ब्रिटेन के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ने एनएसए डोभाल से की मुलाकात, रक्षा सहयोग आगे बढ़ाने पर हुई चर्चा
नई दिल्ली, 23 अप्रैल (आईएएनएस)। ब्रिटेन के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जोनाथन पॉवेल भारत-ब्रिटेन रणनीतिक डायलॉग में शामिल होने के लिए नई दिल्ली पहुंचे। उन्होंने एनएसए अजीत डोभाल के साथ द्विपक्षीय बैठक की। दोनों नेताओं के बीच भारत-ब्रिटेन व्यापक रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने पर चर्चा हुई। उन्होंने भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर से भी मुलाकात की।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने मुलाकात की तस्वीरें सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा करते हुए लिखा, एनएसए ने 23 अप्रैल को वार्षिक भारत-ब्रिटेन रणनीतिक डायलॉग के लिए ब्रिटेन के समकक्ष जोनाथन पॉवेल का नई दिल्ली में स्वागत किया।
विदेश मंत्रालय ने बताया कि उन्होंने भारत-ब्रिटेन व्यापक रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने पर बड़े स्तर पर बातचीत की, जिसमें रक्षा और सुरक्षा सहयोग को मजबूत करना भी शामिल था। उन्होंने क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों पर भी अपने विचार शेयर किए।
इसके अलावा ब्रिटेन के एनएसए ने भारत के विदेश मंत्री से मुलाकात की। डॉ. एस जयशंकर ने मुलाकात की तस्वीरें साझा कर लिखा, आज दोपहर नई दिल्ली में ब्रिटेन के एनएसए जोनाथन पॉवेल से मिलकर खुशी हुई। हमारी चर्चा क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा मुद्दों के साथ-साथ बढ़ते भारत-ब्रिटेन सहयोग पर केंद्रित थी।
भारत और ब्रिटेन के प्रधानमंत्रियों ने 24 जुलाई 2025 को लंदन में अपनी मीटिंग के दौरान नए भारत-ब्रिटेन विजन 2035 को मंजूरी दी। यह एक नई साझेदारी की पूरी क्षमता को अनलॉक करने की उनकी साझा प्रतिबद्धता को सुनिश्चित करता है। दोनों देशों के बीच जो यह समझौता हुआ, वह भविष्य पर केंद्रित है। इसके साथ ही यह दोनों देशों के आपसी विकास और खुशहाली के लिए मिलकर काम करने और तेजी से बदलते वैश्विक बदलाव के समय में एक खुशहाल, सुरक्षित और सस्टेनेबल दुनिया बनाने के इरादे को दिखाता है।
यह साझेदारी 2035 तक भारत-ब्रिटेन के संबंध को फिर से तय करेंगी, जिससे दोनों देशों को बदलाव लाने वाले मौके और ठोस फायदे मिलेंगे। भारत-ब्रिटेन विजन 2035 में साफ रणनीतिक लक्ष्य और माइलस्टोन तय किए गए हैं, जो भविष्य में लगातार सहयोग और नवाचार के लिए रास्ता दिखाते हैं।
बता दें कि हाल में एनएसए अजीत डोभाल सऊदी अरब के दौरे पर पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने रियाद में कई वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात की। रियाद में भारतीय दूतावास ने एक बयान में बताया कि मुलाकात में कई मुद्दों पर बात हुई, जिसमें आपसी सहयोग, क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़ी चिंताएं और आपसी फायदे के मामले शामिल थे।
--आईएएनएस
केके/एबीएम
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
एआई और नई टेक्नोलॉजी पर भरोसा, लेकिन सतर्कता जरूरी: एक्सपर्ट्स
नई दिल्ली, 23 अप्रैल (आईएएनएस)। एफआईसीसीआई द्वारा आयोजित 6वें पीआईसीयू फिनटेक कॉन्फ्रेंस में इंडियन बैंकिंग सेक्टर के दिग्गजों ने नई तकनीकों और डिजिटल पेमेंट सिस्टम को लेकर अपने विचार साझा किए।
न्यूज एजेंसी आईएएनएस से बात करते हुए इंडियन बैंक्स एसोसिएशन के सीनियर एडवाइजर सुरिंदर कुमार थापर ने कहा कि हर नई तकनीक के साथ कुछ जोखिम जरूर आते हैं, लेकिन इनसे निपटने के लिए मजबूत सुरक्षा व्यवस्था (गार्डरेल्स) भी मौजूद होती है।
उन्होंने कहा कि किसी भी तकनीक को अपनाने से पहले उसका सही तरीके से परीक्षण किया जाता है और जरूरी सिस्टम लगाए जाते हैं। इसलिए एआई या एजेंटिक टेक्नोलॉजी से जुड़े बड़े खतरे फिलहाल नजर नहीं आते, क्योंकि इन पर लगातार निगरानी और सुधार किया जा रहा है।
थापर ने डिजिटल पेमेंट में यूपीआई की भूमिका को बेहद अहम बताया। उन्होंने कहा कि यूपीआई ने भारत को तेजी से कैशलेस इकोनॉमी की ओर बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभाई है। आज देश में यूपीआई के जरिए होने वाले ट्रांजैक्शन और उनकी कुल राशि में कई गुना बढ़ोतरी हुई है।
उन्होंने यह भी कहा कि अब छोटे दुकानदार भी आसानी से यूपीआई से पेमेंट स्वीकार कर रहे हैं, जो इस बात का संकेत है कि डिजिटल पेमेंट सिस्टम देश के हर कोने तक पहुंच चुका है।
वहीं, बिजनेसनेक्स्ट के सीईओ निशांत सिंह ने आईएएनएस से बात करते हुए साइबर सुरक्षा को लेकर अहम बात कही। उन्होंने कहा कि साइबर सिक्योरिटी का खतरा सिर्फ एआई तक सीमित नहीं है, लेकिन एआई के कारण यह और ज्यादा बढ़ गया है। हालांकि, यह जोखिम पहले से मौजूद थे, लेकिन अब उनका दायरा और प्रभाव बढ़ गया है।
उन्होंने बताया कि सरकार लगातार लोगों को जागरूक करने के लिए कई कार्यक्रम चला रही है, जिससे लोग डिजिटल फ्रॉड और साइबर खतरों से बच सकें।
निशांत सिंह ने यह भी कहा कि यूपीआई जैसे प्लेटफॉर्म अब लोगों को परिवार के अन्य सदस्यों को भी जोड़ने की सुविधा दे रहे हैं। इससे घर के युवा सदस्य, जो तकनीक में ज्यादा माहिर होते हैं, वे अपने माता-पिता या बुजुर्गों की मदद कर सकते हैं। इससे डिजिटल लेनदेन और भी सुरक्षित और आसान बन रहा है।
--आईएएनएस
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