Baglamukhi Jayanti 2026: आज बगलामुखी जयंती पर शत्रु विजय और वाणी सिद्धि के लिए पढ़ें यह कथा
Baglamukhi Jayanti 2026: आज मां बगलामुखी की जयंती है. हर साल वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि पर मां बगलामुखी का जन्मोत्सव पर्व मनाया जा रहा है. मां बगलामुखी दस महाविद्याओं में आठवीं शक्ति कही जाती हैं. शास्त्रों में इन्हें मां पीताबंरा और ब्रह्मास्त्र विद्या के नाम से भी जाना जाता है. ये ब्रह्माण्ड की अधिष्ठात्री देवी कही जाती हैं. ज्योतिष शास्त्र में इन्हें नवग्रह की अधिष्ठात्री देवी जाता है. बगलामुखी जयंती पर शास्त्र विधि से मां बगलामुखी की पूजा करनी चाहिए. इनकी उपासना करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं. इसके साथ ही जीवन मे कोई डर या भय नहीं रहता है. शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है. विद्या और वाणी सिद्धि का वरदान प्राप्त होता है. बगलामुखी जयंती के दिन माता की उत्पत्ति की कथा जरूर पढ़नी चाहिए.
मां बगलामुखी की कथा
पौराणिक कथा के अनुसार, सतयुग में एक बार भयंकर प्रलय रुप में तूफान आया. चारों ओर तेज हवाएं, भयंकर बारिश, कहीं भूकंप जैसी स्थिति बन रही थी. ऐसा लग रहा था मानों सृष्टि का प्रलय हो जाएगा. सृष्टि को प्रलय से बचाने के लिए ब्रह्मा जी सहित सभी देवी-देवतागण भगवान विष्णु की शरण में गए. सृष्टि की चिंता करते हुए भगवान विष्णु, महादेव की शरण में पहुंचे और उनसे सृष्टि को बचाने की प्रार्थना करने लगे. भगवान शिव ने कहा कि आप आदिशक्ति मां त्रिपुरसुंदरी को प्रसन्न करें.
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भगवान विष्णु ने की तपस्या
भगवान विष्णु ने सृष्टि को प्रलय से बचाने के लिए हिमालय क्षेत्र में हरिद्रा नदी के तट पर बैठकर आदिशक्ति की तपस्या शुरु की थी. आदिशक्ति विष्णु जी की तपस्या से प्रसन्न हुई और उस हरिद्रा नदी से सोने के समान कांति वाली मां बगलामुखी के रुप में प्रकट हुईं. मां बगलामुखी हल्दी के समान पीले वस्त्र पहनें थी. उनके चतुर्भुजी स्वरुप में एक हाथ में मुदगर के समान गदा थी, एक हाथ में दंड, एक हाथ में पाश अस्त्र और एक हाथ से शत्रु की जीभ पकड़ी हुईं थी. मां बगलामुखी सोने के पीले सिंहासन पर विराजमान थीं. भगवान विष्णु ने मां बगलामुखी से सृष्टि को बचाने की प्रार्थना की. देवी ने उस भयंकर तूफान का स्तंभन कर दिया यानि रोक दिया. इस तरह सृष्टि की रक्षा हुई थी. ब्रह्मांड की रक्षा करने की वजह से ही इन्हें ब्रह्मास्त्र विद्या कहा जाता है. इसके साथ ही नवग्रह की अधिष्ठात्री देवी कहा जाता है.
मां बगलामुखी ने किया दंतवक्र राक्षस का वध
एक अन्य पौराणिक कथा के अनुसार, एकबार दंतवक्र नाम के अत्याचारी राक्षस ने ब्रह्मा जी से वरदान प्राप्त कर लिया कि कोई भी उसका वध नहीं कर सकेगा. वह अपनी वाणी से ब्रह्मांड में विकृति, झूठ, हिंसा और एक-दूसरे में लड़ाई कराने लगा. सभी देवी-देवतागण उसके अत्याचारों से बहुत परेशान हो गये. सभी ने मिलकर मां बगलामुखी की साधना की थी. माता बंगलामुखी ने अपनी स्तंभन शक्ति से दंतवाक्र की जीभ पकड़ ली और कहा कि अब तू बोलेगा नहीं, तेरी वाणी ही तेरे विनाश का कारण बनेगी. इस तरह मां बगलामुखी ने उसे मौन में बांध दिया और सत्य की स्थापना की.
शास्त्रों में मां बगलामुखी के प्रकट होने की ये दो कथाएं मिलती है. बगलामुखी जयंती के दिन इन कथाओं को अवश्य पढ़ाना चाहिए. इन कथाओं को पढ़ने से पूजा का पूरा फल प्राप्त होता है. साधक की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं.
मां बगलामुखी का ध्यान मंत्र
ऊं सौवर्णासन-संस्थितां त्रिनयनां पीतांशुकोल्लासिनीम्।
हेमाभांगरुचिं शशांक-मुकुटां सच्चम्पक स्रग्युताम्।।
हस्तैर्मुद्गर पाश वज्ररसनाः संबिभ्रतीं भूषणैः।
व्याप्तांगीं बगलामुखीं त्रिजगतां संस्तम्भिनीं चिन्तयेत्।।"
इस ध्यान मंत्र का अर्थ है- सोने के सिंहासन पर बैठी हुई तीन नेत्रों वाली, पीले वस्त्रों से सुशोभित, सोने के समान कांति वाली, मस्तक पर चंद्रमा धारण करने वाली, चंपा के फूलों की माला धारण करने वाली, हाथों में मुद्गर (गदा), पाश, वज्र और शत्रु की जींभ धारण करने वाली, आभूषणों से सुसज्जित, तीनों लोगों का स्तंभन करने वाली मां बगलामुखी का ध्यान करता हूं.
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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. न्यज नेशन इसकी पुष्टि नहीं करता है.
Safe Driving Tips: सफर होगा सुरक्षित और आरामदायक, बच्चों के साथ अपनाएं ये स्मार्ट टिप्स
Safe Driving Tips: भारत में सड़कों की स्थिति तेजी से बेहतर हो रही है, जिससे अब लोग अपनी कार से परिवार और बच्चों के साथ लंबी यात्राएं करना ज्यादा पसंद करने लगे हैं। हालांकि बच्चों के साथ सफर करते समय कुछ जरूरी सावधानियां अपनाना बेहद जरूरी है, ताकि यात्रा सुरक्षित और आरामदायक बनी रहे। यहां हम आपको कुछ आसान लेकिन अहम टिप्स बता रहे हैं, जिन्हें अपनाकर आप बिना परेशानी अपने सफर को पूरा कर सकते हैं।
सनरूफ से बाहर न निकालें
अक्सर देखा जाता है कि लोग बच्चों के साथ सफर करते समय सनरूफ खोल देते हैं और बच्चे उसमें से बाहर निकलकर मजा लेते हैं। लेकिन यह आदत काफी खतरनाक साबित हो सकती है। अचानक ब्रेक लगने या सड़क पर झटके लगने से बच्चे को चोट लग सकती है। इसके अलावा ट्रैफिक नियमों के तहत ऐसा करना गलत है और पुलिस चालान भी काट सकती है।
चाइल्ड लॉक का करें इस्तेमाल
कार में बच्चों के साथ यात्रा करते समय चाइल्ड लॉक का उपयोग जरूर करें। कई बार बच्चे खेल-खेल में चलते वाहन का दरवाजा खोल देते हैं, जिससे बड़ा हादसा हो सकता है। चाइल्ड लॉक लगाने से दरवाजे अंदर से नहीं खुलते और बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित होती है।
सीट बेल्ट है जरूरी
सफर के दौरान सीट बेल्ट लगाना सिर्फ बड़ों के लिए ही नहीं, बल्कि बच्चों के लिए भी बेहद जरूरी है। यह हादसे के समय सुरक्षा प्रदान करती है और अचानक ब्रेक लगने पर बच्चे को सीट से गिरने से बचाती है। साथ ही, सीट बेल्ट न लगाने पर ट्रैफिक चालान से भी बचा जा सकता है।
बच्चों के लिए खास सीट का उपयोग
अगर आप छोटे या नवजात बच्चों के साथ यात्रा कर रहे हैं, तो उन्हें सामान्य सीट पर बैठाना सुरक्षित नहीं होता। इसके लिए बाजार में उपलब्ध चाइल्ड सेफ्टी सीट का उपयोग करना बेहतर विकल्प है। यह सीट बच्चों को मजबूती से पकड़कर रखती है और यात्रा के दौरान उन्हें अतिरिक्त सुरक्षा देती है। इन आसान उपायों को अपनाकर आप बच्चों के साथ अपनी कार यात्रा को सुरक्षित, आरामदायक और चिंता मुक्त बना सकते हैं।
(मंजू कुमारी)
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