तीन बागी TMC सांसदों का भाजपा में जाने से इनकार:इनमें यूसुफ-अबू ताहिर, बोले- हम NDA में नहीं; 20 सांसदों ने NCPI में विलय किया था
पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के तीन बागी मुस्लिम सांसद अबू ताहिर खान, खलीलुर रहमान और यूसुफ पठान ने कहा है कि वे BJP में शामिल नहीं होंगे और वे NDA का हिस्सा भी नहीं हैं। तीनों सांसदों का कहना है कि वे BJP की राजनीति से सहमत नहीं हैं, लेकिन अपने क्षेत्रों के लोगों के हित में केंद्र और राज्य सरकार के साथ काम करेंगे। ये तीनों उन 20 बागी TMC सांसदों में शामिल हैं, जिन्होंने बंगाल विधानसभा चुनाव के कुछ हफ्तों बाद ममता बनर्जी की पार्टी से अलग होकर नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में विलय किया था। हालांकि, लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने अभी तक उन्हें औपचारिक रूप से NCPI सांसद के तौर पर मान्यता नहीं दी है। अबू ताहिर और खलीलुर रहमान के मुताबिक, स्पीकर अभी भी उन्हें संसद में TMC सांसद कहकर संबोधित करते हैं और उनके नाम के साथ TMC लिखा जाता है। PM की बैठक के बाद BJP से नजदीकी की अटकलें बढ़ी थीं अबू ताहिर, खलीलुर रहमान और यूसुफ पठान 7 जुलाई को पीएम मोदी की ओर से NDA के सांसदों के लिए आयोजित ब्रेकफास्ट मीटिंग में शामिल हुए थे। इसके बाद उनके BJP और NDA के करीब जाने की अटकलें तेज हो गई थीं। तीनों सांसदों ने 6 जुलाई को गृह मंत्री अमित शाह से भी मुलाकात की थी। तीनों ने शाह को एक ज्ञापन सौंपा था। इसमें मस्जिदों में लाउडस्पीकर के इस्तेमाल पर पाबंदियों और SIR के दौरान बंगाल के वोटरों के नाम हटाए जाने की शिकायतों को लेकर चिंता जताई गई थी। CM से मुलाकात के बाद अबू ताहिर बोले- NCPI के साथ रहेंगे अगले दिन यानी 8 जुलाई को अबू ताहिर और खलीलुर रहमान ने बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी से राज्य सचिवालय में मुलाकात की। बैठक के बाद खलीलुर रहमान से BJP में शामिल होने को लेकर सवाल पूछा गया। उन्होंने साफ कहा- नहीं, हम BJP में शामिल नहीं हो रहे हैं। हम NCPI के साथ रहेंगे। भविष्य में पार्टी के साथ बने रहने या कोई दूसरा राजनीतिक रास्ता चुनने के सवाल पर उन्होंने कहा- समय ही बताएगा। अबू ताहिर ने भी कहा कि वे BJP के साथ नहीं जाएंगे और NDA का हिस्सा नहीं बनेंगे। उन्होंने मुस्लिम समुदाय, खासकर पिछड़े और जरूरतमंद लोगों के मुद्दों पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत बताई। NCPI के अंदर मतभेद पर पार्टी ने कहा- बड़ी दरार नहीं बागी सांसदों के गुट में मतभेद की अटकलों के बीच NCPI की सांसद काकोली घोष दस्तिदार ने कहा कि पार्टी में कोई दरार नहीं है। उन्होंने कहा कि NCPI सांसदों के साथ पीएम मोदी की दो घंटे से ज्यादा की बैठक हुई, जिसमें बंगाल के विकास से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई और अबू ताहिर भी इसमें मौजूद थे। वहीं, पिछले हफ्ते 4 जुलाई को NDA सांसदों की ‘मंगल मिलन’ बैठक में NCPI के 17 सांसद शामिल हुए थे। अबू ताहिर, खलीलुर रहमान और यूसुफ पठान इस बैठक में शामिल नहीं हुए थे। TMC ने तीनों सांसदों को BJP की बी-टीम बताया दूसरी ओर, ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले TMC गुट ने इन सांसदों पर लोगों को गुमराह करने का आरोप लगाया है। TMC सांसद कल्याण बनर्जी ने कहा कि इन सांसदों ने स्पीकर को NCPI के साथ होने की जानकारी दी थी और NCPI को NDA का सहयोगी बताया जा चुका है। TMC विधायक कुणाल घोष ने NCPI को BJP की ‘बी-टीम’ बताया।
Sawan Ka Dusra Somwar 2026: सावन का दूसरा सोमवार आज, इन चीजों से करें शिवलिंग का अभिषेक
Sawan Ka Dusra Somwar 2026: सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष माना जाता है। सावन के सोमवार को शिव मंदिरों में सुबह से ही भक्तों की भीड़ देखने को मिलती है। आज 10 अगस्त 2026 को सावन का दूसरा सोमवार है। इस दिन श्रद्धालु भगवान शिव का जलाभिषेक कर बेलपत्र, फूल और अन्य पूजन सामग्री अर्पित कर रहे हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावन सोमवार को श्रद्धा के साथ भगवान शिव की पूजा करने और शिवलिंग पर प्रिय वस्तुएं अर्पित करने से मन को शांति मिलती है और भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
गंगाजल से करें शिवलिंग का अभिषेक
शिव पूजा में गंगाजल को पवित्र माना जाता है। सावन सोमवार को शिवलिंग पर गंगाजल अर्पित करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार गंगाजल से अभिषेक करने से मन की शुद्धि और सकारात्मकता की कामना की जाती है।
दूध से अभिषेक करना शुभ
सावन सोमवार की पूजा में दूध का भी इस्तेमाल किया जाता है। भक्त शिवलिंग पर दूध अर्पित करते हैं। धार्मिक मान्यताओं में इसे सुख, शांति और समृद्धि की कामना से जोड़ा जाता है। दूध अर्पित करने के बाद शिवलिंग को साफ जल से स्नान कराना उचित माना जाता है।
दही और शहद भी कर सकते हैं अर्पित
भगवान शिव की पूजा में दही और शहद चढ़ाने की भी परंपरा है। मान्यता के अनुसार दही को स्थिरता और सुख से, जबकि शहद को जीवन में मधुरता से जोड़कर देखा जाता है। यदि दही या शहद से अभिषेक करें तो इसके बाद शिवलिंग को साफ जल से धोकर पूजा आगे बढ़ाई जा सकती है।
गन्ने के रस से अभिषेक
कुछ धार्मिक परंपराओं में शिवलिंग पर गन्ने का रस चढ़ाने का भी उल्लेख मिलता है। इसे सुख-समृद्धि और मनोकामना से जोड़कर देखा जाता है। भक्त अपनी श्रद्धा और स्थानीय पूजा परंपरा के अनुसार इसका इस्तेमाल कर सकते हैं।
बेलपत्र के बिना अधूरी मानी जाती है शिव पूजा
भगवान शिव की पूजा में बेलपत्र का विशेष महत्व बताया गया है। जलाभिषेक के बाद शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाने की परंपरा है। बेलपत्र अर्पित करते समय साफ और साबुत पत्तों का इस्तेमाल करें। धार्मिक मान्यता के अनुसार तीन पत्तियों वाला बेलपत्र भगवान शिव को प्रिय माना जाता है।
शिवलिंग पर ये चीजें भी चढ़ाएं
सावन सोमवार की पूजा में जलाभिषेक के बाद भगवान शिव को बेलपत्र, धतूरा, शमी के पत्ते और सफेद फूल अर्पित किए जा सकते हैं। इसके बाद चंदन लगाकर भगवान शिव का ध्यान किया जाता है।
पूजा के दौरान 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का जाप करना भी शुभ माना जाता है। भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार मंत्र का जाप करते हुए शिवलिंग पर जल अर्पित कर सकते हैं।
11 अगस्त को सावन शिवरात्रि
सावन के दूसरे सोमवार के अगले ही दिन यानी 11 अगस्त 2026 को सावन शिवरात्रि मनाई जाएगी। भगवान शिव की आराधना के लिए सावन शिवरात्रि का भी विशेष महत्व माना जाता है।
इस दिन कई श्रद्धालु व्रत रखते हैं और भगवान शिव का रुद्राभिषेक करते हैं। कुछ स्थानों पर रात में चार प्रहर की पूजा करने की परंपरा भी है। भक्त शिवलिंग पर जल, दूध और बेलपत्र अर्पित कर भगवान शिव की पूजा करते हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पूजा में सबसे महत्वपूर्ण श्रद्धा और नियमों का पालन है। इसलिए अपनी पारिवारिक और स्थानीय परंपरा के अनुसार भगवान शिव की आराधना करना उचित माना जाता है।
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others
Haribhoomi










