अफ्रीका में भारत की मजबूत होती पकड़, दिया 100 मिलियन डॉलर का नया कर्ज: रिपोर्ट
नई दिल्ली, 22 अप्रैल (आईएएनएस)। भारत अफ्रीका में अपने वित्तीय प्रभाव को लगातार बढ़ा रहा है। इसी कड़ी में भारत के एक्सपोर्ट-इम्पोर्ट बैंक (एक्जिम बैंक) ने अफ्रीका फाइनेंस कार्पोरेशन (एएफसी) को 100 मिलियन डॉलर का पांच साल का कर्ज दिया है। बिजनेस इनसाइडर अफ्रीका की एक रिपोर्ट में यह जानकारी सामने आई है।
इस रिपोर्ट के अनुसार, यह कर्ज अफ्रीका में भारत की बढ़ती आर्थिक मौजूदगी को दिखाता है। भारत यहां व्यापार, निवेश और निर्यात-ऋण के जरिए अपनी पकड़ मजबूत कर रहा है और चीन, यूरोप, खाड़ी देशों और अमेरिका से प्रतिस्पर्धा कर रहा है।
एएफसी को दिया गया यह कर्ज अफ्रीका में इंफ्रास्ट्रक्चर और औद्योगिक परियोजनाओं के लिए मध्यम अवधि की फंडिंग उपलब्ध कराएगा। वैश्विक बाजार में सख्ती के कारण अफ्रीकी देशों के लिए कर्ज लेना महंगा हो गया है, ऐसे में यह मदद अहम मानी जा रही है।
रिपोर्ट में कहा गया है, यह समझौता लंदन में एएफसी के इन्वेस्टर डे के दौरान साइन हुआ। इससे लागोस स्थित इस संस्था को अतिरिक्त फंड मिलेगा, क्योंकि कई अफ्रीकी देश अभी भी ऊंची ब्याज दरों, कमजोर मुद्राओं और अंतरराष्ट्रीय निवेशकों की सतर्कता जैसी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं।
यह कर्ज 2021 में एक्जिम बैंक द्वारा दिए गए 100 मिलियन डॉलर के एक और कर्ज के बाद आया है और इसका उद्देश्य अफ्रीका में इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए फंड की कमी को पूरा करना है।
यह डील अफ्रीका में भारत की बढ़ती आर्थिक और व्यावसायिक रुचि को भी दर्शाता है, जहां सड़कों, बंदरगाहों, बिजली संयंत्रों, रेल लाइनों, डिजिटल नेटवर्क और औद्योगिक परियोजनाओं की मांग उपलब्ध पूंजी से कहीं ज्यादा है।
एएफसी के एग्जीक्यूटिव बोर्ड सदस्य और वित्तीय सेवाओं के प्रमुख बैंजी फेहिंटोला ने कहा, यह समझौता भारत एक्जिम बैंक के साथ हमारी लंबी साझेदारी में एक महत्वपूर्ण कदम है और अफ्रीका में इंफ्रास्ट्रक्चर विकास के प्रति हमारी साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
भारतीय कंपनियां पहले से ही अफ्रीका में फार्मा, कृषि, टेक्नोलॉजी, मैन्युफैक्चरिंग, माइनिंग और ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में सक्रिय हैं।
अफ्रीकी देश तेजी से औद्योगिक विकास के लिए भारत को पूंजी और विशेषज्ञता के एक भरोसेमंद विकल्प के रूप में देख रहे हैं।
अफ्रीकी विकास बैंक ने पहले अनुमान लगाया था कि अफ्रीका को हर साल इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए 130 से 170 अरब डॉलर की जरूरत होती है, जिसमें हर साल 108 अरब डॉलर तक की फंडिंग की कमी बनी रहती है।
--आईएएनएस
डीबीपी
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IPAC छापेमारी केस में सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी, ममता बनर्जी के दखल पर उठाए सवाल; कहा- लोकतंत्र को खतरे में डाला
आज (22 अप्रैल) यानी बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में पश्चिम बंगाल के IPAC छापेमारी मामले की सुनवाई के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के दखल को लेकर कड़ी टिप्पणी की गई. कोर्ट ने कहा कि किसी भी जांच में एक मौजूदा मुख्यमंत्री का इस तरह हस्तक्षेप करना बेहद गंभीर मामला है और इसे सामान्य केंद्र-राज्य विवाद नहीं कहा जा सकता. अदालत ने यह भी कहा कि ऐसी स्थिति की कल्पना संविधान विशेषज्ञों ने भी नहीं की थी. सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति एनवी अंजारी की पीठ ने कहा कि ममता बनर्जी का छापे के दौरान मौके पर पहुंचना और हस्तक्षेप करना पूरी व्यवस्था और लोकतंत्र को खतरे में डालने जैसा है. कोर्ट ने इस पर नाराजगी जताते हुए कहा कि एक संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति से इस तरह के व्यवहार की उम्मीद नहीं की जाती.
राज्य सरकार के तर्क खारिज
ममता बनर्जी की ओर से पेश वरिष्ठ वकील मेनका गुरुस्वामी ने तर्क दिया कि यह मामला केंद्र और राज्य के बीच का विवाद है, इसलिए इसे संविधान के अनुच्छेद 131 के तहत देखा जाना चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) को अनुच्छेद 32 के तहत याचिका दायर करने का अधिकार नहीं है.
The Supreme Court of India raised serious concerns over alleged interference by West Bengal CM Mamata Banerjee during an Enforcement Directorate (ED) raid linked to the I-PAC case, observing that such actions could pose a threat to democratic processes. A bench led by Justice… pic.twitter.com/IpVKUuXusj
— IANS (@ians_india) April 22, 2026
लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस तर्क को खारिज कर दिया. कोर्ट ने साफ कहा कि यह मामला किसी राज्य के अधिकारों से जुड़ा नहीं है, बल्कि एक व्यक्ति के व्यवहार से जुड़ा है, जो संयोग से मुख्यमंत्री है. इसलिए इसे केंद्र-राज्य विवाद नहीं माना जा सकता.
Kolkata, West Bengal: On the Supreme Court expressing displeasure over interference by West Bengal CM Mamata Banerjee during an Enforcement Directorate (ED) raid linked to the I-PAC case, Minister Bratya Basu says, "This is an observation. We can't comment on an observation. We… pic.twitter.com/jlv5fix2E4
— IANS (@ians_india) April 22, 2026
ईडी और सीबीआई जांच की मांग
यह मामला ईडी द्वारा दायर याचिकाओं से जुड़ा है, जिसमें ममता बनर्जी और राज्य पुलिस अधिकारियों के खिलाफ सीबीआई जांच की मांग की गई है. आरोप है कि I-PAC से जुड़े स्थान पर ईडी की छापेमारी के दौरान राज्य पुलिस ने जांच में बाधा डाली. वहीं, ईडी अधिकारियों ने अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर को भी कोर्ट में चुनौती दी है. बता दें कि कोर्ट ने मामले को पांच जजों की बड़ी बेंच को भेजने की मांग भी खारिज कर दी और कहा कि इसमें ऐसा कोई बड़ा संवैधानिक सवाल नहीं है. फिलहाल, मामले की सुनवाई जारी है.
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