दूसरी तिमाही में टेक्नोलॉजी क्षेत्र की भर्तियां एआई, बिग डेटा और साइबर सिक्योरिटी जैसी थीम पर केंद्रित रही : रिपोर्ट
नई दिल्ली, 10 अगस्त (आईएएनएस) । वैश्विक स्तर पर 2026 की दूसरी तिमाही में टेक्नोलॉजी सेक्टर की भर्तियां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), बिग डेटा और साइबर सिक्योरिटी जैसे थीम पर केंद्रित रही। यह जानकारी सोमवार को जारी रिपोर्ट में दी गई।
इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म ग्लोबलडेटा की ‘ग्लोबल हायरिंग एक्टिविटी ट्रेंड्स एंड सिग्नल्स – क्यू2 2026’ शीर्षक वाली रिपोर्ट में बताया गया कि तिमाही के दौरान भर्ती में एआई, बिग डेटा और साइबर सुरक्षा सबसे प्रमुख तकनीकी विषय बने रहे।
एआई क्षेत्र में जनरेटिव एआई और मशीन लर्निंग मांग के प्रमुख क्षेत्र बनकर उभरे। दुनियाभर में जनरेटिव एआई से संबंधित नौकरी के विज्ञापनों की सबसे बड़ी संख्या अमेरिका और भारत में रही।
हालांकि, 2026 की दूसरी तिमाही में वैश्विक रोजगार बाजार में सुस्ती देखी गई। तिमाही आधार पर कुल नौकरी के विज्ञापनों में 2.3 प्रतिशत की गिरावट आई, क्योंकि आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच नियोक्ताओं ने भर्ती को लेकर अधिक सतर्क रुख अपनाया।
भर्ती गतिविधियों में व्यापक नरमी के बावजूद कुछ क्षेत्रों ने मजबूती दिखाई। अमेरिका और ब्रिटेन दोनों में नौकरी के विज्ञापनों में मामूली वृद्धि दर्ज की गई, जबकि नीदरलैंड में स्थिर आर्थिक वृद्धि, घरेलू खर्च में बढ़ोतरी और सरकारी खर्च में वृद्धि के कारण भर्ती गतिविधियों में इजाफा हुआ।
ग्लोबलडेटा की बिजनेस फंडामेंटल्स एनालिस्ट शेरला श्रीपदा ने रिपोर्ट के निष्कर्षों पर टिप्पणी करते हुए कहा कि अमेरिका और ब्रिटेन दोनों में नौकरी के विज्ञापनों में मामूली वृद्धि हुई।
श्रीपदा ने कहा कि नीदरलैंड में स्थिर आर्थिक विस्तार, बढ़ते घरेलू खर्च और बढ़े हुए सरकारी खर्च के कारण नौकरी के विज्ञापनों में वृद्धि हुई।
उन्होंने कहा कि उत्तरी अमेरिका एकमात्र ऐसा क्षेत्र रहा जहां घरेलू स्तर पर भर्ती बढ़ी। नियोक्ताओं ने नौकरी के विज्ञापनों का बड़ा हिस्सा घरेलू भूमिकाओं की ओर स्थानांतरित किया, जबकि क्षेत्र के बाहर की नौकरियों के विज्ञापनों की हिस्सेदारी घट गई।
श्रीपदा ने कहा कि नौकरी के विज्ञापनों में गिरावट एक चयनात्मक भर्ती माहौल का संकेत देती है। नियोक्ता बाहरी भर्ती के साथ-साथ कर्मचारियों के बेहतर उपयोग, उत्पादकता में सुधार और ऑटोमेशन के बढ़ते इस्तेमाल के बीच संतुलन बना रहे हैं।
क्षेत्रवार देखें तो अधिकांश उद्योगों में भर्ती गतिविधि में गिरावट आई। हालांकि, ऑटोमोबाइल, पैकेजिंग तथा तेल एवं गैस क्षेत्रों ने इस रुझान को पलटते हुए नौकरी के अवसरों में मामूली वृद्धि दर्ज की।
ऑटोमोबाइल क्षेत्र में भर्ती बढ़ने की वजह नए वाहनों की लॉन्चिंग और इलेक्ट्रिक वाहनों के विस्तार में जारी निवेश को बताया गया है।
दुनियाभर में रिटेल और तकनीकी क्षेत्र नौकरी के विज्ञापनों की सबसे अधिक संख्या पैदा करते रहे हैं। यह कुल भर्ती गतिविधि में नरमी के बावजूद प्रतिभाओं की लगातार बनी हुई मांग को दर्शाता है।
--आईएएनएस
एबीएस
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FII-DII ने लगाया इन 6 शेयरों पर दांव! स्टील, कोयला और वायर कंपनियां जानिए क्यों बनीं निवेशकों की पहली पसंद?
FII DII Buying Stocks: FII और DII भारतीय बाजार को अलग-अलग नजरिेए से देखते हैं. एक विदेशी पोर्टफोलियो इंवेस्टर (FPI) किसी भारतीय स्टील कंपनी की तुलना कोरिया या ब्राजील की कंपनियों से करता है और रुपये, US बॉन्ड यील्ड और ग्लोबल कमोडिटी साइकल जैसे फैक्टर के आधार पर फैसले लेता है. इसके ठीक उलट, एक घरेलू म्यूचुअल फंड मैनेजर उसी कंपनी की तुलना दूसरी भारतीय कंपनियों से करता है. साथ ही, उन्हें SIP फंड के जरिए हर महीने लगातार पैसा मिलता रहता है जिसे डॉलर के परफॉर्मेंस की परवाह किए बिना बाजार में लगाना ही होता है. यही वजह है कि ये दोनों ग्रुप अक्सर उल्टी दिशा में चलते हैं.
तो जब दोनों एक ही तिमाही में एक ही कंपनी में हिस्सेदारी बढ़ाएं, तो यह ध्यान देने लायक बात है. जून 2026 में खत्म हुई तिमाही में 6 मेटल स्टॉक्स के साथ ऐसा ही हुआ. यह कोई इत्तेफाक नहीं था. निफ्टी मेटल इंडेक्स बाजार में सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वालों में से एक रहा है, जिसे ग्लोबल सप्लाई में कमी, सेफगार्ड ड्यूटी, इंफ्रास्ट्रक्चर पर रिकॉर्ड खर्च और एनर्जी ट्रांजिशन से बढ़ावा मिला है.
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1. SAIL (स्टील ऑथोरिटी ऑफ इंडिया)
SAIL का सबसे ज्यादा विदेशी निवेश आया. FII की हिस्सेदारी 5.01% से बढ़कर 7.09% हो गई, जबकि DII की हिस्सेदारी 8.74% तक पहुंच गई. यह एक महारत्न PSU है और भारत की सबसे बड़ी स्टील बनाने वाली कंपनियों में से एक है. FY26 में स्टैंडअलोन नेट प्रॉफिट 50.54% बढ़कर ₹32.3 बिलियन हो गया और स्टील की बिक्री 17.89 मिलियन टन से बढ़कर 19.39 मिलियन टन हो गई. बोर्ड ने प्रति शेयर ₹2.35 का डिविडेंड देने की सिफारिश की. हालांकि कंपनी के रेवेन्यू का एक हिस्सा प्रोविजनल प्राइसिंग पर आधारित है और एक PSU होने के नाते इस पर सरकारी नीतियो का असर पड़ता रहता है.
2. Coal India (कोल इंडिया)
कोल इंडिया में विदेशी हिस्सेदारी लगभग 2% अंक बढ़कर 10.37% हो गई है और घरेलू फंड्स ने भी अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई है. यह दुनिया की सबसे बड़ी कोयला उत्पादक कंपनी है. इसकी खासियत इसकी ग्रोथ नहीं बल्कि इसकी फाइनेंशियल क्वालिटी है. इसमें इक्विटी पर रिटर्न लगभग 24%, कैपिटल एम्प्लॉयड पर रिटर्न लगभग 30%, डिविडेंड यील्ड 6% से ज्यादा और मजबूत नेट कैश पोजिशन शामिल है. हालांकि मुनाफे में कमी आई है और डेटर डेज (देनदारों से भुगतान मिलने में लगने वाला समय) बढ़ गए हैं.
3. Bansal Wire Industries (बंसल वायर इंडस्ट्रीज)
बंसल वायर इंडस्ट्रीज की DII होल्डिंग में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी हुई. यह 13.21% से बढ़कर 15.61% हो गई जबकि FII होल्डिंग दोगुनी से भी ज्यादा हो गई, जो 0.88% से बढ़कर 1.99% पर पहुंच गई. यह भारत की सबसे बड़ी स्टेनलेस स्टील वायर निर्माता कंपनी है. पिछले 5 सालों में इसकी कुल बिक्री में 172% की बढ़ोतरी हुई है. FY26 में बिक्री की मात्रा (सेल्स वॉल्यूम) में 33% की बढ़ोतरी हुई, लेकिन मुनाफे में बढ़ोतरी रेवेन्यू में बढ़ोतरी के मुकाबले कम रही, जिससे मार्जिन पर कुछ दबाव का संकेत मिलता है.
4. JSW Steel (JSW स्टील)
JSW स्टील में FIIs की हिस्सेदारी पहले से ही लगभग एक-चौथाई थी. फिर भी उन्होंने इसे 25.37% से बढ़ाकर 25.91% कर दिया. यह भारत की सबसे बड़ी स्टील बनाने वाली कंपनी है. FY26 में नेट प्रॉफिट ₹255.1 अरब तक पहुंच गया, हालांकि इस आंकड़े में लगभग ₹184.9 अरब की असाधारण आय (exceptional income) भी शामिल है. कंपनी का 3 साल का औसत ROE लगभग 9% है.
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5. Godawari Power & Ispat (गोदावरी पावर एंड इस्पात)
गोदावरी पावर एंड इस्पात में DII की हिस्सेदारी 0.57% अंक बढ़ी, जबकि FII की हिस्सेदारी बढ़कर 6% हो गई. कंपनी की एक खास बात इसकी अपनी आयरन और खदानें हैं, जो इसे कच्चे माल की कीमतों में उतार-चढ़ाव से बचाती हैं. FY26 में मुनाफा 19.46% बढ़कर ₹9.2 अरब हो गया. कंपनी अब एनर्जी स्टोरेज सेक्टर में भी कदम रख रही है.
6. Maharashtra Seamless (महाराष्ट्र सीमलेस)
महाराष्ट्र सीमलेस में DII की हिस्सेदारी 2.56% से बढ़कर 3.09% हो गई, जबकि FII की हिस्सेदारी मामूली रूप से बढ़कर 9.72% हो गई. हालांकि कंपनी का फाइनेंशियल परफॉर्मेंस कमजोर रहा और नेट प्रॉफिट घटकर ₹7.2 अरब रह गया. यह स्टॉक केवल 10x के P/E रेशियो पर ट्रेड कर रहा है, जबकि इंडस्ट्री का औसत 26x है. कंपनी पर कोई कर्ज नहीं है और बोर्ड ने कारोबार को 2 अलग-अलग कंपनियों में बांटने की योजना को भी मंजूरी दे दी है.
डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल सिर्फ जानकारी के लिए दी गई है और इसे निवेश की सलाह नहीं माना जाना चाहिए. किसी भी निवेश फैसले से पहले कृपया अपने फाइनेंशियल एडवाइजर से सलाह लें.
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