वेनेजुएला में घुसकर राष्ट्रपति मादुरो को पकड़ने वाला सैनिक गिरफ्तार:तख्तापलट पर सट्टा खेलकर 4 करोड़ कमाए, पहले से मिशन की जानकारी थी
अमेरिका की स्पेशल फोर्स से जुड़े एक सैनिक मास्टर सार्जेंट गैनन केन वैन डाइक को गिरफ्तार किया गया है। आरोप है कि उसने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को पकड़ने वाले ऑपरेशन पर सट्टा लगाया और इससे करीब 4.09 लाख डॉलर (करीब 4 करोड़ रुपए) कमा लिए। डाइक अमेरिकी सेना के स्पेशल फोर्स (ग्रीन बैरे) का हिस्सा है। इसी यूनिट ने वेनेजुएला जाकर निकोलस मादुरो को पकड़ा था। ऐसे में डाइक को पहले से वेनेजुएला पर होने वाले सीक्रेट एक्शन की जानकारी थी। ॉ इसी जानकारी के आधार पर उसने दांव लगाया। उसके जीतने के बाद मिली रकम, भले ही गुमनाम थी, लेकिन तुरंत ही जांच एजेंसियों के शक में आ गई। डाइक अमेरिकी सेना में मास्टर सार्जेंट के पद पर था। यह एक सीनियर पद होता है। ऐसे अधिकारी को रणनीतिक और तकनीकी मामलों का विशेषज्ञ माना जाता है और वह यूनिट में अनुशासन और मानकों को बनाए रखने में अहम भूमिका निभाता है। मादुरो के तख्तापलट से जुड़े 13 दांव लगाए जांच के मुताबिक, डाइक ने दिसंबर के आखिर में ‘पॉलिमार्केट’ नाम के प्लेटफॉर्म पर अकाउंट बनाया। यह एक ऐसा प्लेटफॉर्म है जहां लोग भविष्य की घटनाओं पर दांव लगाते हैं। दिसंबर 2025 तक वेनेजुएला में घुसकर राष्ट्रपति मादुरो का तख्तापलट करने की घटना पर यकीन करने वाले लोग नहीं थे। डाइक ने इससे मिलते-जुलते नतीजों पर कुल 13 बार 32 हजार डॉलर का दांव लगाया, जैसे कि मादुरो कब तक सत्ता से हटेंगे या अमेरिका वेनेजुएला में कब तक सैन्य कार्रवाई करेगा। यह एक जोखिम भरा दांव था, लेकिन ऑपरेशन की अंदरूनी जानकारी होने के कारण उसे भरोसा था कि यह सच साबित होगा। ऑपरेशन सफल होते ही उसका दांव सही साबित हुआ और उसे भारी मुनाफा हुआ। छुपाने की कोशिश: क्रिप्टो के जरिए पैसे ट्रांसफर रिपोर्ट्स के मुताबिक वैन डाइक ने अपनी पहचान छिपाने के लिए कई कदम उठाए। पहले उसने रकम को एक विदेशी क्रिप्टो वॉल्ट में भेजा, फिर अपने निजी क्रिप्टो अकाउंट में डाला और बाद में एक नए ब्रोकरेज अकाउंट में ट्रांसफर कर दिया। जब मादुरो को पकड़ने से जुड़ी संदिग्ध सट्टेबाजी की खबरें सामने आने लगीं, तो उसने अपना पॉलीमार्केट अकाउंट डिलीट करने की कोशिश की और झूठ बोला कि उसे अपने ईमेल का एक्सेस नहीं है। हालांकि तब तक जांच एजेंसियों की नजर उस पर पड़ गई थी। पॉलिमार्केट ने सोशल मीडिया पर कहा कि जब उन्हें पता चला कि कोई यूजर सीक्रेट सरकारी जानकारी के आधार पर ट्रेड कर रहा है, तो उन्होंने खुद यह मामला जस्टिस डिपार्टमें को सौंप दिया और जांच में सहयोग किया। कंपनी ने कहा कि इस तरह का अंदरूनी सट्टा उनकी नीति के खिलाफ है। वैन डाइक पर 4 गंभीर आरोप लगे हैं इन आरोपों में दोषी पाए जाने पर डाइक को कई साल की जेल हो सकती है। व्हाइट हाउस ने संदिग्ध सट्टेबाजी को लेकर चेतावनी दी यह मामला इसलिए भी बड़ा माना जा रहा है क्योंकि यह उन सबसे हाई-प्रोफाइल मामलों में से एक है, जहां किसी सरकारी कर्मचारी ने प्रेडिक्शन मार्केट के जरिए अंदर की जानकारी से पैसा कमाया। इसी वजह से व्हाइट हाउस ने अपने कर्मचारियों को पहले ही चेतावनी दी थी कि वे ऐसे प्लेटफॉर्म से दूर रहें, खासकर ऐसे समय में जब ईरान युद्ध से जुड़े मामलों पर भी संदिग्ध सट्टेबाजी बढ़ रही है। प्रिडिक्शन मार्केट ऐसे प्लेटफॉर्म होते हैं, जहां लोग भविष्य की घटनाओं जैसे चुनाव, युद्ध या राजनीतिक बदलाव पर दांव लगाते हैं। इस मामले में पहली बार किसी सैन्य अधिकारी ने गुप्त जानकारी का इस्तेमाल कर पैसे कमाए। ईरान युद्ध के दौरान भी लगे संदिग्ध दांव यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच तनाव के दौरान भी भारी मात्रा में संदिग्ध दांव लगाए गए थे। रिपोर्ट्स के मुताबिक: 1 अरब डॉलर से ज्यादा के ‘सटीक समय वाले’ दांव लगाए गए अमेरिका के हमले से पहले 8.5 लाख डॉलर का दांव लगा सीजफायर से पहले ऑयल फ्यूचर्स में भारी ट्रेडिंग हुई इन घटनाओं ने यह सवाल खड़ा किया है कि क्या बड़े फैसलों से पहले जानकारी लीक हो रही है। ट्रम्प बोले- दुनिया ‘कसीनो’ बन गई है इस पूरे विवाद पर ट्रम्प ने कहा है कि दुनिया में अब एक नया और खतरनाक ट्रेंड तेजी से बढ़ रहा है। लोग राजनीतिक और अंतरराष्ट्रीय घटनाओं पर भी सट्टा लगाने लगे हैं। इस वजह से दुनिया एक तरह का कैसीनो बनती जा रही है। ट्रम्प ने कहा कि उन्हें इस तरह की सट्टेबाजी पसंद नहीं है। हालांकि, उन्होंने इस पर ज्यादा टिप्पणी करने से बचते हुए कहा कि यह एक चिंताजनक ट्रेंड है।
ईरान जंग में खर्च हुईं चीन के लिए रिजर्व मिसाइलें:अमेरिका का मिसाइल स्टॉक खत्म होने के करीब; हर दिन ₹90 अरब खर्च
ईरान के साथ 38 दिन चले युद्ध में अमेरिका ने अपनी कई अहम और महंगी मिसाइलें खर्च कर दीं। इनमें वो मिसाइलें भी शामिल हैं, जो चीन जैसे बड़े युद्ध के लिए संभालकर रखी गई थीं। अब अमेरिका का हथियार भंडार तेजी से कम हो रहा है। इस युद्ध में अमेरिका ने करीब 1100 लंबी दूरी की स्टील्थ मिसाइलें (JASSM-ER) इस्तेमाल कीं। ये खास तौर पर चीन के खिलाफ इस्तेमाल के लिए बनाई गई थीं। इसके अलावा 1000 से ज्यादा टॉमहॉक मिसाइलें, 1200 से ज्यादा पैट्रियट मिसाइलें और 1000 से ज्यादा दूसरी स्ट्राइक मिसाइलें भी दागी गईं। इस पूरे युद्ध पर 28 से 35 अरब डॉलर खर्च हुए। यानी हर दिन करीब 1 अरब डॉलर (लगभग 90 अरब रुपए) खर्च हुए। युद्ध रुके हुए दो हफ्ते हो चुके हैं, लेकिन अब तक अमेरिका ने यह नहीं बताया कि कुल कितने हथियार इस्तेमाल हुए। मंत्रालय का कहना है कि 13,000 से ज्यादा टारगेट पर हमला किया गया। लेकिन अधिकारियों के मुताबिक एक ही टारगेट पर कई बार हमले हुए, इसलिए असल में इस्तेमाल हुए हथियारों की संख्या इससे काफी ज्यादा है। मिसाइलों का स्टॉक तेजी से कम हुआ युद्ध के दौरान अमेरिका ने जिन हथियारों का सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया, उनमें लंबी दूरी की JASSM-ER मिसाइलें शामिल हैं। ये 600 मील से ज्यादा दूर तक मार कर सकती हैं और दुश्मन की एयर डिफेंस से बचकर हमला करने के लिए बनाई गई हैं। इसके अलावा टॉमहॉक मिसाइलों का भी बड़े पैमाने पर इस्तेमाल हुआ। अमेरिका सालभर में जितनी मिसाइलें खरीदता है, उससे करीब 10 गुना ज्यादा इस युद्ध में खर्च हो गईं। एक स्टडी के मुताबिक, अब अमेरिका के पास करीब 3000 टॉमहॉक मिसाइलें ही बची हैं। पैट्रियट इंटरसेप्टर मिसाइलें भी तेजी से खत्म हुई हैं। एक मिसाइल की कीमत करीब 4 मिलियन डॉलर है। 2025 में अमेरिका ने 600 मिसाइलें बनाई थीं, लेकिन युद्ध में 1200 से ज्यादा इस्तेमाल हो गईं। इसके अलावा 1000 से ज्यादा प्रिसिजन स्ट्राइक और ATACMS मिसाइलें भी खर्च हो चुकी हैं। पेंटागन के मुताबिक, कुछ जरूरी हथियार पहले से ही कम थे और अब उनकी कमी और बढ़ गई है। व्हाइट हाउस ने हथियार खत्म होने का दावा खारिज किया व्हाइट हाउस ने हथियार खत्म होने के दावों को गलत बताया है। प्रेस सचिव कैरोलिन लीविट ने कहा कि अमेरिका के पास दुनिया की सबसे मजबूत सेना है और उसके पास पर्याप्त हथियार हैं। पेंटागन के प्रवक्ता सीन पार्नेल ने भी किसी खास इलाके या हथियारों के स्टॉक की जानकारी देने से इनकार किया। उन्होंने इसे सुरक्षा से जुड़ा मामला बताया। युद्ध के पहले दो दिनों में ही 5.6 अरब डॉलर के हथियार इस्तेमाल हो गए थे। इसके अलावा कुछ ऑपरेशन में नुकसान भी हुआ। ईरान से पायलट को निकालने के मिशन में दो MC-130 विमान और तीन हेलीकॉप्टर नष्ट करने पड़े, जिनकी कीमत करीब 275 मिलियन डॉलर बताई गई। एशिया-यूरोप से भी हथियार मिडिल ईस्ट भेजे हथियारों की कमी के कारण अमेरिका को एशिया और यूरोप से भी अपने सैन्य संसाधन मिडिल ईस्ट भेजने पड़े। इससे वहां तैनात सेना की तैयारी पर असर पड़ा है। यूरोप में NATO की पूर्वी सीमा की सुरक्षा से जुड़े कुछ हथियार कम हो गए हैं। वहीं एशिया में भी असर ज्यादा दिखा है। साउथ चाइना सी से USS अब्राहम लिंकन कैरियर ग्रुप को हटाकर मिडिल ईस्ट भेजा गया। साथ ही दो मरीन यूनिट भी वहां तैनात की गईं। दक्षिण कोरिया में तैनात THAAD मिसाइल सिस्टम के इंटरसेप्टर भी पहली बार वहां से हटाए गए हैं। ये सिस्टम उत्तर कोरिया के खतरे से निपटने के लिए लगाया गया था। इससे पहले भी अमेरिका मिडिल ईस्ट में अपने जहाज और विमान भेजता रहा है। खासकर 2023 में इजराइल-गाजा युद्ध और यमन में हूती हमलों के बाद तैनाती बढ़ाई गई थी। पिछले साल हूती के खिलाफ ऑपरेशन में ही 1 अरब डॉलर से ज्यादा खर्च हुआ था। हथियारों का स्टॉक भरना बड़ी चुनौती अब अमेरिका के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने हथियारों का स्टॉक दोबारा भरने की है। सीनेट की आर्म्ड सर्विसेज कमेटी के सदस्य जैक रीड ने कहा कि मौजूदा रफ्तार से स्टॉक पहले जैसा करने में कई साल लग सकते हैं। पेंटागन ने उत्पादन बढ़ाने के लिए लॉकहीड मार्टिन जैसी कंपनियों से 7 साल के समझौते किए हैं, लेकिन पैसे की कमी के कारण काम अभी शुरू नहीं हो पाया है। रक्षा विशेषज्ञ मार्क कैंसियन का कहना है कि कुछ जरूरी मिसाइलें पहले से ही कम थीं, जो अब और घट गई हैं। इससे अमेरिका की वैश्विक सैन्य रणनीति पर दबाव बढ़ सकता है।
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