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'मेरी बहन की जिंदगी बर्बाद कर दी...', ओम पुरी पर जमकर बरसे अन्नू कपूर, एक्टर के अफेयर का खोला राज

Annu Kapoor Lashed Out at Om Puri: दिवंगत एक्टर ओम पुरी हिंदी सिनेमा के उन रेयर और असाधारण कलाकारों में गिने जाते हैं, जिनकी एक्टिंग की प्रतिभा का लोहा न सिर्फ भारत बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी माना गया. जी हां, अपनी गहरी आवाज, सादगी भरे व्यक्तित्व और दमदार अभिनय के दम पर उन्होंने एक अलग पहचान बनाई. आज भी फिल्म इंडस्ट्री में उनका नाम बड़े सम्मान के साथ लिया जाता है. लेकिन जहां एक ओर उनका पेशेवर जीवन बेहद सफल रहा, वहीं उनका निजी जीवन कई उतार-चढ़ाव और विवादों से भरा रहा. खासतौर पर एक्टर अन्नू कपूर के लिए. ओम पुरी से जुड़ी यादें सिर्फ उनके महान कलाकार होने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि बेहद व्यक्तिगत और दर्दनाक भी हैं.

दरअसल, अन्नू कपूर की बहन सीमा कपूर की शादी ओम पुरी से हुई थी, जो उनकी पहली शादी थी. इस रिश्ते की शुरुआत प्यार से हुई थी, लेकिन इसका अंत काफी कड़वाहट और दुख के साथ हुआ. इसी बीच हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में अन्नू कपूर ने अपनी बहन के इस कठिन और भावनात्मक रूप से थकाने वाले अतीत के बारे में खुलकर बात की. चलिए आपको बताते हैं उन्होंने इस बारे में क्या कुछ कहा?

'उन्होंने कई गलतियां कीं'

सिद्धार्थ कन्नन के साथ बातचीत के दौरान अन्नू कपूर ने ओम पुरी को एक बेमिसाल अभिनेता बताया. उन्होंने कहा कि अभिनय की दुनिया में ओम पुरी जैसा कोई दूसरा कलाकार नहीं हुआ. हालांकि, उन्होंने ये भी स्वीकार किया कि एक इंसान के रूप में ओम पुरी ने गंभीर गलतियां कीं, जिनका असर उनके परिवार, खासकर उनकी बहन सीमा पर पड़ा.

ओम पुरी का पत्रकार के साथ अफेयर

अन्नू कपूर ने बताया कि जब उनकी बहन सीमा अपने जीवन के बेहद नाजुक दौर से गुजर रही थीं, तब उन्हें धोखे का सामना करना पड़ा. शादी के कुछ समय बाद ही, जब सीमा गर्भवती थीं तब ओम पुरी का एक पत्रकार नंदिता पुरी के साथ संबंध बन गया. ये बात जब सीमा को पता चली, तो वो उनके लिए एक गहरा आघात था. इस घटना ने उनके वैवाहिक जीवन को पूरी तरह से हिला कर रख दिया.

बहन के जीवन को लेकर गहरा अफसोस

अन्नू कपूर ने इंटरव्यू में ये भी बताया कि भले ही अब उनके मन में किसी के प्रति कोई द्वेष या गुस्सा नहीं है, लेकिन उन्हें अपनी बहन के जीवन को लेकर गहरा अफसोस है. एक्टर ने कहा, "मुझे इस बात का अफसोस है कि मेरी बहन सीमा कपूर का जीवन बर्बाद हो गया". उन्होंने कहा कि उनकी बहन का जीवन संघर्षों से भरा रहा और उन्हें वो सहारा नहीं मिल पाया जिसकी उन्हें जरूरत थी. ये दर्द आज भी उनके दिल में कहीं न कहीं मौजूद है.

उन्होंने ये भी बताया कि ओम पुरी के अंतिम दिनों में सीमा कपूर ने ही उनकी देखभाल की थी, जो उनके व्यक्तित्व और रिश्तों की जटिलता को दर्शाता है. अन्नू कपूर ने कहा कि अब जब ओम पुरी इस दुनिया में नहीं हैं, तो वो उनके परिवार उनके बेटे और पत्नी नंदिता के लिए भगवान से प्रार्थना करते हैं और उनके सुख-शांति की कामना करते हैं.

शादी के कुछ महीनों बाद आई रिश्ते में दरार

सीमा कपूर और ओम पुरी की कहानी की शुरुआत तब हुई थी जब सीमा महज 19 साल की थीं. उम्र में लगभग 11 साल के अंतर के बावजूद, दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ीं और उन्होंने कई सालों तक एक-दूसरे को डेट किया. आखिरकार, 1990 में दोनों ने शादी कर ली. लेकिन शादी के कुछ ही महीनों बाद उनके रिश्ते में दरारें आने लगीं, जिसका मुख्य कारण ओम पुरी का नंदिता पुरी के साथ संबंध था.

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Baglamukhi Jayanti 2026: आज बगलामुखी जयंती पर शत्रु विजय और वाणी सिद्धि के लिए पढ़ें यह कथा

Baglamukhi Jayanti 2026: आज मां बगलामुखी की जयंती है. हर साल वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि पर मां बगलामुखी का जन्मोत्सव पर्व मनाया जा रहा है. मां बगलामुखी दस महाविद्याओं में आठवीं शक्ति कही जाती हैं. शास्त्रों में इन्हें मां पीताबंरा और ब्रह्मास्त्र विद्या के नाम से भी जाना जाता है. ये ब्रह्माण्ड की अधिष्ठात्री देवी कही जाती हैं. ज्योतिष शास्त्र में इन्हें नवग्रह की अधिष्ठात्री देवी जाता है. बगलामुखी जयंती पर शास्त्र विधि से मां बगलामुखी की पूजा करनी चाहिए. इनकी उपासना करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं. इसके साथ ही जीवन मे कोई डर या भय नहीं रहता है. शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है. विद्या और वाणी सिद्धि का वरदान प्राप्त होता है. बगलामुखी जयंती के दिन माता की उत्पत्ति की कथा जरूर पढ़नी चाहिए.

मां बगलामुखी की कथा

पौराणिक कथा के अनुसार, सतयुग में एक बार भयंकर प्रलय रुप में तूफान आया. चारों ओर तेज हवाएं, भयंकर बारिश, कहीं भूकंप जैसी स्थिति बन रही थी. ऐसा लग रहा था मानों सृष्टि का प्रलय हो जाएगा. सृष्टि को प्रलय से बचाने के लिए ब्रह्मा जी सहित सभी देवी-देवतागण भगवान विष्णु की शरण में गए. सृष्टि की चिंता करते हुए भगवान विष्णु, महादेव की शरण में पहुंचे और उनसे सृष्टि को बचाने की प्रार्थना करने लगे. भगवान शिव ने कहा कि आप आदिशक्ति मां त्रिपुरसुंदरी को प्रसन्न करें.

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भगवान विष्णु ने की तपस्या

भगवान विष्णु ने सृष्टि को प्रलय से बचाने के लिए हिमालय क्षेत्र में हरिद्रा नदी के तट पर बैठकर आदिशक्ति की तपस्या शुरु की थी. आदिशक्ति विष्णु जी की तपस्या से प्रसन्न हुई और उस हरिद्रा नदी से सोने के समान कांति वाली मां बगलामुखी के रुप में प्रकट हुईं. मां बगलामुखी हल्दी के समान पीले वस्त्र पहनें थी. उनके चतुर्भुजी स्वरुप में एक हाथ में मुदगर के समान गदा थी, एक हाथ में दंड, एक हाथ में पाश अस्त्र और एक हाथ से शत्रु की जीभ पकड़ी हुईं थी. मां बगलामुखी सोने के पीले सिंहासन पर विराजमान थीं. भगवान विष्णु ने मां बगलामुखी से सृष्टि को बचाने की प्रार्थना की. देवी ने उस भयंकर तूफान का स्तंभन कर दिया यानि रोक दिया. इस तरह सृष्टि की रक्षा हुई थी. ब्रह्मांड की रक्षा करने की वजह से ही इन्हें ब्रह्मास्त्र विद्या कहा जाता है. इसके साथ ही नवग्रह की अधिष्ठात्री देवी कहा जाता है. 

मां बगलामुखी ने किया दंतवक्र राक्षस का वध

एक अन्य पौराणिक कथा के अनुसार, एकबार दंतवक्र नाम के अत्याचारी राक्षस ने ब्रह्मा जी से वरदान प्राप्त कर लिया कि कोई भी उसका वध नहीं कर सकेगा. वह अपनी वाणी से ब्रह्मांड में विकृति, झूठ, हिंसा और एक-दूसरे में लड़ाई कराने लगा. सभी देवी-देवतागण उसके अत्याचारों से बहुत परेशान हो गये. सभी ने मिलकर मां बगलामुखी की साधना की थी. माता बंगलामुखी ने अपनी स्तंभन शक्ति से दंतवाक्र की जीभ पकड़ ली और कहा कि अब तू बोलेगा नहीं, तेरी वाणी ही तेरे विनाश का कारण बनेगी. इस तरह मां बगलामुखी ने उसे मौन में बांध दिया और सत्य की स्थापना की. 

शास्त्रों में मां बगलामुखी के प्रकट होने की ये दो कथाएं मिलती है. बगलामुखी जयंती के दिन इन कथाओं को अवश्य पढ़ाना चाहिए. इन कथाओं को पढ़ने से पूजा का पूरा फल प्राप्त होता है. साधक की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं.

मां बगलामुखी का ध्यान मंत्र

ऊं सौवर्णासन-संस्थितां त्रिनयनां पीतांशुकोल्लासिनीम्।
हेमाभांगरुचिं शशांक-मुकुटां सच्चम्पक स्रग्युताम्।।
हस्तैर्मुद्गर पाश वज्ररसनाः संबिभ्रतीं भूषणैः।
व्याप्तांगीं बगलामुखीं त्रिजगतां संस्तम्भिनीं चिन्तयेत्।।" 

इस ध्यान मंत्र का अर्थ है- सोने के सिंहासन पर बैठी हुई तीन नेत्रों वाली, पीले वस्त्रों से सुशोभित, सोने के समान कांति वाली, मस्तक पर चंद्रमा धारण करने वाली, चंपा के फूलों की माला धारण करने वाली, हाथों में मुद्गर (गदा), पाश, वज्र और शत्रु की जींभ धारण करने वाली, आभूषणों से सुसज्जित, तीनों लोगों का स्तंभन करने वाली मां बगलामुखी का ध्यान करता हूं.

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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. न्यज नेशन इसकी पुष्टि नहीं करता है.

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