Strait of Hormuz Crisis: वैश्विक तेल संकट से बचने के लिए खाड़ी देशों ने बदली रणनीति, खोजा नया सुरक्षित रास्ता!
पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और युद्ध के खतरों ने खाड़ी देशों को अपनी रणनीति बदलने पर मजबूर कर दिया है, कच्चे तेल और गैस के सबसे बड़े निर्यातक देश अब होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपनी निर्भरता कम करने के लिए नए रास्तों की तलाश कर रहे हैं, ईरान और पश्चिमी देशों के बीच अक्सर होने वाले टकराव के कारण इस जलमार्ग के बंद होने का खतरा बना रहता है, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में बड़ा संकट पैदा हो सकता है।
दुनिया का लगभग 20% कच्चा तेल और भारी मात्रा में एलएनजी (LNG) होर्मुज के संकरे रास्ते से होकर गुजरता है, ईरान अक्सर अपनी शक्ति प्रदर्शन के लिए इस रणनीतिक मार्ग को बंद करने की धमकी देता रहता है, अगर भविष्य में कभी यह रास्ता बंद होता है तो वैश्विक तेल की कीमतें अचानक आसमान छू सकती हैं, इसी बड़े जोखिम से बचने के लिए सऊदी अरब और यूएई जैसे देश अब वैकल्पिक पाइपलाइन और नए बंदरगाहों पर अरबों डॉलर का भारी निवेश कर रहे हैं।
सऊदी अरब अपनी 'ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन' की क्षमता को कई गुना बढ़ा रहा है ताकि तेल की सप्लाई को सुरक्षित रखा जा सके, इसके जरिए कच्चे तेल को फारस की खाड़ी के बजाय सीधे लाल सागर के बंदरगाहों तक आसानी से पहुँचाया जा सकेगा, वहीं संयुक्त अरब अमीरात ने फुजैराह बंदरगाह को बेहद आधुनिक तरीके से विकसित किया है जो होर्मुज जलडमरूमध्य के बाहर स्थित है, जिससे तेल टैंकरों को सीधे ओमान की खाड़ी में सुरक्षित प्रवेश मिल जाता है और टकराव का खतरा टल जाता है।
ओमान अपनी भौगोलिक स्थिति का फायदा उठाते हुए नए स्टोरेज टर्मिनल और विशाल शिपिंग हब बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है, इराक भी तुर्की के माध्यम से एक महत्वाकांक्षी 'डेवलपमेंट रोड' प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है जो भविष्य की जरूरतों को पूरा करेगा, यह प्रोजेक्ट खाड़ी देशों को रेल और सड़क मार्ग के जरिए यूरोप और तुर्की के प्रमुख बंदरगाहों से सीधे तौर पर जोड़ देगा, इससे समुद्री रास्तों पर होने वाली किसी भी सैन्य हलचल या तनाव का असर अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा सप्लाई पर बिल्कुल नहीं पड़ेगा।
इन नए रास्तों के निर्माण से न केवल खाड़ी देशों की अर्थव्यवस्था सुरक्षित होगी बल्कि भारत और चीन जैसे बड़े खरीदारों को भी तेल की निर्बाध सप्लाई सुनिश्चित होगी, विशेषज्ञों का मानना है कि इन वैकल्पिक मार्गों के पूरी तरह तैयार होने से आने वाले समय में पश्चिम एशिया की कूटनीति में भी बड़ा बदलाव आएगा, अब ऊर्जा सप्लाई को केवल एक जलमार्ग के जरिए बंधक बनाना किसी भी देश के लिए मुमकिन नहीं होगा, इससे वैश्विक बाजार में स्थिरता आएगी और तेल की कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव पर भी काफी हद तक लगाम लग सकेगी।
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