मोदी बोले- मीराबाई के हर आंसू से गोल्ड मेडल टपका:हरियाणा की सीमा बोली- दोस्त कहते थे पीएम से मिली क्या, अब कहूंगी कि मिली हूं
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को नई दिल्ली में कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत के लिए मेडल जीतने वाले खिलाड़ियों से अपने आवास पर मुलाकात की। इस दौरान पीएम मोदी ने खिलाड़ियों से उनके अनुभव जाने और उनकी उपलब्धियों की सराहना की। खिलाड़ियों के साथ हुई इस मुलाकात का वीडियो सोमवार को यूट्यूब पर लाइव किया गया। बातचीत की शुरुआत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, पिछले 10-12 सालों में अगर मैं इस आवास पर नियमित रूप से किसी से मिला हूं, तो वे खिलाड़ी हैं। 10-12 सालों में खिलाड़ियों की कड़ी मेहनत, लगातार सफलता और नई ऊंचाइयों को छूने की परंपरा ने देश का मान बढ़ाया है। मैनें अपना मेडल गुरु को गिफ्ट किया- दिलीप पैरा एथलीट दिलीप महादु गावित ने अपना मेडल अपने गुरु को समर्पित किया। उन्होंने कहा, इवेंट के दिन गुरु पूर्णिमा थी और मैंने अपने गुरु को यह मेडल गिफ्ट के तौर पर दिया। दिलीप ने पुरुषों की पैरा T47 कैटेगरी की 100 मीटर रेस में 10.71 सेकेंड का समय निकालकर पहला स्थान हासिल किया था। मैं अपने आंसू नहीं रोक सकी- चानू PM मोदी ने वेटलिफ्टर मीराबाई चानू से कहा, आपके इतने आंसू टपक रहे थे कि मुझे लगा, हर बूंद से जैसे गोल्ड मेडल टपक रहा हो। चानू ने कहा, पेरिस ओलिंपिक में मेडल से चूकने के बाद पिछले चार साल मेरे लिए बेहद मुश्किल रहे। इस दौरान मुझे लगातार चोटों और पारिवारिक परेशानियों का सामना करना पड़ा। कॉमनवेल्थ गेम्स में पदक जीतने के बाद जब मैं पोडियम पर खड़ी थी और राष्ट्रगान बज रहा था, तब मैं अपने आंसू नहीं रोक सकी। चानू ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में विमेंस वेटलिफ्टिंग की 48 kg वेट कैटेगरी में कुल 190 किलो वजन उठाकर गोल्ड जीता था। मैनें तय कर लिया था पाकिस्तान को हराना है- जादुमणि मुक्केबाज जादुमणि सिंह ने 26 जुलाई को प्री-क्वार्टरफाइनल में पाकिस्तान के रहमान सुमामा को 5-0 से हराया था। कारगिल विजय दिवस के दिन हुए इस मुकाबले पर जादुमणि ने कहा, मैं भारतीय सेना से जुड़ा हूं, इसलिए मैंने पहले ही तय कर लिया था कि पाकिस्तान को हराना है। मैंने 5-0 से जीत दर्ज की और अपना मेडल कारगिल के वीरों को डेडिकेट किया। पीएम मोदी ने उनके इस जज्बे की तारीफ करते हुए कहा कि कारगिल के वीरों को मेडल समर्पित करने की भावना ने इस जीत को और खास बना दिया। नरेंद्र’नाम से ही नफरत हो गई है मुक्केबाज नरेंद्र बेरवाल ने पाकिस्तान के खिलाफ मुकाबले का एक दिलचस्प किस्सा सुनाया। उन्होंने कहा, 2015 के वर्ल्ड मिलिट्री गेम्स में पाकिस्तान के खिलाफ मेरी पहली फाइट थी। मिलिट्री की ओर से कॉल आई थी कि पाकिस्तान से नहीं हारना है। मैंने मुकाबला जीत लिया, लेकिन इस दौरान हम दोनों खिलाड़ी चोटिल हो गए और जीत के बाद दोनों को अस्पताल जाकर टांके लगवाने पड़े। वहां उसने मुझसे पूछा, ‘भाई जान, एक बात बोलूं?’ मैंने कहा, ‘हां, बोलो।’ उसने कहा, ‘आपका नाम नरेंद्र है, आपके कोच का नाम भी नरेंद्र है और आपके प्रधानमंत्री का नाम भी नरेंद्र है।’ इसके बाद उसने मजाकिया अंदाज में कहा कि उसे ‘नरेंद्र’ नाम से ही नफरत हो गई है।” हां, मैं मोदी जी से मिली हूं - सीमा हरियाणा की सीमा कालीरमन ने कहा, “मेरे दोस्त अक्सर मजाक में पूछते थे, ‘तन्नै मोदी तै मुलाकात कर ली के?’ यानी, क्या तू मोदी से मिली हुई है? अब मैं खुशी से उन्हें बोल पाउंगी कि हां, मैं मोदी जी से मिली हूं।” सीमा ने डिस्कस थ्रो में 58.65 मीटर का थ्रो कर ब्रॉन्ज मेडल जीता था। पहले भी खिलाड़ियों से मिल चुके हैं मोदी मुक्केबाजों ने सबसे ज्यादा मेडल जीते भारत के 39 पदकों में सबसे बड़ा योगदान बॉक्सिंग का रहा। मुक्केबाजों ने 7 गोल्ड और 3 सिल्वर समेत कुल 10 मेडल जीते। यानी हर चार में से एक मेडल बॉक्सिंग से आया। एथलेटिक्स में 10 मेडल आए, लेकिन इसमें गोल्ड नहीं मिला। वेटलिफ्टिंग से 8, पैरा एथलेटिक्स से 6, जूडो से 4 और पैरा पावरलिफ्टिंग से 1 मेडल मिला। कुल मिलाकर 39 में से 37 पदक सिर्फ पांच खेलों से आए।
CM धामी का बड़ा ऐलान, परमवीर चक्र विजेताओं की अनुग्रह राशि बढ़ेगी, अब मिलेंगे 2 करोड़ रुपये
CM Dhami: उत्तराखंड को देश की सैन्य परंपरा और वीर सैनिकों की भूमि के रूप में जाना जाता है. राज्य के जवानों ने देश की सीमाओं की रक्षा में हमेशा महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. अपने अदम्य साहस, शौर्य और बलिदान से उत्तराखंड के वीरों ने न सिर्फ प्रदेश, बल्कि पूरे देश का गौरव बढ़ाया है. इसी सैन्य परंपरा और वीर सैनिकों के सम्मान को आगे बढ़ाते हुए उत्तराखंड सरकार ने एक महत्वपूर्ण फैसला लेने की बात कही है.
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा है कि परमवीर चक्र से सम्मानित वीरों को दी जाने वाली अनुग्रह राशि को बढ़ाया जाएगा. अभी यह राशि 1.50 करोड़ रुपये है, जिसे बढ़ाकर 2 करोड़ रुपये किया जाएगा. सरकार का मानना है कि यह राशि सिर्फ आर्थिक सहायता नहीं है, बल्कि देश के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले वीर जवानों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता का प्रतीक है.
सैन्यभूमि उत्तराखंड के वीरों ने सदैव अपने अदम्य शौर्य और पराक्रम से देवभूमि की सैन्य परंपरा को गौरवान्वित किया है। देश की सीमाओं की रक्षा में उत्तराखंड के वीर जवानों का योगदान अतुलनीय रहा है। हमारी सरकार भी सैनिकों, पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों के सम्मान, उत्थान एवं कल्याण के… pic.twitter.com/ISsC1EtYWL
— Pushkar Singh Dhami (@pushkardhami) August 9, 2026
सीएम ने माना अतुलनीय योगदान
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड के वीर जवानों का देश की सुरक्षा में योगदान अतुलनीय रहा है. राज्य के हजारों सैनिकों ने अलग-अलग युद्धों और सैन्य अभियानों में अपनी बहादुरी का परिचय दिया है. कई वीर सैनिकों ने देश की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया, जबकि कई ने अपने अदम्य साहस के लिए देश के सर्वोच्च सैन्य सम्मानों से सम्मानित होकर उत्तराखंड का नाम रोशन किया.
'प्राथमिकता देना सरकार की जिम्मेदारी'
सीएम धामी ने कहा कि राज्य सरकार सैनिकों, पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों के सम्मान, उत्थान और कल्याण के लिए लगातार काम कर रही है. सरकार की कोशिश है कि देश की रक्षा करने वाले सैनिकों और उनके परिवारों को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े. सैनिकों के सम्मान और उनके परिवारों के हितों को प्राथमिकता देना सरकार की जिम्मेदारी है.
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सर्वोच्च सैन्य सम्मान है परमवीर चक्र
परमवीर चक्र देश का सर्वोच्च सैन्य सम्मान है. यह सम्मान युद्ध के दौरान असाधारण वीरता और अदम्य साहस दिखाने वाले सैनिकों को दिया जाता है. ऐसे वीरों के योगदान को किसी भी आर्थिक सहायता से मापा नहीं जा सकता. इसके बावजूद अनुग्रह राशि में बढ़ोतरी सरकार की ओर से उनके बलिदान को सम्मान देने की एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है.
मुख्यमंत्री ने जताई कृतज्ञता
मुख्यमंत्री ने इस फैसले को वीर सैनिकों के त्याग और बलिदान के प्रति सरकार की कृतज्ञता बताया. उन्होंने कहा कि देश की सीमाओं पर तैनात जवान कठिन परिस्थितियों में भी अपने कर्तव्य से पीछे नहीं हटते. बर्फीले पहाड़ों से लेकर कठिन सीमाई इलाकों तक सैनिक हर परिस्थिति में देश की सुरक्षा के लिए डटे रहते हैं. ऐसे में उनके सम्मान और कल्याण के लिए सरकार की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है.
उत्तराखंड में सेना और सैनिकों से जुड़ी परंपरा का गहरा संबंध रहा है. राज्य के बड़ी संख्या में युवा सेना में शामिल होकर देश की सेवा करते हैं. यही वजह है कि उत्तराखंड को अक्सर ‘सैन्यभूमि’ के रूप में भी जाना जाता है. यहां सैनिकों और पूर्व सैनिकों का सम्मान सामाजिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा है.
सरकार ने कहा- सकारात्मक संदेश मिलेगा
सरकार की ओर से अनुग्रह राशि बढ़ाने का यह फैसला आने वाली पीढ़ियों के लिए भी एक सकारात्मक संदेश देता है. इससे युवाओं में देश सेवा और सेना के प्रति सम्मान की भावना और मजबूत होने की उम्मीद है. साथ ही, यह संदेश भी जाता है कि देश की रक्षा में योगदान देने वाले वीरों और उनके परिवारों के सम्मान को सरकार सर्वोच्च प्राथमिकता देती है. सीएम धामी ने कहा कि उत्तराखंड की सैन्य परंपरा को आगे बढ़ाना और वीर सैनिकों के सम्मान को बनाए रखना सरकार की प्राथमिकता है. परमवीर चक्र विजेताओं के लिए 2 करोड़ रुपये की अनुग्रह राशि इसी सम्मान और कृतज्ञता की भावना का प्रतीक है.
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