IPAC छापेमारी केस में सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी, ममता बनर्जी के दखल पर उठाए सवाल; कहा- लोकतंत्र को खतरे में डाला
आज (22 अप्रैल) यानी बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में पश्चिम बंगाल के IPAC छापेमारी मामले की सुनवाई के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के दखल को लेकर कड़ी टिप्पणी की गई. कोर्ट ने कहा कि किसी भी जांच में एक मौजूदा मुख्यमंत्री का इस तरह हस्तक्षेप करना बेहद गंभीर मामला है और इसे सामान्य केंद्र-राज्य विवाद नहीं कहा जा सकता. अदालत ने यह भी कहा कि ऐसी स्थिति की कल्पना संविधान विशेषज्ञों ने भी नहीं की थी. सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति एनवी अंजारी की पीठ ने कहा कि ममता बनर्जी का छापे के दौरान मौके पर पहुंचना और हस्तक्षेप करना पूरी व्यवस्था और लोकतंत्र को खतरे में डालने जैसा है. कोर्ट ने इस पर नाराजगी जताते हुए कहा कि एक संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति से इस तरह के व्यवहार की उम्मीद नहीं की जाती.
राज्य सरकार के तर्क खारिज
ममता बनर्जी की ओर से पेश वरिष्ठ वकील मेनका गुरुस्वामी ने तर्क दिया कि यह मामला केंद्र और राज्य के बीच का विवाद है, इसलिए इसे संविधान के अनुच्छेद 131 के तहत देखा जाना चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) को अनुच्छेद 32 के तहत याचिका दायर करने का अधिकार नहीं है.
The Supreme Court of India raised serious concerns over alleged interference by West Bengal CM Mamata Banerjee during an Enforcement Directorate (ED) raid linked to the I-PAC case, observing that such actions could pose a threat to democratic processes. A bench led by Justice… pic.twitter.com/IpVKUuXusj
— IANS (@ians_india) April 22, 2026
लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस तर्क को खारिज कर दिया. कोर्ट ने साफ कहा कि यह मामला किसी राज्य के अधिकारों से जुड़ा नहीं है, बल्कि एक व्यक्ति के व्यवहार से जुड़ा है, जो संयोग से मुख्यमंत्री है. इसलिए इसे केंद्र-राज्य विवाद नहीं माना जा सकता.
Kolkata, West Bengal: On the Supreme Court expressing displeasure over interference by West Bengal CM Mamata Banerjee during an Enforcement Directorate (ED) raid linked to the I-PAC case, Minister Bratya Basu says, "This is an observation. We can't comment on an observation. We… pic.twitter.com/jlv5fix2E4
— IANS (@ians_india) April 22, 2026
ईडी और सीबीआई जांच की मांग
यह मामला ईडी द्वारा दायर याचिकाओं से जुड़ा है, जिसमें ममता बनर्जी और राज्य पुलिस अधिकारियों के खिलाफ सीबीआई जांच की मांग की गई है. आरोप है कि I-PAC से जुड़े स्थान पर ईडी की छापेमारी के दौरान राज्य पुलिस ने जांच में बाधा डाली. वहीं, ईडी अधिकारियों ने अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर को भी कोर्ट में चुनौती दी है. बता दें कि कोर्ट ने मामले को पांच जजों की बड़ी बेंच को भेजने की मांग भी खारिज कर दी और कहा कि इसमें ऐसा कोई बड़ा संवैधानिक सवाल नहीं है. फिलहाल, मामले की सुनवाई जारी है.
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'आशा भोसले के निधन पर जश्न मनाएं', सोनू निगम ने लेजेंड्री सिंगर को लेकर कही ये बात, वीडियो वायरल
Sonu Nigam On Asha Bhosle: जाने माने सिंगर सोनू निगम ने हाल ही में एक भावुक वीडियो के जरिए महान गायिका आशा भोसले के साथ बिताए अपने खास पलों को याद किया. उन्होंने न सिर्फ उनके साथ जुड़े कई अनसुने किस्से साझा किए, बल्कि ये भी कहा कि आशा भोसले जैसी शख्सियत के जाने पर केवल शोक नहीं, बल्कि उनके जीवन का उत्सव मनाया जाना चाहिए. गौरतलब है कि 12 अप्रैल को 92 वर्ष की उम्र में आशा भोसले का मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में निधन हो गया था. उनके निधन की खबर से संगीत जगत में शोक की लहर दौड़ गई, लेकिन सोनू निगम ने इस पर एक अलग और इंस्पिरेशनल पर्सपेक्टिव रखा.
पहली मुलाकात और समर्पण
सोनू निगम ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर शेयर किए गए वीडियो में बताया कि उनकी पहली मुलाकात आशा भोसले से 1996 में हुई थी. ये मौका भरत भाई शाह के बेटे की शादी के दौरान आयोजित एक कॉन्सर्ट का था. उन्होंने याद करते हुए कहा, “वो मेरा उनके साथ पहला कॉन्सर्ट था. उनका गला खराब था, उन्होंने मुझसे कहा कि तुम मेरे साथ गाओगे. उन्होंने ये भी कहा कि शायद वो गा नहीं पाएंगी, लेकिन जब मंच पर आईं तो उन्होंने पूरी ताकत के साथ गाया. वो इतनी बड़ी कलाकार थीं कि उन्हें मेरी जरूरत नहीं थी, लेकिन उनकी लगन और प्रोफेशनलिज्म कमाल का था.” सोनू निगम ने आशा भोसले को “प्रेरणा की मूर्ति” बताते हुए कहा कि उनका समर्पण हर कलाकार के लिए एक उदाहरण है.
अमेरिका टूर और निजी जुड़ाव
सोनू निगम ने 1996 में अमेरिका टूर का एक दिलचस्प किस्सा भी साझा किया. इस टूर में उनके साथ अमित कुमार और आशा भोसले भी थे.
उन्होंने बताया, “उनके पैर में हील स्पर हो गया था, जिससे उन्हें खड़े होने में दिक्कत हो रही थी. मेरी मां को भी ऐसी समस्या रही थी, इसलिए मुझे उसका इलाज करना आता था. मैंने उनके पैर दबाए और कुछ ही दिनों में उन्हें राहत मिल गई. बाद में वो कई सालों तक मुझे ये बात याद दिलाती रहीं.”
वैंकूवर में दाल-चावल की याद
सोनू ने एक और प्यारा किस्सा साझा करते हुए बताया कि वैंकूवर में एक दिन आशा भोसले ने खुद उनके लिए दाल-चावल बनाए थे. उन्होंने कहा, “उन्होंने मुझसे पूछा कि चावल खाओगे? मैंने कहा हां. फिर उन्होंने खुद खाना बनाया. ये हमारे लिए सौभाग्य की बात थी कि इतनी बड़ी कलाकार ने हमें अपने हाथों से खाना खिलाया.”
उनके जाने पर सोनू की सोच
आशा भोसले के निधन पर सोनू निगम ने कहा कि उनका जीवन इतना पूर्ण और प्रेरणादायक था कि उनके जाने पर केवल दुख मनाना सही नहीं.
सोनू निगम ने कहा, “उन्होंने 92 साल की उम्र तक काम किया, आखिरी समय तक रिलेवेंट रहीं. ऐसा जीवन हर कलाकार का सपना होता है. इसलिए मुझे लगता है कि उनके जाने का दुख जरूर है, लेकिन इसे एक उत्सव की तरह देखना चाहिए.”
कलाकारों के लिए प्रेरणा
सोनू निगम ने आगे कहा कि आशा भोसले का जीवन हर कलाकार के लिए एक आदर्श है. लंबी उम्र, लगातार काम और अंत तक सम्मान. उन्होंने कहा, “ऐसा जीवन जीना, जहां आखिरी सांस तक आपकी कला जीवित रहे, ये हर कलाकार का सपना होता है. आशा जी ने ये सपना जीकर दिखाया.”
सम्मान और विनम्रता
सोनू ने ये भी बताया कि आशा भोसले का व्यक्तित्व बेहद इम्प्रेसिव था. वह अपनी फ्रैंकनेस के लिए जानी जाती थीं और कभी-कभी तीखी टिप्पणियां भी करती थीं, लेकिन वह उनका अधिकार था. उन्होंने कहा, “वो हमसे बड़ी थीं, गुरु थीं. उनकी हर बात के सामने हमारा सिर झुकता था. उन्होंने फिल्म संगीत को जो पहचान दी, वो अमूल्य है.”
एक युग का अंत
अंत में सोनू निगम ने भावुक होकर कहा कि आशा भोसले उस पीढ़ी की आखिरी प्रतिनिधि थीं, जिसने भारतीय फिल्म संगीत को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया. उन्होंने कहा, “वो उस दौर की आखिरी सिपाही थीं, जिसने फिल्म संगीत को पहचान दिलाई. उनके जाने से एक युग का अंत हो गया.”
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