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लेबनान-इजरायल के दूसरे दौर की वार्ता से पहले राष्ट्रपति आउन बोले, 'तनाव खत्म करने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे'

बेरूत, 22 अप्रैल (आईएएनएस)। अमेरिका की मध्यस्थता में इजरायल और लेबनान के बीच दूसरे राउंड की वार्ता होने जा रही है। इस बीच लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ आउन ने कहा है कि सीजफायर को बढ़ाने के लिए बातचीत चल रही है। इसके साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि किसी भी पार्टी को सुरक्षा उपायों में रुकावट डालने या स्थिरता को कमजोर करने की इजाजत नहीं दी जाएगी।

राष्ट्रपति आउन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा, “हमारे देश के इतिहास के इस स्तर पर नागरिकों में शांति बनाए रखना एक रेड लाइन है। वह लेबनान में अजीब हालात को खत्म करने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ेंगे।”

इसके अलावा, राष्ट्रपति जोसेफ आउन ने पार्लियामेंट्री कमेटी फॉर द प्रोटेक्शन ऑफ सिविलियन प्रॉपर्टी एंड प्रिवेंशन ऑफ डेलिबरेट डिस्ट्रक्शन के अपने रिसेप्शन के दौरान कहा कि सीजफायर की डेडलाइन बढ़ाने के लिए बातचीत चल रही है और मैं लेबनान में अभी जो अजीब हालात हैं, उन्हें खत्म करने में कोई कसर नहीं छोड़ूंगा।

लेबनानी राष्ट्रपति ने कहा, मैं जो भी बातचीत और समीक्षा कर रहा हूं, उसमें लेबनान के सभी इलाकों पर उसकी आजादी बनाए रखना मेरी सबसे बड़ी प्राथमिकता है। जो बातचीत की तैयारी हो रही है, वह इजरायली हमलों को पूरी तरह रोकने, लेबनानी इलाकों से इजरायल की वापसी, कैदियों की वापसी, अंतरराष्ट्रीय सीमा पर सेना की तैनाती और इस युद्ध के दौरान जो कुछ भी तबाह हुआ था, उसे फिर से बनाने की शुरुआत पर आधारित है।

उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तरफ से मिले अमेरिकी समर्थन के अलावा भाईचारे वाले और दोस्त देशों से मिले समर्थन ने हमें एक ऐसा मौका दिया है जिसे हमें गंवाना नहीं चाहिए, क्योंकि हो सकता है कि यह दोबारा न मिले।

राष्ट्रपति जोसेफ आउन ने कहा, बेघर हुए लोगों की उनके गांवों में वापसी जरूरी है, खासकर इसलिए क्योंकि दक्षिण के लोग, सभी लेबनानी लोगों के साथ, पिछले दशकों में युद्धों और तकलीफों से थक चुके हैं। सरकार इस वापसी को सम्मान और गर्व के साथ पूरा करने के लिए सभी सुविधाएं देगी।

बता दें, लेबनान और इजरायल के बीच अमेरिका की मध्यस्थता के बाद 10 दिनों का सीजफायर 17 अप्रैल को लागू हुआ। पहले राउंड के वार्ता में अमेरिका की तरफ से विदेश सचिव मार्को रुबियो ने नेतृत्व किया। वहीं, अब दूसरे राउंड की वार्ता 23 अप्रैल को प्रस्तावित है।

--आईएएनएस

केके/एबीएम

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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पोषण संबंधी सलाह व्यक्तिगत होनी चाहिए, मानकीकृत नहीं: केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह

नई दिल्ली, 22 अप्रैल (आईएएनएस)। केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने बुधवार को चेतावनी दी कि आहार और जीवनशैली से संबंधित बीमारियों के बारे में जागरूकता गलत सूचना फैलाने वाले व्यक्तियों से नहीं लेनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि पोषण के क्षेत्र में गलत सूचना के प्रसार को रोकने के लिए विशेष ध्यान देना चाहिए और आहार को एक समान नुस्खे तक सीमित नहीं करना चाहिए। व्यक्तियों को अपने शरीर, जीवनशैली और चयापचय संबंधी आवश्यकताओं के अनुसार खान-पान की आदतों को अपनाना चाहिए।

मंत्री ने स्वास्थ्य सेवा और आहार संबंधी सलाह देने के क्षेत्र में बढ़ते व्यवसायीकरण के खिलाफ चेतावनी दी और कहा कि आकर्षक या अत्यधिक जटिल आहार योजनाएं अक्सर व्यावहारिक प्रासंगिकता की कमी के बावजूद लोकप्रियता हासिल कर लेती हैं।

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के एक बयान में कहा गया है कि डॉ. सिंह ने भोजन की गुणवत्ता और मात्रा के साथ-साथ उसके वितरण के महत्व पर भी जोर दिया और बताया कि आम तौर पर आहार के समय और मात्रा पर ध्यान नहीं दिया जाता है।

मंत्री ने परिष्कृत तेलों से लेकर पारंपरिक वसाओं तक, चीनी के विकल्प से लेकर प्राकृतिक विकल्पों तक, विभिन्न प्रकार के खाद्य पदार्थों पर वर्षों से विकसित हो रहे आहार संबंधी रुझानों और वैज्ञानिक दृष्टिकोण में आए बदलावों पर प्रकाश डाला, जिससे यह संकेत मिलता है कि पोषण के क्षेत्र में वैज्ञानिक समझ लगातार विकसित हो रही है।

उन्होंने कहा कि आहार विज्ञान में निष्कर्ष अक्सर जनसंख्या स्तर के साक्ष्यों पर आधारित होते हैं और जरूरी नहीं कि वे हर व्यक्ति पर समान रूप से लागू हों।

डॉ. सिंह ने नैदानिक ​​निर्णय और रोगी के साथ संवाद के महत्व पर भी बल दिया, और उस दौर को याद किया जब निदान काफी हद तक विस्तृत इतिहास और अवलोकन पर निर्भर करता था। उन्होंने कहा कि रिपोर्टों और मानकीकृत नुस्खों पर अत्यधिक निर्भरता कभी-कभी व्यक्तिगत भिन्नताओं को नजरअंदाज कर सकती है।

उन्होंने टिप्पणी की कि आहार इतना महत्वपूर्ण विषय है कि इसे किसी एक समूह पर नहीं छोड़ा जा सकता, और कहा कि व्यक्तियों को समय के साथ अपने आहार संबंधी प्रतिक्रियाओं का सक्रिय रूप से अवलोकन करना और उनसे सीखना चाहिए।

मंत्री एक पुस्तक विमोचन कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे, जिसमें चिकित्सा और वैज्ञानिक समुदाय के प्रमुख सदस्य शामिल हुए थे, जिनमें वरिष्ठ चिकित्सक और मधुमेह एवं पोषण के विशेषज्ञ शामिल थे।

--आईएएनएस

एमएस/

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