पोषण संबंधी सलाह व्यक्तिगत होनी चाहिए, मानकीकृत नहीं: केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह
नई दिल्ली, 22 अप्रैल (आईएएनएस)। केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने बुधवार को चेतावनी दी कि आहार और जीवनशैली से संबंधित बीमारियों के बारे में जागरूकता गलत सूचना फैलाने वाले व्यक्तियों से नहीं लेनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि पोषण के क्षेत्र में गलत सूचना के प्रसार को रोकने के लिए विशेष ध्यान देना चाहिए और आहार को एक समान नुस्खे तक सीमित नहीं करना चाहिए। व्यक्तियों को अपने शरीर, जीवनशैली और चयापचय संबंधी आवश्यकताओं के अनुसार खान-पान की आदतों को अपनाना चाहिए।
मंत्री ने स्वास्थ्य सेवा और आहार संबंधी सलाह देने के क्षेत्र में बढ़ते व्यवसायीकरण के खिलाफ चेतावनी दी और कहा कि आकर्षक या अत्यधिक जटिल आहार योजनाएं अक्सर व्यावहारिक प्रासंगिकता की कमी के बावजूद लोकप्रियता हासिल कर लेती हैं।
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के एक बयान में कहा गया है कि डॉ. सिंह ने भोजन की गुणवत्ता और मात्रा के साथ-साथ उसके वितरण के महत्व पर भी जोर दिया और बताया कि आम तौर पर आहार के समय और मात्रा पर ध्यान नहीं दिया जाता है।
मंत्री ने परिष्कृत तेलों से लेकर पारंपरिक वसाओं तक, चीनी के विकल्प से लेकर प्राकृतिक विकल्पों तक, विभिन्न प्रकार के खाद्य पदार्थों पर वर्षों से विकसित हो रहे आहार संबंधी रुझानों और वैज्ञानिक दृष्टिकोण में आए बदलावों पर प्रकाश डाला, जिससे यह संकेत मिलता है कि पोषण के क्षेत्र में वैज्ञानिक समझ लगातार विकसित हो रही है।
उन्होंने कहा कि आहार विज्ञान में निष्कर्ष अक्सर जनसंख्या स्तर के साक्ष्यों पर आधारित होते हैं और जरूरी नहीं कि वे हर व्यक्ति पर समान रूप से लागू हों।
डॉ. सिंह ने नैदानिक निर्णय और रोगी के साथ संवाद के महत्व पर भी बल दिया, और उस दौर को याद किया जब निदान काफी हद तक विस्तृत इतिहास और अवलोकन पर निर्भर करता था। उन्होंने कहा कि रिपोर्टों और मानकीकृत नुस्खों पर अत्यधिक निर्भरता कभी-कभी व्यक्तिगत भिन्नताओं को नजरअंदाज कर सकती है।
उन्होंने टिप्पणी की कि आहार इतना महत्वपूर्ण विषय है कि इसे किसी एक समूह पर नहीं छोड़ा जा सकता, और कहा कि व्यक्तियों को समय के साथ अपने आहार संबंधी प्रतिक्रियाओं का सक्रिय रूप से अवलोकन करना और उनसे सीखना चाहिए।
मंत्री एक पुस्तक विमोचन कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे, जिसमें चिकित्सा और वैज्ञानिक समुदाय के प्रमुख सदस्य शामिल हुए थे, जिनमें वरिष्ठ चिकित्सक और मधुमेह एवं पोषण के विशेषज्ञ शामिल थे।
--आईएएनएस
एमएस/
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
मुंबई में भारत-जापान एआई रणनीतिक संवाद से तकनीकी सहयोग को मिली नई गति
नई दिल्ली, 22 अप्रैल (आईएएनएस)। मुंबई में आयोजित पहला भारत-जापान आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) रणनीतिक संवाद दोनों देशों के बीच उभरती तकनीकों में सहयोग को नई दिशा देने वाला महत्वपूर्ण कदम रहा।
मुंबई में आयोजित इस संवाद की सह-अध्यक्षता भारत सरकार के विदेश मंत्रालय में संयुक्त सचिव (साइबर कूटनीति) अमित ए. शुक्ला और जापान सरकार के विदेश मंत्रालय में साइबर सुरक्षा के लिए उप सहायक मंत्री हानाडा ताकाहिरो ने की।
संवाद में दोनों सरकारों के संबंधित मंत्रालयों, विभागों और एजेंसियों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इसमें एक ऐसा सत्र भी शामिल था, जिसमें दोनों पक्षों की सरकारों और एआई उद्योग के प्रतिनिधियों को एक मंच पर लाया गया।
दोनों पक्षों ने पूरे एआई स्टैक में रणनीतिक सहयोग पर गहन चर्चा की। इसका उद्देश्य सह-निर्माण को बढ़ावा देना, नीतियों में तालमेल बढ़ाना और औद्योगिक क्षेत्रों में एआई समाधानों के विकास को प्रोत्साहित करना था, ताकि एक मजबूत, अभिनव और भरोसेमंद एआई पारिस्थितिकी तंत्र तैयार किया जा सके।
इस संवाद में एआई क्षेत्र के विशेषज्ञों (टैलेंट) की अंतरराष्ट्रीय आवाजाही को सुगम बनाने और आदान-प्रदान और सहयोगात्मक परियोजनाओं के माध्यम से संयुक्त अनुसंधान का विस्तार करने के तरीकों पर भी विचार-विमर्श किया गया। इसके अलावा, दोनों पक्षों ने एआई के शासन (गवर्नेंस), नीति निर्माण और बहुपक्षीय मंचों पर आपसी सहयोग को लेकर भी चर्चा की।
यह एआई रणनीतिक संवाद भारत-जापान एआई सहयोग पहल को आगे बढ़ाता है। इस पहल की घोषणा भारत और जापान के प्रधानमंत्रियों ने अगस्त 2025 में की थी।
इस क्षेत्र में सहयोग अगले दशक के लिए भारत-जापान संयुक्त दृष्टिकोण का एक केंद्रीय स्तंभ है। दोनों देशों ने एआई के क्षेत्र में अगले दशक के दौरान आने वाली चुनौतियों और अवसरों का मिलकर सामना करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। इसका उद्देश्य दोनों देशों के अपने-अपने घरेलू लक्ष्यों को प्राप्त करने में मदद करना और हमारी अगली पीढ़ी के देशों व लोगों को पहले से कहीं अधिक करीब लाना है।
--आईएएनएस
एवाई/एबीएम
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