Responsive Scrollable Menu

Lok Sabha में विपक्ष के हंगामे के बीच सरकार ने पेश किए 4 Bill, कार्यवाही हुई स्थगित

राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी और प्रदर्शनकारी छात्रों पर पुलिस कार्रवाई के मुद्दों पर विपक्षी दलों के सदस्यों के हंगामे के कारण सोमवार को लोकसभा की कार्यवाही एक बार के स्थगन के बाद अपराह्न दो बजे तक स्थगित कर दी गई। सदन की कार्यवाही एक बार के स्थगन के बाद अपराह्न दो बजे तक स्थगित कर दी गई। विपक्ष के हंगामे के बीच ही सरकार ने न्यायाधिकरण सुधार विधेयक, 2026, खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026, केरल (नाम परिवर्तन) विधेयक, 2026, और राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (संशोधन) विधेयक, 2026 पेश किए। संसद के मानसून सत्र के चौथे सप्ताह की शुरुआत भी पिछले तीन सप्ताह की तरह ही हंगामेदार रही। 
 

इसे भी पढ़ें: Lok Sabha में सोमवार को पेश होगा NCDC Bill, सहकारी संस्थाओं को सीधे कर्ज का प्रावधान


कार्यवाही 11 बजे शुरू होते ही कांग्रेस और समाजवादी पार्टी समेत विपक्षी दलों के सदस्य अयोध्या के राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी के विरोध में और दिल्ली में प्रदर्शनकारी छात्रों पर पुलिस कार्रवाई के मुद्दे पर गृह मंत्री अमित शाह के बयान की मांग को लेकर शोर-शराबा करने लगे। आसन पर आज आरएसपी नेता एन के प्रेमचंद्रन थे जिन्होंने प्रश्नकाल शुरू कराने का प्रयास किया। सामान्य तौर पर लोकसभा में प्रश्नकाल की कार्यवाही के समय आसन पर अध्यक्ष ओम बिरला होते हैं। हंगामा जारी रहने पर प्रेमचंद्रन ने बैठक शुरू होने के एक मिनट के अंदर दोपहर 12 बजे तक स्थगित कर दी। सदन की कार्यवाही फिर से आरंभ होने पर विपक्षी सदस्य नारेबाजी करने लगे। हंगामे के बीच ही पीठासीन सभापति संध्या राय ने आवश्यक कागजात सदन के पटल पर रखवाए। विधि एवं न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने न्यायाधिकरण सुधार विधेयक, 2026 और कोयला एवं खान मंत्री जी किशन रेड्डी ने खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 हंगामे के बीच ही पेश किए। 
 

इसे भी पढ़ें: Sukhbir Badal ने महिला आरक्षण बिल तुरंत लागू करने की मांग की, Delimitation Bill पर भी समर्थन का ऐलान


गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने केरल (नाम परिवर्तन) विधेयक, 2026 और सहकारिता राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (संशोधन) विधेयक, 2026 पेश किए। हालांकि, उक्त दोनों विधेयक केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह के नाम से सूचीबद्ध थे। इस दौरान विपक्ष के सदस्य ‘गृह मंत्री कहां हैं’ कहते सुने गए। पीठासीन सभापति संध्या राय ने विधेयकों को पेश किए जाने का विरोध करने के लिए कुछ विपक्षी सदस्यों के नाम पुकारे, लेकिन विपक्ष की तरफ नारेबाजी जारी रही। हंगामा नहीं थमने पर उन्होंने दोपहर 12 बजकर 14 मिनट पर सदन की बैठक अपराह्न दो बजे तक के लिए स्थगित कर दी।
 
देशभर की राजनीति, ताज़ा घटनाओं और बड़ी खबरों से जुड़े रहने के लिए पढ़ें  National News in Hindi केवल प्रभासाक्षी पर। 

Continue reading on the app

Uttarakhand: Dhami सरकार की दूरदर्शी रणनीति, आपदा के बाद पुनर्वास और बेहतर भविष्य की तैयारी

उत्तराखंड में आपदा कभी सिर्फ एक हेडलाइन नहीं होती। उत्तराखंड के लोगों के लिए, जब पहाड़ खिसकते हैं, तो इसका असर घरों, रोज़ी-रोटी और रोज़मर्रा की ज़िंदगी पर पड़ता है। सड़कें गायब हो जाती हैं, कारोबार ठप हो जाते हैं और परिवार यह सोचने पर मजबूर हो जाते हैं कि अब आगे क्या होगा। उत्तराखंड के शानदार पहाड़ और घाटियाँ इसे भारत के सबसे बड़े पर्यटन स्थलों में से एक बनाती हैं, लेकिन यहाँ की ऊबड़-खाबड़ भौगोलिक बनावट इसे भूस्खलन और बादल फटने जैसी प्राकृतिक आपदाओं के प्रति संवेदनशील बनाती है, जिनके दूरगामी परिणाम होते हैं।
 

इसे भी पढ़ें: Ganga Expressway का हरिद्वार तक होगा विस्तार, Uttarakhand कैबिनेट ने दी मंजूरी



ऐसे हालात में, पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड सरकार ने प्राकृतिक आपदाओं के बाद न केवल राहत कार्यों पर, बल्कि पुनर्वास और पुनर्निर्माण पर भी ज़ोर दिया है। ‘धामी मॉडल’ इसी पर केंद्रित है – परिवारों का पुनर्वास और आपदा की तैयारी। एक साल पहले, धराली और थराली में बादल फटने और भारी मात्रा में मलबा जमा होने की घटनाएँ हुई थीं। ऐसे में सबसे ज़रूरी काम लोगों की जान बचाना और उन्हें राहत पहुँचाना था। हालाँकि, प्रभावित परिवारों का पुनर्वास एक बड़ी चिंता का विषय था। पहाड़ी इलाकों में सिर्फ़ एक सड़क के बंद होने का मतलब है स्कूलों, बाज़ारों और अस्पतालों तक पहुँच का बाधित होना। यही बात बिजली और पानी के बुनियादी ढांचे पर भी लागू होती है, जो बड़े पैमाने पर समुदाय को प्रभावित कर सकते हैं। इसलिए, राहत कार्यों के तुरंत बाद ही पुनर्निर्माण पर ध्यान दिया गया। 

बचाव से लेकर पुनर्वास तक

सबसे पहले तुरंत कार्रवाई की गई। बचाव और राहत कार्यों के लिए SDRF, NDRF, भारतीय सेना और स्थानीय प्रशासन को तैनात किया गया। मेडिकल मदद और ज़रूरी सामान का इंतज़ाम किया गया, साथ ही बहाली का काम भी शुरू हुआ। धामी ने प्रभावित इलाकों का दौरा किया, परिवारों से मुलाक़ात की और ज़मीनी स्तर पर बहाली के काम का जायज़ा लिया। उन्होंने अधिकारियों को मुआवज़े, बुनियादी ढांचे की मरम्मत और ज़रूरी सेवाओं में देरी न करने के निर्देश दिए।

धराली, थराली, हर्षिल और भटवारी में सड़कें, बिजली और पीने के पानी की व्यवस्था को फिर से ठीक करना ज़रूरी था। जिन परिवारों के घर और रोज़गार को नुकसान पहुँचा था, उन्हें भी दोबारा शुरुआत करने के लिए मदद की ज़रूरत थी। पहाड़ों में ये कोई मामूली मरम्मत का काम नहीं है। सड़क बंद होने से बाज़ार, स्कूल और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँच खत्म हो सकती है। सिंचाई की नहर खराब होने से खेती का एक पूरा सीज़न खतरे में पड़ सकता है। पानी या बिजली की लाइन टूटने से पूरे गाँव की व्यवस्था बिगड़ सकती है। सरकार का कहना है कि अगले एक साल में राहत, पुनर्वास और विकास के लिए ₹33 करोड़ से ज़्यादा की रकम मंज़ूर की गई है।

रिकवरी के लिए ₹33 करोड़ से ज़्यादा की राशि

पशुपालन, सिंचाई, बागवानी, कृषि, ग्रामीण विकास, ऊर्जा, पर्यटन, लोक निर्माण और खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति जैसे विभागों के ज़रिए ₹16 करोड़ से ज़्यादा का निवेश किया गया है। इसके अलावा, अलग-अलग राहत उपायों के तहत प्रभावित परिवारों को सीधे ₹17 करोड़ से ज़्यादा की राशि दी गई है। रिकवरी में लोगों की आजीविका पर भी ध्यान दिया गया है। सरकार का कहना है कि मदद में खराब हुए बागों के लिए मुआवज़ा, बकरी और भेड़ पालन में सहायता, फ़सल और पौधे बांटना और खेती का काम फिर से शुरू करने के उपाय शामिल हैं। उत्तराखंड के किसी परिवार के लिए, बाग को फिर से लगाना, मवेशियों की भरपाई करना या खेती में लौटना सिर्फ़ संपत्ति को वापस पाने जैसा नहीं है। यह उस आमदनी को वापस पाने के बारे में भी है जो इससे मिलती है।


आपदा प्रबंधन के प्रयास

राहत और रिकवरी के प्रयासों के अलावा, सरकार भविष्य की आपदाओं से होने वाले नुकसान को कम करने की कोशिश कर रही है। इसमें बेहतर प्रबंधन सुनिश्चित करने के लिए चेतावनी प्रणालियाँ, मौसम की जानकारी देने वाले प्लेटफ़ॉर्म और मॉक ड्रिल आयोजित करना शामिल है। अन्य उपायों के अलावा, भविष्य की आपदाओं से होने वाले नुकसान को कम करने के लिए नदी के किनारों पर बाढ़ से बचाव की दीवारें बनाना, अस्थिर पहाड़ी ढलानों को स्थिर करना और आधुनिक इंजीनियरिंग तकनीकों को लागू करना भी महत्वपूर्ण कदम माने गए हैं।

धामी सरकार ने परिवारों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी

आपदा के बाद की कार्रवाई और प्रयासों की समीक्षा करते हुए, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस बात पर ज़ोर दिया कि धराली में समस्या सिर्फ़ बुनियादी ढांचे के पुनर्निर्माण की नहीं थी, बल्कि प्रभावित परिवारों की जान और भविष्य को सुरक्षित करने की भी थी। इस रणनीति में तत्काल राहत, लंबे समय तक पुनर्वास और आजीविका के साथ-साथ आपदा की तैयारी के पहलुओं को भी ध्यान में रखा गया है।
 

इसे भी पढ़ें: Rishabh Pant उत्तराखंड का गौरव! CM Dhami ने जमीन मामले पर दिए अधिकारियों को निर्देश


अगली आपदा को ध्यान में रखकर पुनर्निर्माण: 

सरकार ने पुनर्निर्माण को तैयारी से भी जोड़ा है। उत्तराखंड ने समय पर अलर्ट और ऑपरेशनल तैयारी के लिए टेक्नोलॉजी, अर्ली वार्निंग सिस्टम, मौसम पर नज़र रखने वाले प्लेटफॉर्म और नियमित मॉनसून रिव्यू ड्रिल का इस्तेमाल करते हुए एक प्रोएक्टिव आपदा प्रबंधन ढांचा तैयार किया है। साथ ही, आपदा-रोधी पहाड़ी इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी ध्यान दिया जा रहा है, जिसमें भूस्खलन रोकने वाली दीवारें, नदी के किनारों की सुरक्षा और सस्टेनेबल इंजीनियरिंग शामिल हैं, और इसके साथ ही सभी जिलों में स्थानीय फर्स्ट-रिस्पॉन्डर टीमों के उपकरण और क्षमता को भी मजबूत किया जा रहा है। मुख्यमंत्री कार्यालय के अनुसार, नदी के किनारों पर बाढ़ से बचाव के काम में भी तेज़ी लाई गई है। हालांकि, हिमालयी राज्य के लिए पुनर्निर्माण की अपनी चुनौतियां हैं। इंफ्रास्ट्रक्चर के पुनर्निर्माण के समय ढलान की स्थिरता, जल निकासी, नदी का व्यवहार और ज़मीन के इस्तेमाल का दबाव - ये सभी बातें मायने रखती हैं। इसलिए सरकार का मकसद सिर्फ़ उन कमज़ोरियों को दोबारा पैदा होने से रोकना है जो आपदा से पहले मौजूद थीं।
 
देशभर की राजनीति, ताज़ा घटनाओं और बड़ी खबरों से जुड़े रहने के लिए पढ़ें  National News in Hindi केवल प्रभासाक्षी पर। 

Continue reading on the app

  Sports

ICC के खिलाफ उतरे ये दो देश, 2027 वनडे वर्ल्ड कप के नए फॉर्मेट पर बवाल, क्या है पूरा मामला

ODI World Cup 2027: आईसीसी ने हाल ही में 2027 वर्ल्ड कप के फॉर्मेट में बदलाव करते हुए सुपर सीरीज स्टेज को शामिल किया है, जो एक बड़ा विवाद बन गया है. Tue, 11 Aug 2026 08:50:32 +0530

  Videos
See all

Parliament Monsoon Session : आज भी संसद में हंगामा होगा? चढ़ावा चोरी के मुद्दे पर होगा बवाल? Congress #tmktech #vivo #v29pro
2026-08-11T04:16:47+00:00

Rajkot में कार का कहर! 2 वाहनों को मारी जोरदार टक्कर | #shorts #shortvideo #viralvideo #viralshorts #tmktech #vivo #v29pro
2026-08-11T04:15:59+00:00
Editor Choice
See all
Photo Gallery
See all
World News
See all
Top publishers