पश्चिम एशिया तनाव के बीच विदेश मंत्रालय ने बताया- 24 घंटे में किसी भारतीय जहाज पर नहीं हुई फायरिंग
नई दिल्ली, 23 अप्रैल (आईएएनएस)। पश्चिम एशिया में जारी तनाव का असर दुनिया के तमाम देशों पर हो रहा है। इस बीच गल्फ के अतिरिक्त सचिव असीम आर महाजन ने बताया कि हालात पर पैनी नजर रखी जा रही है और भारतीय समुदाय के लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं। विदेश मंत्रालय ने यह भी जानकारी दी है कि बीते 24 घंटे में किसी भी भारतीय जहाज पर फायरिंग नहीं हुई है।
विदेश मंत्रालय में खाड़ी के अतिरिक्त सचिव असीम आर महाजन ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, विदेश मंत्रालय खाड़ी और पश्चिम एशिया क्षेत्र में हो रहे डेवलपमेंट पर करीब से नजर रख रहा है। भारतीय समुदाय की सुरक्षा और भलाई सबसे बड़ी प्राथमिकता है। एक खास कंट्रोल रूम चालू है, जिसमें क्षेत्र के मिशन 24x7 हेल्पलाइन चला रहे हैं, सलाह जारी कर रहे हैं और स्थानीय अधिकारियों, राज्य सरकारों और सामुदायिक संगठनों के साथ तालमेल बिठा रहे हैं, साथ ही नाविकों सहित भारतीय नागरिकों को मदद दे रहे हैं।
उन्होंने कहा, फ्लाइट ऑपरेशन बेहतर हो रहे हैं, 28 फरवरी से अब तक 12 लाख से ज्यादा पैसेंजर भारत आ चुके हैं। यूएई, सऊदी अरब, ओमान और बहरीन से और फ्लाइट्स चल रही हैं। कुछ एयरस्पेस पर अभी भी रोक है, लेकिन दूसरे रास्ते आसान किए जा रहे हैं, जिसमें ईरान से आर्मेनिया और अजरबैजान शामिल हैं। मिशन स्टूडेंट्स और नाविकों समेत भारतीय नागरिकों को निकालने, यात्रा और कॉन्सुलर सपोर्ट में मदद कर रहे हैं।
विदेश मंत्रालय के संयुक्त सचिव मुकेश मंगल ने बताया, इस इलाके में सभी भारतीय नाविक सुरक्षित हैं। शिपिंग महानिदेशालय के जरिए, मंत्रालय ने 2,680 से ज्यादा भारतीय नाविकों को सुरक्षित वापस लाने में मदद की है, जिसमें पिछले 24 घंटों में 65 नाविक शामिल हैं। पूरे भारत में सभी बंदरगाहों पर कामकाज सुरक्षित और सामान्य है, और कहीं भी जाम की कोई खबर नहीं है।
इसके साथ ही संयुक्त सचिव ने बीते 24 घंटे में किसी भी भारतीय जहाज पर फायरिंग ना होने की पुष्टि की और कहा कि किसी भी भारतीय जहाज पर फायरिंग नहीं हुई है। हालांकि, जहाजों पर मौजूद भारतीय लोगों की सुरक्षा को लेकर काफी चिंता है। जितनी भी फायरिंग हुई है, वह विदेशी झंडे वाले जहाजों पर हुई है।
दूसरी तरफ हर हफ्ते होने वाले मीडिया ब्रीफिंग में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, पश्चिम एशिया में जो संघर्ष चल रहा है, उसे लेकर हमारी नीति बहुत साफ है। हम हमेशा से शांति के पक्ष में खड़े रहते हैं। शांति के पक्ष में अगर कोई भी कदम उठाया जा रहा है, तो उसका हम समर्थन करते हैं। हमलोगों ने हमेशा से यह कहा है कि कोई भी मतभेद कूटनीति और संवाद के माध्यम से सुलझाया जाना चाहिए।
भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार वार्ता को लेकर उन्होंने बताया कि समझौते को लेकर वार्ता करने के लिए भारत की तरफ से टीम वॉशिंगटन में मौजूद है। रचनात्मक तरीके से ये वार्ता आगे बढ़ रही है। दोनों पक्षों की तरफ से संतुलित फायदे के लिए वार्ता की जा रही है।
--आईएएनएस
केके/एबीएम
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
मनोरंजन और ज्ञान ही नहीं बीमारियों को दूर करने में भी कारगर किताबें, जानें बिब्लियोथेरेपी के फायदे
नई दिल्ली, 23 अप्रैल (आईएएनएस)। 23 अप्रैल को दुनिया भर में किताबों के महत्व को रेखांकित करते हुए विश्व पुस्तक दिवस हर साल मनाया जाता है। इस खास मौके पर बता दें कि किताबें केवल मनोरंजन व ज्ञान ही नहीं बल्कि मानसिक सेहत को भी बेहतरीन करने का जरिया हैं।
आज की तेज रफ्तार जिंदगी में तनाव, चिंता और एंग्जायटी आम समस्याएं बन चुकी हैं। ऐसे में मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर रखने के लिए एक आसान, सस्ता और प्रभावी उपाय है बिब्लियोथेरेपी, यानी किताबों के माध्यम से मन का इलाज। दवाओं के बिना ही मन को शांत करने के आसान उपाय को बिब्लियोथेरेपी कहते हैं, जिसमें व्यक्ति अपनी समस्याओं से संबंधित किताबें, कहानियां, उपन्यास, या ऑडियोबुक्स पढ़कर खुद को बेहतर समझता है और समाधान ढूंढता है।
अमेरिकन नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन के अनुसार, इसमें कई प्रकार के कंटेंट का इस्तेमाल किया जाता है, जो मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद करती हैं। यह तरीका पूरी तरह गैर-औषधीय है। इसमें कोई दवा नहीं ली जाती। व्यक्ति अपनी पसंद और जरूरत के अनुसार किताब चुनता है। पढ़ते समय वह कहानी के किरदारों से जुड़ता है, उनकी समस्याओं को समझता है और खुद की जिंदगी में भी समाधान ढूंढने लगता है।
बिब्लियोथेरेपी से आत्मविश्वास बढ़ता है, भावनाओं का संतुलन होता है और मन शांत रहता है। रिसर्च में पाया गया है कि सर्जरी से पहले मरीजों में चिंता का स्तर बहुत अधिक होता है। बिब्लियोथेरेपी का उपयोग करने से उनकी घबराहट काफी कम हो जाती है। इससे ऑपरेशन के बाद की जटिलताएं भी घटती हैं। नर्स और स्वास्थ्यकर्मी आसानी से इस विधि को अपना सकते हैं। मरीज की उम्र, समझ और समस्या के अनुसार उपयुक्त किताबें चुनी जाती हैं।
रोजमर्रा की जिंदगी में भी बिब्लियोथेरेपी बहुत फायदेमंद साबित होती है। जो लोग लगातार तनाव, अवसाद या चिंता से जूझ रहे हैं, वे नियमित किताबें पढ़कर अपनी मानसिक स्थिति में सुधार ला सकते हैं। किताबें पढ़ने से दिमाग रचनात्मक बनता है, नकारात्मक विचार कम होते हैं और सकारात्मक सोच विकसित होती है।
बिब्लियोथेरेपी की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह सस्ती, आसान और घर बैठे की जा सकती है। किसी विशेष उपकरण या महंगे उपचार की जरूरत नहीं पड़ती। बस एक अच्छी किताब और थोड़ा समय काफी है। विशेषज्ञों का कहना है कि विश्व पुस्तक दिवस जैसे अवसर पर हमें यह याद दिलाना चाहिए कि किताबें सिर्फ ज्ञान का स्रोत नहीं, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य की मजबूत साथी भी हैं।
--आईएएनएस
एमटी/डीकेपी
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others
News Nation





















