Phone tracking shows how Colombian mercenaries backed Sudan’s RSF, report says | BBC News
A network of Colombian mercenaries backed by the United Arab Emirates (UAE) provided critical support to Sudan's paramilitary Rapid Support Forces (RSF) enabling it to capture the western city of el-Fasher last year, a new report said. The investigation, by security analysis organisation the Conflict Insights Group (CIG), used data obtained from tracking the mobile phones of the Colombian fighters. The UAE has long denied supporting the RSF, which has been fighting Sudan's regular army for three years. El-Fasher's fall was one of the most brutal chapters of the conflict, which has led to the world's worst humanitarian crisis with tens of thousands killed and millions forced from their homes. Subscribe to our channel here: https://bbc.in/bbcnews For the latest news download the BBC News app or visit BBC.com/news #Sudan #Colombia #UAE #BBCNews
UP Rental Housing Policy 2026: योगी सरकार का अहम फैसला, मजदूरों को अब 1500 रुपए में मिलेगा किराये का घर
UP Rental Housing Policy 2026: उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने राज्य के औद्योगिक शहरों में काम करने वाले मजदूरों और छोटे कामगारों के लिए एक बहुत ही महत्वपूर्ण कदम उठाया है. अक्सर देखा जाता है कि बड़े शहरों में काम की तलाश में आने वाले मजदूरों के लिए सबसे बड़ी चुनौती एक छत तलाशना होती है. कमाई का एक बड़ा हिस्सा महंगे किराए में चला जाता है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति हमेशा कमजोर बनी रहती है. इसी समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए सरकार ने 'किफायती किराया आवास नीति' को मंजूरी दी है. इस योजना के जरिए अब मजदूरों को शहरों में भटकना नहीं पड़ेगा और उन्हें बेहद कम दाम पर रहने की सुविधा मिलेगी.
औद्योगिक क्षेत्रों में होगा बड़ा बदलाव
इस नई नीति के तहत औद्योगिक विकास विभाग ने एक विशेष प्रावधान किया है. अब भविष्य में उद्योगों को जो भी जमीन आवंटित की जाएगी, उसका 30 प्रतिशत हिस्सा मजदूरों के लिए घर बनाने के काम में लाया जाएगा. इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि कामगारों को अपने कारखाने या वर्कशॉप के बिल्कुल पास ही रहने की जगह मिल जाएगी. इससे न केवल उनके समय की बचत होगी, बल्कि आने-जाने में होने वाले खर्च में भी बड़ी कटौती होगी. सरकार का मानना है कि जब मजदूर कार्यस्थल के पास रहेंगे, तो उनकी कार्यक्षमता में भी सुधार होगा.
किराए का बोझ होगा कम
आज के दौर में नोएडा, गाजियाबाद या लखनऊ जैसे शहरों में एक छोटा सा कमरा लेना भी आम आदमी के बजट से बाहर होता जा रहा है. निजी मकान मालिक एक कमरे का किराया भी कई हजार रुपये वसूलते हैं. लेकिन सरकार की इस योजना में किराए की दरें सुनकर हर कोई हैरान है. अनुमान लगाया जा रहा है कि इन घरों का किराया महज 1000 से 1500 रुपये प्रति माह के बीच रखा जाएगा. इतनी कम कीमत में पक्का मकान मिलना किसी सपने के सच होने जैसा है. यह कदम सीधे तौर पर उन लोगों की जेब पर पड़ रहे बोझ को कम करेगा जो दिन-रात मेहनत करके शहर को आगे बढ़ाते हैं.
निजी डेवलपर्स की भागीदारी और रियायतें
सरकार इस बड़ी योजना को केवल सरकारी स्तर पर ही नहीं, बल्कि निजी क्षेत्र के सहयोग से भी पूरा करना चाहती है. जो भी निजी डेवलपर्स मजदूरों के लिए सस्ते घर बनाने में रुचि दिखाएंगे, उन्हें सरकार की ओर से विशेष प्रोत्साहन दिया जाएगा. इसमें जमीन की कीमतों में छूट, नक्शा पास कराने की प्रक्रिया में नरमी और स्टांप ड्यूटी जैसे खर्चों में राहत शामिल है. इसके अलावा स्थानीय विकास प्राधिकरणों को भी निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने क्षेत्रों में ऐसे मॉडल तैयार करें जिससे ज्यादा से ज्यादा जरूरतमंदों को कवर किया जा सके.
इन लोगों को मिलेगा सीधा लाभ
यह योजना केवल फैक्ट्री में काम करने वाले रजिस्टर्ड मजदूरों तक सीमित नहीं है. इसमें शहर की व्यवस्था को चलाने वाले तमाम छोटे कामगारों को भी जोड़ा गया है. सड़क पर सामान बेचने वाले वेंडर, घरों में रंग-रोगन करने वाले पेंटर, बिजली ठीक करने वाले इलेक्ट्रिशियन और प्लंबर जैसे लोग भी इस किफायती आवास के हकदार होंगे. आवंटन की प्रक्रिया को इस तरह से पारदर्शी बनाया जाएगा कि जो वास्तव में जरूरतमंद है, उसे प्राथमिकता मिले. साथ ही यह व्यवस्था रोटेशन पर आधारित होगी, यानी एक व्यक्ति के घर छोड़ने पर दूसरे जरूरतमंद को तुरंत जगह मिल जाएगी.
मजदूरों की मांग पर सरकार की मुहर
पिछले कुछ समय से विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों में मजदूरों ने वेतन और बढ़ती महंगाई को लेकर अपनी आवाज बुलंद की थी. खासकर बढ़ते मकान किराए को लेकर श्रमिकों में काफी असंतोष था. इस मामले की गंभीरता को देखते हुए सरकार ने एक उच्च स्तरीय कमेटी का गठन किया था. कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट कहा था कि अगर उद्योगों को सुचारू रूप से चलाना है, तो श्रमिकों को बेहतर और सस्ता आवास देना अनिवार्य है. इसी रिपोर्ट के सुझावों को अमल में लाते हुए सरकार ने इस नीति का खाका तैयार किया है.
शहरों के विकास में नई क्रांति
उत्तर प्रदेश के बड़े औद्योगिक केंद्रों में इस नीति के लागू होने से शहरों का स्वरूप भी बदलेगा. सड़कों के किनारे बनी अवैध झुग्गियों की संख्या में कमी आएगी और मजदूरों को एक सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर मिलेगा. जब एक गरीब मजदूर को पता होगा कि उसके सिर पर सुरक्षित छत है और किराया भी बहुत कम है, तो वह अपनी बाकी की बचत का इस्तेमाल अपने बच्चों की पढ़ाई और परिवार के स्वास्थ्य पर कर सकेगा. यह योजना उत्तर प्रदेश के समग्र विकास की दिशा में एक मिल का पत्थर साबित होने वाली है.
यह भी पढ़ें: कैबिनेट ने उत्तर प्रदेश और आंध्र प्रदेश के लिए 24,815 करोड़ रुपए के दो महत्वपूर्ण रेलवे प्रोजेक्ट्स को दी मंजूरी
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others
BBC News
News Nation













.jpg)







