सिंहस्थ 2028: अमृत स्नान पर उज्जैन स्टेशन पर नहीं रुकेंगी ट्रेनें, फ्लैग स्टेशनों से होगा संचालन
सिंहस्थ 2028 को लेकर उज्जैन में तैयारियां तेज हो गई हैं। हर बार की तरह इस बार भी करोड़ों श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद है। ऐसे में प्रशासन और रेलवे मिलकर नई रणनीति तैयार कर रहे हैं, ताकि भीड़ को सही तरीके से संभाला जा सके।
अमृत स्नान के दिनों में उज्जैन रेलवे स्टेशन पर भारी भीड़ उमड़ती है। इस बार इस समस्या से निपटने के लिए एक बड़ा फैसला लिया गया है। अब अमृत स्नान के दौरान ट्रेनें सीधे उज्जैन स्टेशन पर नहीं रुकेंगी।
सिंहस्थ 2028 योजना: उज्जैन स्टेशन पर ‘नो हॉल्ट’ का फैसला
सिंहस्थ 2028 के दौरान अमृत स्नान के समय उज्जैन रेलवे स्टेशन पर ट्रेनों का ठहराव पूरी तरह बंद रहेगा। यह फैसला भीड़ नियंत्रण को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। इससे स्टेशन पर होने वाली अफरा-तफरी को रोका जा सकेगा। सिंहस्थ 2028 योजना के तहत श्रद्धालुओं को आसपास के फ्लैग स्टेशनों पर उतारा जाएगा।
फ्लैग स्टेशन बनेंगे श्रद्धालुओं के लिए मुख्य केंद्र
सिंहस्थ 2028 में पिंगलेश्वर, पंवासा, नईखेड़ी, मोहनपुरा, विक्रमनगर और चिंतामन जैसे स्टेशन अहम भूमिका निभाएंगे। इन फ्लैग स्टेशनों को विकसित किया जा रहा है। यहां प्लेटफार्म, शेड, फुटओवर ब्रिज और प्रतीक्षालय बनाए जा रहे हैं। नईखेड़ी स्टेशन को खास तौर पर बड़ा केंद्र बनाया जा रहा है। यहां चार प्लेटफार्म तैयार किए जा रहे हैं।
बसों से शिप्रा घाट तक पहुंचेंगे श्रद्धालु
फ्लैग स्टेशनों पर उतरने के बाद श्रद्धालुओं को बसों के जरिए शिप्रा नदी तक पहुंचाया जाएगा। इसके लिए खास बस सेवा शुरू की जाएगी। इससे लोगों को आसानी से घाट तक पहुंचने में मदद मिलेगी। यह व्यवस्था भीड़ को नियंत्रित करने में काफी मददगार साबित होगी।
50 हजार क्षमता वाला होल्डिंग एरिया तैयार
सिंहस्थ 2028 की तैयारी के तहत इंदौरगेट और नीलगंगा क्षेत्र में बड़ा होल्डिंग एरिया बनाया जा रहा है। यहां करीब 50 हजार यात्रियों को एक साथ रोका जा सकेगा। इससे प्लेटफार्म पर भीड़ कम होगी। यात्रियों को नियंत्रित तरीके से स्टेशन पर भेजा जाएगा।
रेलवे और प्रशासन का संयुक्त निरीक्षण
संभागायुक्त आशीष सिंह, एडीजी राकेश गुप्ता और अन्य अधिकारियों ने सभी स्टेशनों का निरीक्षण किया। उन्होंने सेल्फ प्रोपेल्ड इंस्पेक्शन कार से पूरे रूट का जायजा लिया। सिंहस्थ 2028 की तैयारियों को समय पर पूरा करने के लिए टेंडर भी जारी कर दिए गए हैं।
उज्जैन में जोर-शोर से चल रही है सिंहस्थ 2028 की तैयारी, पहले सेवा दे चुके अधिकारी फोर्स को कर रहे तैयार
उज्जैन में सिंहस्थ को लेकर तैयारियां का क्रम जोर शोर से चल रहा है। हर जगह तोड़फोड़ और फिर नए निर्माण किया जा रहे हैं। साल 2028 में आने वाले इस आयोजन का काउंटडाउन लगभग शुरू हो चुका है। इस साल 20 से 30 करोड़ श्रद्धालुओं के आने की संभावना जताई जा रही है। जिसे देखते हुए वृहद स्तर पर तैयारी की जा रही है।
सुरक्षा से लेकर, पार्किंग, भीड़ प्रबंधन, अखाड़े का स्नान और कई चीज ऐसी है, जिन पर काम किया जा रहा है। इन सारी चीजों को ध्यान में रखते हुए जो अधिकारी इस महापर्व के दौरान पहले से सेवा दे चुके हैं उनसे एक्सपर्ट के तौर पर मदद भी ले जा रही है। ये एक्सपर्ट्स इस बार व्यवस्था संभालने वाली फोर्स को प्रशिक्षण दे रहे हैं।
सिंहस्थ के लिए फोर्स का प्रशिक्षण
डीजीपी कैलाश मकवाना की ओर से उज्जैन के पुलिस सामुदायिक भवन में प्रदेश भर के एक्सपर्ट्स को बुलवाया गया है और फोर्स का 21 दिन का प्रशिक्षण शुरू किया गया है। शुक्रवार को इस प्रशिक्षण का पहला दिन है जिसमें जिसमें 2004 में उज्जैन आईजी रहे सेवानिवृत्ति डीजी सरबजीत सिंह और 2016 में एसपी रहे सेवानिवृत्ति डीआईजी मनोहर वर्मा पैदल मेला क्षेत्र घूम कर फोर्स को एक-एक बारीकी से अवगत कराते नजर आए।
अखाड़ों के स्नान रूट
अपने साथ फोर्स को लेकर पहुंचे एक्सपर्ट्स मेला क्षेत्र में शैव, वैष्णव, उदासीन, पंचायती, बड़ा उदासीन और सभी अखाड़ों के स्नान रूट की बारीकी समझते दिखाई दिए। स्नान को लेकर समय प्रबंधन का किस तरह ध्यान रखना है वह भी बताया गया।
चल रहा है चौड़ीकरण
सिंहस्थ को देखते हुए शहर भर में चौड़ीकरण का काम चल रहा है। इस बारे में अधिकारियों का कहना है कि रोड चौड़े होने की वजह से पिछले सिंहस्थ के मुकाबले काफी अंतर देखने को मिलेगा। आवागमन में श्रद्धालुओं को काफी आसानी होगी।
स्नान के लिए पर्याप्त घाट
लगभग 20 से 30 करोड़ लोगों के आने का आंकलन लगाया जा रहा है। श्रद्धालुओं की संख्या को देखते हुए पर्याप्त स्नान घाट मौजूद है। 29 किलोमीटर एरिया में घाटों का निर्माण करवाया गया है।
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