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हार्ट ब्लॉकेज का सबसे अच्छा इलाज क्या है? जानिए Heart Blockage खोलने के लिए क्या खाना चाहिए

Heart Blockage: हार्ट ब्लॉकेज हो जाने पर दिल से जुड़ी दिक्कतें बढ़ जाती हैं और शरीर बुरी तरह से प्रभावित होने लगता है. ऐसे में यहां जानिए हार्ट ब्लॉकेज खोलने के लिए क्या खाने पर फायदा मिलता है.

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Ganga Saptami 2026: 'ऊं जय गंगे माता,मैया जय गंगे माता'..., गंगा सप्तमी पर मां गंगा की आरती और चालीसा पढ़ें, मिलेगी अनजाने पापों से मुक्ति

Ganga Saptami 2026: गंगा सप्तमी का पर्व आज विधि-विधान के साथ मनाया जा रहा है. हर साल वैशाख माह के शुक्ल पक्ष कि सप्तमी तिथि के दिन यह पर्व पड़ता है जिसे गंगा जयंती भी कहा जाता है. धार्मिक मान्यता है कि माता गंगा ने लोक कल्याण करने के लिए धरती पर अवतरित होने का आशीर्वाद राजा भागीरथ को दिया था. ऐसा इसलिए, ताकि उनके पूर्वजों की आत्मा को शांति मिल सके. सप्तमी तिथि पर वे शिव जी की जटाओं से निकली थी. इसके बाद गंगा दशहरा के दिन वे धरती पर अवतरित हुई थी. आज गंगा सप्तमी के दिन माता गंगा की पूजा जरूर करनी चाहिए. उनकी पूजा में गंगा माता की आरती और चालीसा का पाठ जरूर करना चाहिए. 

मां गंगा आरती (Mata Ganga Aarti Lyrics)

ऊं जय गंगे माता,मैया जय गंगे माता।

जो नर तुमको ध्याता,मनवांछित फल पाता॥

ऊं जय गंगे माता॥

चन्द्र-सी ज्योति तुम्हारी,जल निर्मल आता।

शरण पड़े जो तेरी,सो नर तर जाता॥

ऊं जय गंगे माता॥

पुत्र सगर के तारे,सब जग को ज्ञाता।

कृपा दृष्टि हो तुम्हारी,त्रिभुवन सुख दाता॥

ऊं जय गंगे माता॥

एक बार जो प्राणी,शरण तेरी आता।

यम की त्रास मिटाकर,परमगति पाता॥

ऊं  जय गंगे माता॥

आरती मातु तुम्हारी,जो नर नित गाता।

सेवक वही सहज में,मुक्ति को पाता॥

ऊं जय गंगे माता॥

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श्री गंगा चालीसा। Ganga Chalisa Lyrics in Hindi

दोहा

जय जय जय जग पावनी,जयति देवसरि गंग।

जय शिव जटा निवासिनी,अनुपम तुंग तरंग॥

चौपाई

जय जय जननी हराना अघखानी।आनंद करनी गंगा महारानी॥

जय भगीरथी सुरसरि माता।कलिमल मूल डालिनी विख्याता॥

जय जय जहानु सुता अघ हनानी।भीष्म की माता जगा जननी॥

धवल कमल दल मम तनु सजे।लखी शत शरद चन्द्र छवि लजाई॥

वहां मकर विमल शुची सोहें।अमिया कलश कर लखी मन मोहें॥

जदिता रत्ना कंचन आभूषण।हिय मणि हर, हरानितम दूषण॥

जग पावनी त्रय ताप नासवनी।तरल तरंग तुंग मन भावनी॥

जो गणपति अति पूज्य प्रधान।इहूं ते प्रथम गंगा अस्नाना॥

ब्रह्मा कमंडल वासिनी देवी।श्री प्रभु पद पंकज सुख सेवि॥

साथी सहस्र सागर सुत तरयो।गंगा सागर तीरथ धरयो॥

अगम तरंग उठ्यो मन भवन।लखी तीरथ हरिद्वार सुहावन॥

तीरथ राज प्रयाग अक्षैवेता।धरयो मातु पुनि काशी करवत॥

धनी धनी सुरसरि स्वर्ग की सीधी।तरनी अमिता पितु पड़ पिरही॥

भागीरथी ताप कियो उपारा।दियो ब्रह्म तव सुरसरि धारा॥

जब जग जननी चल्यो हहराई।शम्भु जाता महं रह्यो समाई॥

वर्षा पर्यंत गंगा महारानी।रहीं शम्भू के जाता भुलानी॥

पुनि भागीरथी शम्भुहीं ध्यायो।तब इक बूंद जटा से पायो॥

ताते मातु भें त्रय धारा।मृत्यु लोक, नाभा, अरु पातारा॥

गईं पाताल प्रभावती नामा।मन्दाकिनी गई गगन ललामा॥

मृत्यु लोक जाह्नवी सुहावनी।कलिमल हरनी अगम जग पावनि॥

धनि मइया तब महिमा भारी।धर्मं धुरी कलि कलुष कुठारी॥

मातु प्रभवति धनि मंदाकिनी।धनि सुर सरित सकल भयनासिनी॥

पन करत निर्मल गंगा जल।पावत मन इच्छित अनंत फल॥

पुरव जन्म पुण्य जब जागत।तबहीं ध्यान गंगा महं लागत॥

जई पगु सुरसरी हेतु उठावही।तई जगि अश्वमेघ फल पावहि॥

महा पतित जिन कहू न तारे।तिन तारे इक नाम तिहारे॥

शत योजन हूं से जो ध्यावहिं।निशचाई विष्णु लोक पद पावहीं॥

नाम भजत अगणित अघ नाशै।विमल ज्ञान बल बुद्धि प्रकाशे॥

जिमी धन मूल धर्मं अरु दाना।धर्मं मूल गंगाजल पाना॥

तब गुन गुणन करत दुख भाजत।गृह गृह सम्पति सुमति विराजत॥

गंगहि नेम सहित नित ध्यावत।दुर्जनहूं सज्जन पद पावत॥

उद्दिहिन विद्या बल पावै।रोगी रोग मुक्त हवे जावै॥

गंगा गंगा जो नर कहहीं।भूखा नंगा कभुहुह न रहहि॥

निकसत ही मुख गंगा माई।श्रवण दाबी यम चलहिं पराई॥

महं अघिन अधमन कहं तारे।भए नरका के बंद किवारें॥

जो नर जपी गंग शत नामा।सकल सिद्धि पूरण ह्वै कामा॥

सब सुख भोग परम पद पावहीं।आवागमन रहित ह्वै जावहीं॥

धनि मइया सुरसरि सुख दैनि।धनि धनि तीरथ राज त्रिवेणी॥

ककरा ग्राम ऋषि दुर्वासा।सुन्दरदास गंगा कर दासा॥

जो यह पढ़े गंगा चालीसा।मिली भक्ति अविरल वागीसा॥

दोहा

नित नए सुख सम्पति लहैं,धरें गंगा का ध्यान।

अंत समाई सुर पुर बसल,सदर बैठी विमान॥

संवत भुत नभ्दिशी,राम जन्म दिन चैत्र।

पूरण चालीसा किया,हरी भक्तन हित नेत्र॥

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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. न्यज नेशन इसकी पुष्टि नहीं करता है.

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