संयुक्त राष्ट्र महासभा की अध्यक्ष एनालेना बेयरबॉक अगले हफ्ते करेंगी भारत का दौरा
संयुक्त राष्ट्र, 24 अप्रैल (आईएएनएस)। संयुक्त राष्ट्र महासभा की अध्यक्ष एनालेना बेयरबॉक अगले हफ्ते भारत की आधिकारिक यात्रा पर आएंगी। यह जानकारी उनकी प्रवक्ता ला नीस कॉलिन्स ने दी।
प्रवक्ता ला नीस कॉलिन्स ने बताया कि भारत सरकार के निमंत्रण पर अपनी इस यात्रा के दौरान, बेयरबॉक अधिकारियों के साथ कई द्विपक्षीय बैठकें करेंगी। वह भारत में संयुक्त राष्ट्र की टीम से भी मिलेंगी, जिसका नेतृत्व रेजिडेंट कोऑर्डिनेटर स्टीफन प्रीसनर कर रहे हैं।
महासचिव एंटोनियो गुटेरेस की फरवरी में नई दिल्ली में एआई इम्पैक्ट समिट में शामिल होने के बाद यह भारत में संयुक्त राष्ट्र की दूसरी उच्च-स्तरीय यात्रा है।
बेयरबॉक पहले भी भारत की यात्रा कर चुकी हैं। जर्मनी की विदेश मंत्री के तौर पर अपनी एक यात्रा के दौरान उन्होंने भारत के साथ संबंधों को मजबूत करने के लिए दिल्ली मेट्रो में भी सफर किया था। हालांकि, महासभा की अध्यक्ष के तौर पर यह एनालेना बेयरबॉक की पहली भारत यात्रा है। भारत के बाद बेयरबॉक चीन की यात्रा पर जाएंगी।
2022 में मंत्री के तौर पर अपनी पहली यात्रा के दौरान उन्होंने कहा था, चाहे वह हिंद-प्रशांत क्षेत्र हो या उससे बाहर, इसमें कोई शक नहीं कि 21वीं सदी की अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को आकार देने में भारत एक अहम भूमिका निभाएगा।
उन्होंने आगे कहा कि भारत ने 15 सालों में 40 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकाला है, जो यह दिखाता है कि एक बहुलवादी समाज, स्वतंत्रता और लोकतंत्र ही आर्थिक विकास, शांति और स्थिरता के वाहक हैं।
उस यात्रा के दौरान हिंद-प्रशांत क्षेत्र चर्चा का मुख्य विषय रहा था। उन्होंने कुशल कर्मियों की आवाजाही को आसान बनाने के लिए प्रवासन और गतिशीलता समझौते पर हस्ताक्षर किए थे।
वह 2024 में जर्मनी-भारत के बीच सातवें अंतर-सरकारी परामर्श (आईजीसी) के लिए भारत आए चांसलर ओलाफ शोल्ज के साथ थीं। इसका मूलमंत्र था, नवाचार, गतिशीलता और स्थिरता के साथ मिलकर आगे बढ़ना।
जर्मनी जी-4 का सदस्य है। इस समूह में भारत के अलावा ब्राजील और जापान भी शामिल हैं। यह समूह सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यों को शामिल करके उसमें सुधार करने की वकालत करता है। ये चारों देश एक सुधारित सुरक्षा परिषद में स्थायी सीटों के लिए एक-दूसरे का समर्थन करते हैं।
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भारत की सोच दुनिया को एकता का रास्ता दिखा सकती है : आरएसएस
वाशिंगटन, 24 अप्रैल (आईएएनएस)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले ने कहा कि भारत की सभ्यतागत सोच दुनिया को एकजुट करने का रास्ता दिखा सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत आज ऐसे मोड़ पर खड़ा है, जहां वह एक अधिक शांतिपूर्ण और संतुलित वैश्विक व्यवस्था बनाने में बड़ी भूमिका निभा सकता है।
वाशिंगटन क्षेत्र में भारत का वैश्विक विजन और उभरते विश्व में उसकी भूमिका विषय पर आयोजित एक विशेष डिनर कार्यक्रम में होसबोले ने भारत के विचारों को विस्तार से रखा। उन्होंने कहा कि भारत की परंपराएं केवल अतीत की बात नहीं है, बल्कि आज की वैश्विक समस्याओं (जैसे सामाजिक विखंडन और पर्यावरण संकट) का समाधान भी दे सकती हैं।
होसबोले ने अपने संबोधन में कहा, भारत की सोच यह मानती है कि पूरे अस्तित्व में एक ही एकता है। यह एकता हर जीवित और निर्जीव चीज में मौजूद है। उन्होंने बताया कि यही विचार भारत के विश्व दृष्टिकोण की नींव है।
उन्होंने दुनिया की मौजूदा स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि इंसान ने भौतिक रूप से बहुत प्रगति की है, लेकिन मूल्यों के स्तर पर वह पीछे रह गया है। दत्तात्रेय होसबोले ने कहा, हमारे पास चीजें बढ़ी हैं, लेकिन मूल्य नहीं। हमारे पास ज्यादा ज्ञान है, लेकिन निर्णय लेने की समझ कम है। विशेषज्ञ बढ़े हैं, लेकिन समस्याएं भी बढ़ी हैं।
भारत के दृष्टिकोण को अलग बताते हुए, उन्होंने कहा कि यहां भौतिक विकास के साथ आध्यात्मिक समझ को भी महत्व दिया जाता है। उन्होंने कहा, भारत की सोच प्रकृति को मां मानती है। हमारी जरूरतों के लिए पर्याप्त है, लेकिन लालच के लिए नहीं।
विविधता पर बात करते हुए दत्तात्रेय होसबोले ने कहा कि इसे संघर्ष का कारण नहीं, बल्कि उत्सव की तरह देखा जाना चाहिए। विविधता मानव समाज की सुंदरता है। अलग-अलग संस्कृतियों को अपनी पहचान बनाए रखते हुए एकता के साथ जीना चाहिए।
दत्तात्रेय होसबोले ने कहा कि मानव समाज ने हमेशा अलग-अलग स्तरों पर संबंधों को समझने की कोशिश की है। मानव से मानव, मानव और प्रकृति, और मानव और सृष्टिकर्ता के बीच। लेकिन अंततः सभी रास्ते एक ही सत्य की ओर जाते हैं। सत्य एक है, लेकिन उसे पाने के कई रास्ते हैं।
भारत की वैश्विक भूमिका पर बोलते हुए दत्तात्रेय होसबोले ने कहा कि दुनिया एक परिवार है का विचार (वसुधैव कुटुंबकम) भारत ने केवल कहा नहीं, बल्कि उसे जीकर भी दिखाया है। उन्होंने ऐतिहासिक उदाहरणों का जिक्र करते हुए कहा कि भारत में अलग-अलग धर्मों के लोग लंबे समय से शांति से साथ रहते आए हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि अगर भारत को यह भूमिका निभानी है, तो उसे अंदर से मजबूत बनना होगा। भारत को आत्मविश्वासी और समृद्ध समाज बनना होगा, और आधुनिकता के साथ सांस्कृतिक मूल्यों को भी साथ लेकर चलना जरूरी है।
दत्तात्रेय होसबोले ने कहा कि भारत ने कभी विस्तारवादी नीति नहीं अपनाई। भारत ने कभी किसी पर हमला नहीं किया, न किसी को गुलाम बनाया। दुनिया के अलग-अलग देशों में बसे भारतीय वहां के विकास में योगदान देते हैं और समाज में सामंजस्य बनाए रखते हैं।
कार्यक्रम में मौजूद विदेशी नीति विशेषज्ञ वाल्टर रसेल मीड ने भी भारत की भूमिका पर सहमति जताई। उन्होंने कहा कि एक मजबूत, आत्मविश्वासी और दुनिया की ओर खुला भारत वैश्विक राजनीति को नया रूप दे सकता है और खासकर एशिया में टकराव को कम कर सकता है। दुनिया को एक मजबूत और संतुलित भारत की जरूरत है।
वहीं, लंबे समय से आरएसएस का अध्ययन कर रहे अकादमिक वाल्टर एंडरसन ने संगठन को भारत में स्थिरता लाने वाली ताकत बताया। उन्होंने कहा कि आरएसएस देशभक्ति पर जोर देता है और समय के साथ खुद को बदलने की क्षमता रखता है।
होसबोले ने यह भी कहा कि भारत केवल राजनीति में ही नहीं, बल्कि स्वास्थ्य और जीवनशैली के क्षेत्र में भी दुनिया को दिशा दे सकता है। उन्होंने कहा कि आज पूरी दुनिया योग और संतुलित जीवनशैली के लिए भारत की ओर देख रही है।
इस कार्यक्रम में कई सामुदायिक नेता, विद्वान और नीति-निर्माता शामिल हुए, जहां भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका और उसके विचारों पर गहन चर्चा हुई।
--आईएएनएस
वीकेयू/एएस
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