26 दिन में ढही कुर्सी, नेपाल के गृह मंत्री सुदन गुरुंग ने अचानक क्यों दिया इस्तीफा? जानें कारण
नेपाल की नई सरकार को बड़ा झटका लगा है. बालेन शाह के नेतृत्व वाली सरकार के गृह मंत्री सुदन गुरुंग ने पद संभालने के महज 26 दिन बाद ही इस्तीफा दे दिया. उन्होंने आज (22 अप्रैल) अपने इस्तीफे की जानकारी सोशल मीडिया पर दी और कहा कि वे नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए पद छोड़ रहे हैं, ताकि उनके खिलाफ लगे आरोपों की निष्पक्ष जांच हो सके. तो आइए जानते हैं उनके इस्तीफे के पीछे की पूरी कहानी.
गुरंग का फेसबुक पोस्ट
गुरुंग ने अपने फेसबुक पोस्ट में लिखा कि उन्होंने सार्वजनिक आलोचना को गंभीरता से लिया है और सार्वजनिक जीवन में पारदर्शिता बनाए रखना जरूरी है. उन्होंने कहा कि हितों के टकराव को देखते हुए उन्होंने यह फैसला लिया और जांच पूरी होने के बाद ही अपने भविष्य को लेकर कोई निर्णय करेंगे.
"For me, ethics hold more weight than any position": Nepal Home Minister Sudan Gurung resigns
— ANI Digital (@ani_digital) April 22, 2026
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क्या हैं आरोप?
जानकारी के मुताबिक, गुरुंग का नाम विवादित कारोबारी दीपक भट्ट के साथ जुड़ने के बाद विवाद शुरू हुआ. भट्ट पर मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप हैं और उनके खिलाफ जांच चल रही है. रिपोर्ट के मुताबिक, गुरुंग के सामाजिक संगठन “हामी नेपाल” को भट्ट से जुड़ी कंपनियों के खाते से करीब 5 करोड़ रुपये मिले थे.
Nepal's Home Minister Sudan Gurung has announced his resignation amid controversy over his financial transactions since his election last month.
— Al Jazeera English (@AJEnglish) April 22, 2026
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इसके अलावा, गुरुंग पर यह भी आरोप लगा कि उन्होंने अपनी संपत्ति की आधिकारिक घोषणा में कुछ निवेश की जानकारी छुपाई. उनके बैंक खाते में 60 लाख रुपये जमा होने और उस पैसे से शेयर खरीदने की बात भी सामने आई, जिससे उनके धन के स्रोत पर सवाल उठे.
Sudan Gurung writes, "मसँग सम्बन्धित विषयमा निष्पक्ष छानबिन होस् र पदमा रहँदा conflict of interest नदेखियोस र त्यसमा कुनै असर नपरोस् भन्ने उद्देश्यले मैले आजकै मितिदेखि लागू हुने गरी गृह मन्त्री पदबाट राजीनामा दिएको छु।" pic.twitter.com/5vKmxuA0Jy
— Routine of Nepal banda (@RONBupdates) April 22, 2026
एक और बड़ा मुद्दा यह था कि गृह मंत्री के रूप में वे उसी पुलिस विभाग के प्रमुख थे, जो उनके कथित कारोबारी साझेदारों के खिलाफ जांच कर रहा था. इससे हितों के टकराव की स्थिति बन गई. विपक्ष ने भी उन पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए और सरकार की छवि पर सवाल उठाए.
सरकार पर बढ़ा दबाव
आपको बता दें कि गुरुंग को बालेन शाह का करीबी माना जाता है और उन्होंने 2025 में केपी ओली सरकार के खिलाफ हुए विरोध प्रदर्शनों में अहम भूमिका निभाई थी. उनके इस्तीफे से सरकार की साख पर असर पड़ा है. गौरतलब है कि यह इस सरकार में दूसरा बड़ा इस्तीफा है. इससे पहले श्रम मंत्री दीपक कुमार शाह को भी पद से हटाया गया था. लगातार हो रहे विवादों से सरकार पर दबाव बढ़ता नजर आ रहा है.
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