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